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बिहार में 26 साल से पेड़ के नीचे चलता है स्कूल! न क्लासरूम, न ब्लैकबोर्ड और न ही बेंच-डेस्क

बिहार में एक स्कूल परिसर में दो स्कूल चलते हैं लेकिन दोनों के पास बिल्डिंग नहीं है. बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं.

Bagaha Primary School
बगहा में पेड़ के नीचे स्कूल का संचालन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 12, 2026 at 6:54 AM IST

6 Min Read
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रिपोर्ट: दिलीप कुमार

बगहा: बिहार सरकार लगातार दावे करती है कि राज्य में स्कूली शिक्षा बेहतर हुई है लेकिन पश्चिम चंपारण जिले के बगहा का स्कूल चीख-चीखकर कह रहा है कि हमारी सेहत कब दुरुस्त होगी सरकार? यहां एक ही परिसर में दो-दो स्कूल चलते हैं लेकिन दोनों में से किसी के पास बिल्डिंग नहीं है. हालत ये है कि तमाम बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ते हैं. प्रधान शिक्षक का दफ्तर भी खुले आसमान में संचालित होता है. बच्चे से लेकर शिक्षक तक परेशान हैं.

2018 से एक कैंपस में दो स्कूल: बगहा 2 प्रखंड अंतर्गत सबेया मुसई मुसहर टोला स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी. दो कमरे में 5 कक्षा संचालित होती थी. धीरे-धीरे मकान जर्जर होने लगा और नई बिल्डिंग बनी नहीं. 2018 में इसी विद्यालय के परिसर में राजकीय प्राथमिक विद्यालय सबेया मुसहर टोला को भी टैग कर दिया गया, क्योंकि उस स्कूल के पास अपनी जमीन नहीं थी. यहां कुल 135 बच्चों का एडमिशन हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए 6 शिक्षकों की ड्यूटी लगी है.

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ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

पुराना भवन जर्जर, नया बना नहीं: स्कूल में जो पहले से बने दो कमरे थे, उसकी छत टूटकर गिरने लगी. डर से बच्चे क्लास के अंदर जाना छोड़ दिया. शिक्षकों ने भी बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तय किया कि जर्जर भवन में विद्यालय का संचालन नहीं करेंगे. ऐसे में तय हुआ कि जबतक नई बिल्डिंग नहीं बन जाती, बाहर ही पढ़ाएंगे.

26 साल से पेड़ के नीचे स्कूल का संचालन (ETV Bharat)

चबूतरे पर चलती है क्लास: स्कूल परिसर में स्थानीय विधायक की ओर से एक चबूतरे का निर्माण किया गया था. लिहाजा उसी चबूतरे पर बच्चों की क्लास लगती है. शिक्षक कभी ब्लैक बोर्ड लगाकर पढ़ाते हैं तो कभी मौखिक तौर पर ही पढ़ाकर काम चला लेते हैं.

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राजकीय प्राथमिक विद्यालय, सबेया मुसई मुसहरी (ETV Bharat)

पेड़ ही सहारा: बच्चे बताते हैं कि पेड़ के नीचे पढ़ने में काफी दिक्कत होती है. बेंच-डेस्क की जगह चबूतरे पर बोरा बिछाकर बैठना पड़ना है. गर्मी के मौसम में धूप और गर्मी और सर्दी में ठंड बहुत लगती है. वहीं बरसात के मौसम में हमारी पढ़ाई पूरी तरह से बाधित हो जाती है.

Bagaha Primary School
पेड़ के नीचे पढ़ने को बच्चे मजबूर (ETV Bharat)

बारिश होने पर क्या होता है?: जब स्कूल के समय बारिश शुरू हो जाती है तो बच्चों को पास के आंगनबाड़ी केंद्र भेज दिया जाता है. वहीं जब देर तक बारिश नहीं थमती है तो स्कूल में छुट्टी हो जाती है, क्योंकि बिल्डिंग नहीं होने की वजह से बच्चों रोककर भी नहीं रखा जा सकता है. इस वजह से बरसात के मौसम में आए दिन बच्चों की पढ़ाई बाधित होती रहती है.

'हमारा स्कूल भवन बना दीजिए': पेड़ के नीचे पढ़ाई और जब-तब पढ़ाई बाधित होने से स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी परेशान हैं. इनका कहना है कि हम स्कूल पढ़ने आते हैं लेकिन स्कूल भवन नहीं होने के कारण बहुत तकलीफ होती है. ऐसे में सरकारी से हमारी गुजारिश है कि हमारे लिए स्कूल भवन का निर्माण करा दे, ताकि बिना किसी रुकावट के हम पढ़ सकें.

