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बिहार में नदियों का रौद्र रूप: भागलपुर में 100 साल पुराना दुर्गा मंदिर गंगा में समाया, चंपारण में खुद अपना घर तोड़ रहे लोग

गंगा-गंडक के भीषण कटाव से बिहार में मंदिर और घर नदी में विलीन हो गए, जिससे भारी तबाही मची है. रिपोर्ट-अमरजीत कुमार, जितेंद्र गुप्ता

WEST CHAMPARAN GANDAK EROSION
भागलपुर और पश्चिम चंपारण में कटाव का तांडव (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : September 1, 2026 at 8:41 PM IST

8 Min Read
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भागलपुर/पश्चिम चंपारण: बिहार के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और कटाव ने तबाही मचा रखी है. भागलपुर में बिहार सरकार के मंत्री बुलों मंडल समेत 40हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है. वहीं पश्चिम चंपारण में भी गंडक नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है.

तैयारी पर सवाल: ये हालात तब है जब जल संसाधन विभाग ने पहले से तैयारी कर रखी थी. बिहार सरकार के मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र जल संसाधन विभाग के कर्मियों की तारीफ करते नहीं थकते, लेकिन लोग उनकी इस तैयारी पर अब सवाल कर रहे हैं.

बड़े पैमाने पर लोग प्रभावित: भागलपुर में हर साल बाढ़ से बड़े पैमाने पर लोग प्रभावित होते हैं. राघोपुर जमींदारी तटबंध पर गंगा का कटाव मंगलवार सुबह और भयावह हो गया. तेज धारा के कारण करीब सौ वर्ष पुराना चैती दुर्गा मंदिर का बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया.

इलाके में दहशत का माहौल: मंदिर के कटाव की चपेट में आने के बाद आसपास के इलाके में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों में प्रशासन और जल संसाधन विभाग के प्रति आक्रोश भी देखा जा रहा है. 100 साल पुराना मंदिर देखते ही देखते नदी की धारा में विलीन हो गया.

भागलपुर में गंगा में समाया चैती दुर्गा मंदिर (ETV Bharat)

विभाग के प्रयास नहीं टिके: ग्रामीणों अखिलेश मंडल, सुषमा देवी, राजीव मंडल, कोको मंडल और मंटू मंडल ने बताया कि गंगा का कटाव पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रहा था. मंदिर को बचाने के लिए जल संसाधन विभाग की ओर से कई स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन गंगा की तेज और आक्रामक धारा के सामने विभाग के प्रयास टिक नहीं सके.

"गंगा का कटाव पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रहा था. मंदिर को बचाने के लिए जल संसाधन विभाग की ओर से कई स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन गंगा की तेज और आक्रामक धारा के सामने विभाग के प्रयास टिक नहीं सके."- अखिलेश मंडल, ग्रामीण

सौ साल पुराना मंदिर: मंगलवार सुबह कटाव ने मंदिर के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया और वह नदी में समा गया. ग्रामीणों ने बताया कि चैती दुर्गा मंदिर केवल पूजा-पाठ का स्थल नहीं था, बल्कि आसपास के गांवों की वर्षों पुरानी आस्था और पहचान से जुड़ा हुआ था. करीब सौ साल पुराने इस मंदिर से स्थानीय लोगों की भावनाएं जुड़ी थीं.

ग्रामीणों में मायूसी: मंदिर के गंगा में समा जाने से ग्रामीणों में मायूसी है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटावरोधी काम को और प्रभावी तरीके से किया जाता तो मंदिर को बचाया जा सकता था. मंदिर के गंगा में समाने के बाद ग्रामीणों की चिंता अब रेलवे लाइन, घाट और आसपास बसे घरों की सुरक्षा को लेकर बढ़ गई है.

रेलवे लाइन पर खतरा: ग्रामीणों का कहना है कि कटाव यदि इसी रफ्तार से जारी रहा तो इसकी चपेट में रेलवे लाइन समेत आबादी के आने का खतरा है. तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों में भी भय का माहौल है. ग्रामीणों के अनुसार कटाव का रुख लगातार आबादी की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.

