ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में बाढ़ से भीषण तबाही, भोजपुर से लेकर मुंगेर तक कराह रहे लोग
भोजपुर और मुंगेर में गंगा के बढ़ते जलस्तर व सहरसा में कोसी के कटाव ने बढ़ाई जनता की परेशानी. रिपोर्ट:- आलोक भारती-प्रिंस दिलखुश-राहुल कुमार

Published : August 25, 2026 at 8:18 PM IST
|Updated : August 25, 2026 at 9:18 PM IST
भोजपुर/सहरसा/मुंगेर: बिहार में बाढ़ की त्रासदी अब कोई नई बात नहीं रह गई है. साल दर साल प्रदेश के विभिन्न हिस्से जल प्रलय की तबाही झेलते हैं. इन दिनों भोजपुर और मुंगेर में गंगा के बढ़ते जलस्तर तो वही सहरसा में कोसी के कटाव ने आम जनता की परेशानी बढ़ा रखी है.
गंगा की त्रासदी: सबसे पहले बात करेंगे भोजपुर के बड़हरा प्रखंड की जो इन दिनों गंगा की त्रासदी झेल रहा है. यहां गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है, जिसके कारण प्रखंड के दर्जनों गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. खेत-बधार जलमग्न हैं, ग्रामीण सड़कों पर पानी चढ़ गया है और किसानों के सामने फसल के साथ पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा हो गया है.

जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेमी. ऊपर: बड़हरा के लोगों के लिए गंगा की बाढ़ कोई नई त्रासदी नहीं है. हर साल जलस्तर बढ़ने के साथ दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को आवागमन, खेती, पशुचारा और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जल संसाधन विभाग के आशीष कुमार रंजन के अनुसार गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है.
फसल नुकसान की चिंता: गंगा के बढ़ते जलस्तर से इलाके के मोहन करजा, बड़का लौहर, नेकनाम टोला, बखोरापुर, दुबे छपरा, हाजीपुर, शिवपुर, गुंडी और छोटका ईटहना समेत कई गांवों के बधार में पानी फैल गया है. खेतों में लगी लौकी, नेनुआ, छिंगुनी, परवल, मकई और अन्य फसलें पानी की चपेट में हैं. इससे किसानों को फसल नुकसान की चिंता सता रही है.
ग्रामीण पथों पर आवागमन बाधित: वही प्रखंड के कई ग्रामीण पथों पर बाढ़ का पानी चढ़ने से आवागमन बाधित हुआ है. बाढ़ का पानी लौहर-दुबे छपरा, लौहर-बखोरापुर और नेकनाम टोला, केशोपुर-सरैंया पथ समेत कई ग्रामीण मार्गो पर भी पानी पहुंच गया है. बधार और खेतों में पानी फैलने से पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट भी बना हुआ है.

आवश्यक राहत व्यवस्था की मांग: ग्रामीणों का कहना है कि यदि गंगा का जलस्तर अब स्थिर होकर घटने लगता है तो बड़ी राहत मिलेगी. हालांकि खेतों में जमा पानी निकलहर साल विस्थापन, हर साल बर्बादी... कब तक?ने में अभी समय लग सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बनाए रखने और आवश्यक राहत व्यवस्था जारी रखने की मांग की है.
हर साल बाढ़ की त्रासदी: ग्रामीण राजेन्द्र पांडे ने कहा कि हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलते हैं, इस बार स्थिति और ज्यादा खराब है. पुल का निर्माण बीच में अधूरा छोड़ दिए जाने से करीब एक लाख लोग प्रभावित हैं. उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान नाव की कोई व्यवस्था नहीं है, राहत के नाम पर भी कुछ नहीं मिला. करीब 30 से 35 गांव बाढ़ से प्रभावित है. अधिकारी आए, फोटो खींचकर चले गए, लेकिन राहत और बचाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हुई.
"हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलते हैं, इस बार स्थिति और ज्यादा खराब है. पुल का निर्माण बीच में अधूरा छोड़ दिए जाने से करीब एक लाख लोग प्रभावित हैं. नाव की कोई व्यवस्था नहीं है, राहत के नाम पर भी कुछ नहीं मिला. अधिकारी आए, फोटो खींचकर चले गए." -राजेन्द्र पांडे, ग्रामीण

