शहाबुद्दीन की पत्नी को राज्यसभा भेजेगा RJD? AIMIM को घेरने के लिए लालू-तेजस्वी की रणनीति!
राज्यसभा चुनाव में हेना शहाब आरजेडी की प्रत्याशी हो सकती हैं. भाई वीरेंद्र ने नेतृत्व से विचार करने की अपील की है. पढ़ें पूरी खबर..

Published : February 23, 2026 at 8:48 PM IST
सिवान: राज्यसभा चुनाव को लेकर इन दिनों बिहार की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. 5 सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें से 4 पर एनडीए की जीत तय है लेकिन पांचवीं सीट पर पेंच फंसा हुआ है. अगर विपक्ष एकजुट रहा तो जीत संभव है. इस वजह से आरजेडी ऐसे प्रत्याशी की तलाश में है, जिसे एआईएमआईएम का भी आसानी से समर्थन मिल जाए. इसी क्रम में सिवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हेना शहाब के नाम की भी चर्चा शुरू हो गई है.
भाई वीरेंद्र ने की मांग: राष्ट्रीय जनता दल के विधायक भाई वीरेंद्र ने पार्टी नेतृत्व से मांग की है कि राज्यसभा के लिए हेना शहाब को उम्मीदवार बनाया जाए. उन्होंने कहा कि इससे यह संदेश भी जाएगा कि पार्टी अपने पुराने साथियों और उनके परिवारों के प्रति प्रतिबद्ध है. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ने लगी है कि क्या वाकई आरजेडी इस बार उनको उच्च सदन भेजने का फैसला लेगा?

"हेना शहाब को राज्यसभा भेजना पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के सम्मान का प्रतीक होगा. इससे सिवान इलाके के साथ सीमांचल क्षेत्र में भी पार्टी की स्थिति और मजबूत हो सकती है. इससे अच्छा संदेश भी जाएगा. पार्टी नेतृत्व को इस पर विचार करना चाहिए."- भाई वीरेंद्र, विधायक, राष्ट्रीय जनता दल
हेना शहाब ही क्यों?: हेना शहाब आरजेडी के संस्थापक सदस्यों में एक दिवंगत पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हैं, जिनकी मुस्लिम समाज में जबरदस्त पकड़ थी. सिवान और सारण इलाके में शहबुद्दीन का मजबूत जनाधार था. कोरोना काल में उनका निधन हो गया था. बीच में उनके परिवार की लालू फैमिली से दूरी बन गई थी लेकिन 2025 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में वापसी हुई थी. ऐसे में अगर हेना को आरजेडी राज्यसभा भेजता है तो मुस्लिम समाज में अच्छा संदेश जाएगा. साथ ही एआईएमआईएम के लिए भी सपोर्ट करना मजबूरी हो जाएगी.

लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं हेना: शहाबुद्दीन का सिवान और आसपास के इलाकों में लंबे समय तक प्रभाव रहा है. उनके निधन के बाद हेना शहाब ने राजनीतिक विरासत को संभालने की कोशिश की और चुनावी मैदान में भी सक्रिय भूमिका निभाई. 2009, 2014 और 2019 में वह आरजेडी और 2024 में निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन कामयाबी नहीं मिली. उनके बेटे ओसामा शहाब फिलहाल सिवान के रघुनाथपुर से आरजेडी के विधायक हैं.

क्या है राज्यसभा का समीकरण?: असल में 5 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर जीत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है. 202 विधायकों के कारण एनडीए के की 4 सीटों पर जीत तय है. वहीं महागठबंधन के पास 35 विधायक है. ऐसे में पांचवीं सीट पर जीत के लिए 6 और विधायकों का समर्थन चाहिए. अगर एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी के विधायक समर्थन कर देते हैं तो विपक्ष के हिस्से में पांचवीं सीट आ सकती है.
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