फ्लड फाइटिंग कार्य शुरू कराने की मांग: ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग कार्य शुरू कराने की मांग की है. उनका कहना है कि महज खानापूर्ति से कटाव को रोकना संभव नहीं है. विशेषज्ञ अभियंताओं की निगरानी में मौके की स्थिति का आकलन कर वैज्ञानिक तरीके से कटावरोधी कार्य कराया जाना चाहिए. मामले पर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आदित्य त्यागी ने बताया काम लगातार युद्ध स्तर से जारी है.

"फ्लड फाइटिंग और कटाव रोधी काम लगातार युद्ध-स्तर पर जारी है. प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम में लगा है."- आदित्य त्यागी, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर

कई घरों में घुसा पानी: ग्रामीणों ने प्रशासन से रेलवे लाइन और आसपास के घरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने, कटाव प्रभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने और आवश्यकतानुसार बचाव सामग्री उपलब्ध कराने की भी मांग की है. मंदिर के बाद यदि अब रेलवे लाइन या आबादी कटाव की चपेट में आती है तो नुकसान काफी बड़ा हो सकता है. गौरतलब है कि इससे पहले बांध टूटने से कई घरों में पानी प्रवेश कर चुका हैं.

पश्चिम चंपारण में गंडक नदी का रौद्र रूप: वहीं दूसरी ओर पश्चिम चंपारण के योगापट्टी प्रखंड के सिसवा मंगलपुर पंचायत में गंडक नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. जलस्तर घटने के साथ ही दियारा इलाके में कटाव का कहर तेज हो गया है. नदी तेजी से गांव की ओर बढ़ रही है और लगातार हो रहे भीषण कटाव से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है.

गंडक नदी में समाया घर: इसी बीच सिसवा गांव निवासी विनोद पटेल का आशियाना गंडक नदी में विलीन होने का वीडियो सामने आया है. बताया जा रहा है कि यह वीडियो मंगलवार की देर शाम करीब छह बजे का है. वीडियो में गंडक नदी के तेज कटाव के बीच देखते ही देखते घर का हिस्सा नदी में समाता नजर आ रहा है. इस घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों में डर और चिंता और बढ़ गई है.

पश्चिम चंपारण में गंडक नदी में समाए घर (ETV Bharat)

कई घरों पर कटाव का खतरा: ग्रामीणों के मुताबिक, गंडक नदी लगातार अपना किनारा काटते हुए गांव की ओर बढ़ रही है. कटाव की रफ्तार ऐसी है कि कई घरों पर अब सीधे खतरा मंडराने लगा है. ग्रामीणों को डर है कि अगर कटाव इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में कई और आशियाने नदी में समा सकते हैं.

अपने हाथों से घर तोड़ने की मजबूरी: सबसे दर्दनाक तस्वीर यह है कि जिन घरों को ग्रामीणों ने वर्षों की मेहनत और अपनी जमा पूंजी से बनाया,अब उन्हीं घरों को खुद अपने हाथों से तोड़ने को मजबूर हैं. ग्रामीण घर का सामान सुरक्षित निकाल रहे हैं और मकान को तोड़कर ईंट, दरवाजे और दूसरी सामग्री को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं. उनका कहना है कि घर को अपनी आंखों के सामने टूटते देखना बेहद पीड़ादायक है, लेकिन गंडक नदी के कटाव के सामने उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है.

"जिन घरों को वर्षों की मेहनत और अपनी जमा पूंजी से बनाया,अब उन्हीं घरों को खुद अपने हाथों से तोड़ने को मजबूर हैं. घर का सामान सुरक्षित निकाल रहे हैं और मकान को तोड़कर ईंट, दरवाजे और दूसरी सामग्री को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं. कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है"- विनोद पटेल,कटाव पीड़ित

जल संसाधन विभाग पर आरोप: स्थानीय ग्रामीण विकास कुमार, सरदार पांडे, पप्पू पांडे और अमीरका गद्दी समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि नदी लगातार गांव की तरफ बढ़ रही है और बड़े पैमाने पर कटाव हो रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद जल संसाधन विभाग की ओर से अब तक स्थिति का समुचित जायजा नहीं लिया गया है और कटाव रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं.

कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग: ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग से तत्काल मौके पर टीम भेजकर कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है. साथ ही प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और जरूरी राहत उपलब्ध कराने की अपील की है.ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कटाव पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सिसवा मंगलपुर में स्थिति और भयावह हो सकती है और कई परिवारों के आशियाने गंडक नदी की धारा में समा सकते हैं.

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