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मनरेगा का नाम बदलने से गुस्से में कांग्रेस, बिहार में चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है. पार्टी ने इसको लेकर बिहार में चरणबद्ध आंदोलन का फैसला किया है. पढ़ें..

Bihar Congres
बिहार में कांग्रेस का प्रदर्शन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 8, 2026 at 4:22 PM IST

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पटना: केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 में मनरेगा (MNREGA) की जगह एक नया कानून पारित किया है, जिसे 'विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G (वीबी-जी राम जी) नाम दिया गया है. नया कानून साल 2026 से प्रभावी हो रहा है. इसमें पिछले कानून के मुकाबले कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. वहीं नाम बदलने पर बिहार में सियासत शुरू हो गई है.

महात्मा गांधी से बीजेपी को ऐतराज: पार्टी के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने कहा है कि हमें केंद्र सरकार की मंशा पर संदेह है. पहले तो उन्होंने महात्मा गांधी का नाम हटाकर यह स्पष्ट कर दिया कि उन्हें महात्मा गांधी के नाम से प्रेम नहीं है. मनरेगा से बिहार जैसे राज्य को फायदा हो रहा था और मजदूरों को रोजगार मिल रहे थे लेकिन अब केंद्र की सरकार ने राज्यों पर बोझ डाल दिया है. अब बिहार सरकार को भी 40% राज्यांश देना होगा, जबकि मनरेगा में यह व्यवस्था नहीं थी. इससे बिहार जैसे राज्य को नुकसान होने जा रहा है.

मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन (ETV Bharat)

क्या बोले राजेश राम?: कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने एक तीर से तीन निशाना साधने की कोशिश की है. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि पहले तो भाजपा के लोगों ने बापू के नाम और सत्य अहिंसा के सिद्धांत को मिटाने की कोशिश की है. दूसरा यह कि योजना का नाम बदलकर मिशन रखा गया है. दोनों में अंतर यह है कि योजना बंद नहीं की जा सकती है और मिशन को कभी भी बंद किया जा सकता है.

राजेश राम ने कहा कि तीसरा तथ्य यह है कि 120 दिन रोजगार देने की बात कही गई है लेकिन राज्यों को अधिकार से वंचित किया जा रहा है और योजना को लेकर सारे अधिकार केंद्र अपने पास रख रही है. साथ ही स्विच करने का अधिकार भी केंद्र के पास रखा गया है. कांग्रेस पार्टी किसी भी सूरत में या व्यवस्था लागू होने देने के पक्ष में नहीं है.

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बिहार कांग्रेस की प्रेस कॉनफ्रेंस (ETV Bharat)

चरणबद्ध आंदोलन चलाएगी कांग्रेस: राजेश राम ने कहा कि हम 10 जनवरी से लेकर 25 फरवरी तक बिहारव्यापी आंदोलन चलाने की तैयारी कर चुके हैं. आगामी 10 जनवरी को जिला स्तर पर संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा. उसके बाद 11 जनवरी को उपवास का कार्यक्रम रखा जाएगा 12 जनवरी को पंचायत स्तर पर जनसभा का आयोजन किया जाएगा. 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर शांति मार्च और धरणा का आयोजन किया जाएगा.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तर पर आंदोलन चलाए जाएंगे. 5 फरवरी से लेकर 15 फरवरी तक विधानसभा स्तर पर प्रदर्शन होगा और 16 फरवरी से लेकर 25 फरवरी तक क्षेत्रीय स्तर पर रैली का आयोजन होगा.

"महात्मा गांधी के नाम से आपत्ति थी. इस वजह से बीजेपी की सरकार ने नाम में बदलाव किया है. कांग्रेस पार्टी इसके खिलाफ लोगों के बीच जाएगी और अगले एक महीने तक आंदोलन चलाएगी. पार्टी नेताओं के साथ बैठक बैठक में जमीनी स्तर तक मजदूरों के हक की लड़ाई को तेज करने पर चर्चा हुई."- राजेश राम, अध्यक्ष, बिहार कांग्रेस

अब 125 दिनों की मिलेगी गारंटी: योजना के स्वरूप में कुछ बदलाव भी किए गए हैं. ​कार्य दिवसों में वृद्धि की बात सामने आ रही है. नए कानून के तहत अब ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है, जो पहले 100 दिन थी. पहले केंद्र सरकार मजदूरी का 100% खर्च उठाती थी लेकिन अब केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 60:40 कर दिया गया है. यानी अब राज्यों को भी 40% हिस्सा देना होगा. अब केवल 'गड्ढे खोदने' जैसे कामों के बजाय स्थायी बुनियादी ढांचे (जैसे- जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कें और आपदा प्रबंधन) के निर्माण पर जोर दिया जाएगा.

तकनीक का भी होगा इस्तेमाल: जी राम जी के तहत इश योजना में पारदर्शिता के लिए इसमें AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जियो-टैगिंग और फेस रिकग्निशन (चेहरा पहचान) जैसी आधुनिक तकनीकों का अनिवार्य उपयोग शामिल है. फसल की बुवाई या कटाई के सीजन के दौरान इसमें 60 दिनों का 'कार्य-विराम' देने का प्रावधान है, ताकि खेती के लिए मजदूरों की कमी न हो.

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