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कॉलेजों में आरक्षण नीति का सख्ती से हो पालन, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में सीट निर्धारण पर निर्देश जारी

बिहार के कॉलेजों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में सीट निर्धारण को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किया है. पढ़ें पूरी खबर..

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बिहार उच्च शिक्षा विभाग का निर्देश (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : March 1, 2026 at 3:46 PM IST

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पटना: बिहार के एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त अंगीभूत कॉलेजों में ही बीबीए, बीसीए और बीएमएस जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे. उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों को दिशा निर्देश जारी किए हैं. शैक्षणिक सत्र 2026-27 से व्यावसायिक कोर्सों में नामांकन से पहले सीट निर्धारण की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके.

उच्च शिक्षा विभाग का निर्देश जारी: उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक एनके अग्रवाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे अपने संस्थानों में संचालित किए जाने वाले व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए प्रस्तावित सीटों की संख्या का अनुमोदन सक्षम प्राधिकार से कराकर विभाग को भेजें. विभाग इन प्रस्तावों की समीक्षा कर यह तय करेगा कि किस कॉलेज या विश्वविद्यालय में कितनी सीटों पर नामांकन की अनुमति दी जाए. इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संस्थानों की क्षमता से अधिक छात्रों का प्रवेश न हो और शिक्षण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े.

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कॉलेजों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में सीट निर्धारण को लेकर निर्देश (ETV Bharat)

आधारभूत सुविधाएं मौजूद होना जरूरी: निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन महाविद्यालयों में व्यावसायिक कोर्स चलाए जा रहे हैं, वहां आवश्यक आधारभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से मौजूद होनी चाहिए. इनमें प्रयोगशाला की व्यवस्था, कंप्यूटर सुविधा, पुस्तकालय, पर्याप्त कक्षा कक्ष और प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता शामिल है.

"यदि किसी संस्थान में इन आवश्यक संसाधनों की कमी पाई जाती है, तो उसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. कॉलेजों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे छात्रों को व्यवहारिक और सैद्धांतिक दोनों तरह की शिक्षा देने में सक्षम हैं."- एनके अग्रवाल, निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग

नामांकन में आरक्षण नीति का सख्ती से हो पालन: नामांकन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण नीति का भी सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा. विभिन्न वर्गों के लिए निर्धारित आरक्षण के अनुसार सीटों का आवंटन किया जाएगा, उसी आधार पर मेधा सूची तैयार की जाएगी. विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सीटों की संख्या, उपलब्ध सुविधाओं और नामांकन से जुड़ी सभी जानकारियां अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें, ताकि छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया में किसी तरह की असुविधा न हो और पारदर्शिता बनी रहे.

व्यावसायिक शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार होगा: उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक एनके अग्रवाल का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया राज्य के ऑर्डिनेंस और नियमावली के अनुरूप ही लागू की जाएगी. विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में बेहतर प्रशिक्षण मिल सकेगा.

इसके साथ ही कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संसाधनों का संतुलित उपयोग भी संभव हो पाएगा. नए दिशा निर्देश जारी होने के बाद विश्वविद्यालयों को अपनी तैयारियां तेज करनी होंगी और समय पर सीट निर्धारण से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी.

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