ग्रामीणों में डर और नाराजगी: बड़हरा के बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों में डर और नाराजगी दोनों हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि चार दिनों से बाढ़ की स्थिति रहने के बावजूद राहत के लिए नाव, जरूरी सामान और अन्य व्यवस्थाएं नहीं है. बुजुर्ग रमेश सिंह ने हर साल बाढ़ आने और समस्या के स्थायी समाधान के अभाव पर भी सवाल उठाया.
मेडिकल टीम तैनात: हालांकि बाढ़ की स्थिति के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम रविवार से ही पूरी तरह तत्पर है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गंभीर मरीज, गर्भवती महिलाएं और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को चिन्हित किया जा रहा है. बड़हरा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अरविंद कुमार का कहना है कि हमारी कोशिश है कि जरूरतमंद मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या ब्लॉक स्तर के अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया जाए. फिलहाल चार मेडिकल टीमें लगातार काम कर रही हैं और जरूरत के अनुसार एक-दो और टीम बढ़ाने की तैयारी है.

"हमारी कोशिश है कि जरूरतमंद मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या ब्लॉक स्तर के अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया जाए. फिलहाल चार मेडिकल टीमें लगातार काम कर रही हैं और जरूरत के अनुसार एक-दो और टीम बढ़ाने की तैयारी है."- डॉ. अरविंद कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बड़हरा
जल संसाधन विभाग का बयान: वहीं जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता आशीष कुमार रंजन ने बताया कि सोमवार शाम छह बजे की रिपोर्ट के अनुसार बड़हरा में गंगा का जलस्तर 53.51 मीटर दर्ज किया गया है. गंगा खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
"अबतक की जानकारी के अनुसार बड़हरा में गंगा का जलस्तर 53.51 मीटर दर्ज किया गया है. गंगा खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. हमारी टीम जलस्तर पर लगातार निगरानी बनाए रखे हुए है."- आशीष कुमार रंजन, कनीय अभियंता, जल संसाधन विभाग

कोसी का घटता जलस्तर परेशानी का सबब: ये तो रही भोजपुर की बात लेकिन सहरसा भी इन दिनों कुछ ऐसी ही परेशानी से दो-चार हो रहा है. जिले में कोसी नदी का जलस्तर भले ही उतार-चढ़ाव के बीच शांत नजर आ रहा हो, लेकिन नदी का घटता जलस्तर भी लोगों के लिए खतरा बन गया है.
सहरसा में कटाव जारी: ग्रामीणों के मुताबिक नदी जब उफनती है तो बाढ़ से तबाही मचाती है और जब पानी घटता है तो तेज कटाव के जरिए घर और जमीन को अपनी आगोश में लेने लगती है. यहां नवहट्टा प्रखंड के डरहार पंचायत स्थित महादलित टोला में इन दिनों ऐसा ही भयावह मंजर देखने को मिल रहा है.
नदी में समाए कई घर: यहां कोसी नदी का कटाव तेजी से हो रहा है.कई घर नदी में समा चुके हैं, जबकि दर्जनों परिवारों के आशियाने कटाव के मुहाने पर खड़े हैं. घर और जमीन गंवा चुके लोग अब अपना सामान लेकर दूसरों के दरवाजे पर रहने को मजबूर हैं. पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके पास अब इतनी जमीन भी नहीं बची है, जहां दोबारा घर बनाकर रह सकें.