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चबूतरे पर पढ़ते बच्चे (ETV Bharat)

"हम ठीक से पढ़ नहीं पाते हैं. बारिश होने पर बगल के आंगनबाड़ी केंद्र में चले जाते हैं. स्कूल में छुट्टी हो जाती है. ठंडा के मौसम में बाहर पढ़ने पर बहुत ठंड लगती है. सरकार से आग्रह है कि स्कूल भवन बना दें."- शालू कुमारी, छात्रा, चौथी कक्षा

स्कूल में समस्याओं का अंबार: ऐसा नहीं है कि स्कूल में सिर्फ बिल्डिंग नहीं है. यहां अन्य तरह की भी कई समस्याएं हैं. बेंच-डेस्क के अभाव में कई बच्चों को जमीन पर बैठना पड़ता है. बच्चों का मध्याह्न बनाने के लिए भी किचन शेड तक नहीं है. वहीं अगर स्कूल के समय बच्चों को शौच जाना हो तो उनको या तो खुले में जाना पड़ता है या फिर घर जाना होता है, क्योंकि यहां शौचालय का भी अभाव है. चारों तरफ से बाउंड्री भी नहीं है.

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शिक्षक भी परेशान: स्कूल में मौजद समस्या और सुविधाओं के अभाव से शिक्षक भी दुखी हैं. वे कहते हैं कि हमलोग अपने स्तर से बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की कोशिश करते हैं लेकिन हमारी भी अपनी सीमा है. जब व्यवस्था ही अच्छी नहीं होगी तो पठन-पाठन कैसे बेहतर होगी. सरकार से यही आग्रह है कि इस दिशा में पहल करें और स्कूल में भवन का निर्माण कराया जाए.

"बरसात के दिनों में हमें कठिनाइयों का काफी सामना करना पड़ता है. इस परिस्थिति में हम मजबूर हो जाते हैं. बच्चों का भोजन तो प्रतिदिन बनता है. बीच में बारिश आ जाती है तो भोजन कराकर बच्चों को छोड़ देते हैं. बीईओ साहब का आदेश है कि भवन जर्जर है, इसमें बच्चे को नहीं पढ़ाया जाए. सरकार से गुजारिश करूंगा कि यहां विद्यालय बनवाया जाए, ताकि महादलित बस्ती होने के कारण पठन-पाठन कार्य को सुचारु रूप से चलाया जा सके."- किशोर राम, शिक्षक

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पेड़ के नीचे चलती है क्लास (ETV Bharat)

क्या बोले प्रभारी प्रधान शिक्षक?: राजकीय प्राथमिक विद्यालय (सबेया मुसई मुसहरी) के प्रभारी प्रधान शिक्षक विनोद प्रसाद पाल भी इन समस्याओं से परेशान हैं. वे कहते हैं कि बिल्डिंग नहीं होने के कारण दिक्कत तो होती ही है. हमें बच्चों को खुले मैदान में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है. कभी पेड़ के नीचे तो कभी खुले मैदान में बच्चों को पढ़ाने की हमारी मजबूरी है. हालांकि हम शिक्षक पूरी कोशिश करते हैं कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले.

क्यों नहीं बनती है नई बिल्डिंग?: इस बारे में प्रभारी प्रधान शिक्षक कहते हैं कि कई बार हमलोगों ने बिल्डिंग की मांग रखी है. आवेदन भी दिया है लेकिन कोई पहल नहीं हुई. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने ही निर्देश दिया कि जर्जर भवन में बच्चों को ना पढ़ाएं.

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बाहर ही प्रधान शिक्षक का कार्यालय (ETV Bharat)

"दोनों स्कूल को मिलकार 135 छात्र हैं. बरसार के दिन में बहुत दिक्कत होती है. हमलोगों से सरकार कहती है कि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दीजिए, आप ही बताइये कैसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देंगे? ना यहां बाउंड्री है, ना गेट है. ना किचन शेड है. जो बरामदा गिरा है, वहीं पर बच्चों का भोजन बनवाते हैं. मध्याह्ण भोजन डेली संचालित होता है."- विनोद प्रसाद पाल, प्रभारी प्रधान शिक्षक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय सबेया मुसई मुसहर

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