कोई ठोस कार्रवाई नहीं: मुखिया राम कुमार का आरोप है कि सरकार की ओर से विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए अब तक जमीन का पर्चा उपलब्ध नहीं कराया गया है. कटाव रोकने और प्रभावित परिवारों को राहत एवं स्थायी पुनर्वास दिलाने के लिए प्रखंड कार्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
समस्या का स्थायी समाधान नहीं: ग्रामीण शोभा लाल का कहना है कि जनप्रतिनिधियों से भी कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका. कटाव के कारण परिवारों के सामने रहने के साथ-साथ भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट भी खड़ा हो गया है. ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से तत्काल कटावरोधी कार्य शुरू कराने, प्रभावित परिवारों को राहत देने और स्थायी रूप से बसाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है.
गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि: चलिए अब चलते हैं मुंगेर, जहां गंगा नदी के जलस्तर में लगातार तेजी से हो रही वृद्धि ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है. केंद्रीय जल आयोग से मिली जानकारी के अनुसार मुंगेर में गंगा का जलस्तर 39.00 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि यहां खतरे का निशान 39.33 मीटर है.
खतरे के निशान से महज 33 सेंटीमीटर नीचे: यानी केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मुंगेर में गंगा का पानी खतरे के निशान से महज 33 सेंटीमीटर नीचे बह रहा है. पिछले 18 घंटे में जलस्तर में करीब 12 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है और पानी लगभग 2 सेंटीमीटर प्रति दिन की रफ्तार से बढ़ रहा है.
निचले इलाकों में तेजी से फैल रहा पानी: जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण गंगा के दियारा और निचले इलाकों में पानी तेजी से फैलने लगा है. कई जगह खेत जलमग्न हो चुके हैं, जबकि नदी-नालों के रास्ते बाढ़ का पानी दूसरे इलाकों में भी पहुंचने लगा है. इससे ग्रामीणों में बाढ़ की आशंका को लेकर भय का माहौल है.
गांव में घुसा पानी, 40 घर जलमग्न: ताज़ा मामला हवेली खड़गपुर प्रखंड क्षेत्र के तेलियाडीह पंचायत अंतर्गत कृष्णानगर गांव का है, जहां गंगा का पानी पूरे गांव में प्रवेश कर गया है. ग्रामीणों के अनुसार गांव के करीब 40 घर पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जबकि अधिकांश अन्य घर भी बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं.
सड़क किनारे पहुंचे लोग: स्थानीय निवासी सविता देवी ने बताया कि गांव में करीब 500 से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या दैनिक मजदूरों और पशुपालकों की है. घरों में पानी घुसने के बाद कई परिवार अपने बच्चों और परिजनों के साथ-साथ मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थान की तलाश में सड़क किनारे पहुंच गए हैं.

"बाढ़ के कारण कुछ लोग सड़क किनारे अस्थायी झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ परिवार मुख्य सड़क और हाइवे के आसपास शरण ले रहे हैं."- सविता देवी, स्थानीय महिला
घरों की छत पर रहने को मजबूर: वहीं ग्रामीण मानरूप यादव, अरविंद मंडल, छात्र शैलेश कुमार, सरिता देवी, रूपेश कुमार, नरेश यादव ने बताया कि जिन ग्रामीणों के पक्के मकान हैं, उनमें से कई लोग अपने घरों की छत पर रहने को मजबूर हैं. वहीं, जिनके घरों में पानी अधिक भर गया है, उन्हें पानी में घुसकर ही जरूरी सामान निकालने और घर तक पहुंचने की मजबूरी बनी हुई है. स्कूल भी छूट गया है.
चिकित्सा सुविधा को लेकर चिंता: गर्भवती महिला मुन्नी कुमारी ने बताया कि बाढ़ का पानी घर में घुस गया है, जिससे काफी परेशानी हो रही है. मैं गर्भवती हूं और ऐसे हालात में सबसे ज्यादा चिंता चिकित्सा सुविधा को लेकर सता रही है. अगर अचानक तबीयत बिगड़ती है या प्रसव पीड़ा शुरू होती है तो अस्पताल तक कैसे पहुंचेंगे, यह समझ में नहीं आ रहा है.
आने-जाने का कोई साधन नहीं: उन्होंने बताया कि घर के चारों तरफ पानी भरा हुआ है और आने-जाने का कोई साधन नहीं है. नाव की भी व्यवस्था नहीं की गई है, खाने-पीने और साफ पानी की भी परेशानी हो रही है. हम डर के माहौल में रह रहे हैं. प्रशासन से मांग है कि जल्द से जल्द नाव, डॉक्टर और जरूरी दवाइयों की व्यवस्था की जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को किसी तरह की परेशानी न हो.
"मैं गर्भवती हूं और ऐसे हालात में सबसे ज्यादा चिंता चिकित्सा सुविधा को लेकर सता रही है. अगर अचानक तबीयत बिगड़ती है या प्रसव पीड़ा शुरू होती है तो अस्पताल तक कैसे पहुंचेंगे, यह समझ में नहीं आ रहा है."- मुन्नी कुमारी, गर्भवती महिला

जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त: बाढ़ पीड़ित महिला चंदा कुमारी ने कहा कि बाढ़ का पानी घर में घुस जाने से हम लोगों की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है. घर के अंदर पानी भरा हुआ है और परिवार के साथ सुरक्षित जगह पर रहने की मजबूरी है. खाने-पीने का सामान और साफ पानी जुटाना भी मुश्किल हो गया है.
स्थिति हो सकती है और गंभीर: उन्होंने कहा कि प्रशासन से हमारी मांग है कि जल्द से जल्द नाव की व्यवस्था कराई जाए, भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराया जाए तथा जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए रेस्क्यू कराया जाए. अगर गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
"छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता बनी हुई है. घर से बाहर निकलने के लिए भी पानी के बीच से होकर जाना पड़ रहा है. अभी तक नाव और राहत सामग्री की समुचित व्यवस्था नहीं हुई है."- चंदा कुमारी, बाढ़ पीड़िता
नाव, भोजन-पानी और स्वास्थ्य सुविधा की मांग: बाढ़ पीड़ित अरविंद कुमार मंडल ने कहा कि गंगा का पानी तेजी से बढ़ने के कारण हमारे गांव में बाढ़ की स्थिति बन गई है. घरों में पानी घुस चुका है और परिवार के साथ रहना मुश्किल हो गया है. हम लोग अपने बच्चों और मवेशियों को लेकर सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं. घर में रखा अनाज, जरूरी सामान और पशुओं का चारा भी पानी में डूब गया है.
"हर साल बाढ़ में हम लोगों को इसी तरह परेशान होना पड़ता है, हम लोग अपने बच्चों और मवेशियों को लेकर सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं. घर में रखा अनाज, जरूरी सामान और पशुओं का चारा भी पानी में डूब गया है. लेकिन स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है."- अरविंद कुमार मंडल, बाढ़ पीड़ित

सरकारी स्तर पर पर्याप्त राहत व्यवस्था नहीं: ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ का पानी गांव में घुसने के बावजूद अब तक सरकारी स्तर पर पर्याप्त राहत व्यवस्था नहीं पहुंची है. ग्रामीणों आनंदी प्रसाद यादव, रौशन कुमार और चंदा देवी ने बताया कि गांव में नाव की व्यवस्था तक नहीं की गई है. पानी से घिरे घरों तक जाने के लिए लोगों को कई जगह तैरकर जाना पड़ रहा है.
सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूबी: गंगा के जलस्तर में वृद्धि का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है. कृष्णानगर गांव से सटे बहियार में सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूब गई है. गंगा पार दियारा क्षेत्र के सीताचरण,टीकारामपुर और कुतलुपुर बहियार के निचले इलाकों में भी पानी तेजी से फैल रहा है.
तीन पंचायतों के कई टोले पानी से घिरे: गंगा के बढ़ते दबाव के कारण दियारा क्षेत्र की करीब तीन पंचायतों के एक दर्जन से अधिक टोले और गांव पानी से घिरने लगे हैं. निचले इलाकों में पानी फैलने के साथ ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है. पशुपालकों ने अपने मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए बरियारपुर-खड़गपुर मुख्य सड़क की ओर लाना शुरू कर दिया है. सड़क किनारे मवेशियों के साथ डेरा जमाने से लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं.
जिला प्रशासन की तैयारिया तेज: इधर गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि और कई क्षेत्रों में संभावित कटाव को देखते हुए मुंगेर जिला प्रशासन ने बाढ़ की आशंका को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. संभावित बाढ़ एवं कटाव की स्थिति से निपटने के लिए जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने सोमवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में बाढ़ नियंत्रण, स्वास्थ्य पशुपालन,आपदा प्रबंधन तथा प्रखंड एवं अंचल स्तर के अधिकारियों को पूरी तरह अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया गया.
अधिकारियों को मुख्यालय नहीं छोड़ने का निर्देश: जिलाधिकारी ने संभावित बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे 24 घंटे अलर्ट मोड में रहें और बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ें. अधिकारियों को अपने मोबाइल फोन 24x7 चालू रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए उपलब्ध रहने को कहा गया है.
कटाव की लगातार निगरानी करने का निर्देश: डीएम ने गंगा के जलस्तर और नदी किनारे होने वाले कटाव की लगातार निगरानी करने का निर्देश देते हुए कहा कि स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव होने पर संबंधित अधिकारी तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें.अंचलाधिकारियों को विशेष रूप से अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमणशील रहकर बाढ़ की स्थिति की निगरानी करने को कहा गया है.
आपात स्थिति में इन नंबरों पर करें संपर्क: जिला प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि बाढ़ या किसी अन्य आपात स्थिति में घबराने के बजाय प्रशासन को तत्काल सूचना दें. किसी भी आपात स्थिति में जिला आपातकालीन संचालन केंद्र, मुंगेर से संपर्क किया जा सकता है.
दूरभाष नंबर:
06344-299961
06344-299963
06344-299964
06344-299965
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