200 बच्चों के लिए सिर्फ एक कमरा, सड़क किनारे लगती है बिहार के इस स्कूल के बच्चों की क्लास
सिविक इशू में बात बिहार के ऐसे स्कूल की, जहां 200 बच्चों के लिए सिर्फ एक कमरा है. वहां पेड़ के नीचे पढ़ाई होती है.

Published : February 17, 2026 at 6:20 PM IST
- रिपोर्ट: राजेश सिंह
जमुई: बिहार सरकार भले ही स्कूलों की तस्वीर बदलने का दावा करती हो लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है. जमुई के धर्मपुर स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय की हालत तो इतनी खराब है कि बच्चों को पढ़ाई छोड़कर जिला शिक्षा पदाधिकारी के दफ्तर का चक्कर लगाना पड़ रहा है. न तो कमरे हैं और न ही अन्य जरूरी सुविधाएं. शिक्षक और प्राचार्य ने जब सरकारी नियमों के डर से आवाज उठाने की हिम्मत नहीं दिखाई तो बच्चों ने ही कमान संभाल ली और अभिभावकों के साथ मोर्चा खोल दिया.
जमुई में एक कमरे वाला स्कूल: जिले के सिकंदरा प्रखंड की कुमार पंचायत के धर्मपुर स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय की स्थापना साल 1981 में हुई थी. जहां पहली कक्षा से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई होती है. स्कूल में 200 से अधिक बच्चों का दाखिला है लेकिन क्लासरूम सिर्फ एक है. जिस वजह से ज्यादातर बच्चों को बरामदे, पेड़ के नीचे या सड़क के किनारे पढ़ना पड़ता है. मौसम चाहे सर्दी-गर्मी या बरसात का हो, यही स्थिति रहती है.

बिल्डिंग और सुविधाओं का अभाव: बच्चों को सालोंभर परेशानी का सामना करना पड़ता है. बरसात के समय तो मुश्किलें और ज्यादा बढ़ जाती है. छात्राएं बताती हैं कि बरसात के मौसम में शौचालय की अलग ही समस्या रहती है. कई बार शिक्षकों से शिकायत की. हर बार प्राचार्य कहती हैं कि इस बार ठीक हो जाएगा लेकिन समस्या जस की तस है.
स्कूल के लिए बच्चों का प्रदर्शन: धर्मपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय के दर्जनों बच्चे स्कूली ड्रेस में पैदल मार्च करते हुऐ सिकंदरा से लगभग 25 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय स्थित जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय और समाहरणालय स्थित जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचे गए. प्रदर्शन करते हुऐ अपने अभिभावकों के साथ जिला प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी भी की.

बच्चे डीईओ और डीएम से मिलने की जिद पर अड़े रहे. इनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर कई अलग-अलग स्लोगन लिखे थे. इनमें 'जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है', 'कागजों में स्कूल, जमीन पर कुछ नहीं. कमरा टूटा, सिस्टम भी टूटा' और 'विद्यालय की सेहत सुधरे तो बच्चों का भविष्य सुधरे' जैसे नारे लिखे थे.

"हमलोग का स्कूल बहुत दिन से नहीं बन रहा है. नेता और अधिकारी लोग आते हैं तो कहते हैं कि जमीन खोज रहे हैं. हमारे स्कूल के 6,7 और 8 क्लास के सभी लड़के-लड़कियां और अभिभावन आए हैं."- सुप्रिया कुमारी, छात्रा, उत्क्रमित मध्य विद्यालय, धर्मपुर
'बाहर धूप में बैठते हैं बच्चे': 8वीं की छात्रा सिमरन कुमारी ने बताया, 'हमलोगों का स्कूल सालों से नहीं बन रहा है. एक ही क्लास में सबलोग बैठते हैं. छोटे बच्चे लोग बाहर धूप में बैठते हैं. कोई सुविधा नहीं है. टीचर लोग हमलोगों को आने से मना किया था लेकिन कबतक हमलोग चुप रहेंगे.'

'प्राचार्य बोलीं- रुक जाओ': वहीं, 7वीं में पढ़ने वाली अंकिता कुमारी कहती है, 'एक से लेकर सातवीं तक इसी स्कूल में पढ़े हैं. अभी तक बिल्डिंग नहीं बनी है. एक ही कमरे में स्कूल चलता है. प्राचार्या उषा कुमारी ने हमलोगों का कहा कि रुको, बोले हैं कि बन जाएगा स्कूल. हमलोगों को स्कूल और बाकी सुविधा चाहिए.'

गुस्से में ग्रामीण: प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों ने बताया कि कई बार शिकायत कर चुके हैं. शिक्षक लोग भी कुछ नहीं कर रहे हैं. जिलाधिकारी, डीईओ, बीईओ और बीडीओ तक को आवेदन दे चुके हैं लेकिन कुछ नहीं हो पा रहा है. सभी बच्चे सड़क किनारे पढ़ते हैं. इसलिए हमलोगों को गांव से जिला मुख्यालय आना पड़ा है. अगर इस बार भी कुछ नहीं हुआ तो हमलोग अपनी मांग को लेकर डीएम कार्यालय के सामने धरना देने के लिए मजबूर हो जाएंगे.

विधायक-सांसद से भी नाराजगी: ग्रामीणीं की शिकायत स्थानीय विधायक से भी है. इनका कहना है कि स्थानीय विधायक प्रफुल्ल कुमार मांझी पिछले 5 साल से सिर्फ आश्वासन ही दे रहे हैं. वहीं सांसद अरुण भारती भी आए थे लेकिन स्कूल की बिल्डिंग बनाने की दिशा में कोई पहल नहीं हुई. अब हमलोगों को आश्वसन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए.
"हमलोग पूरा थक चुके हैं सर. प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग तक बोलकर. हमलोगों की एक ही मांग है कि हमारी विद्यालय बनना चाहिए. 11-12 सालों से विद्यालय भवन विहीन है. 1-8 तक पढ़ाई होती है. 6 शिक्षक और 200 बच्चे हैं. मात्र एक कमरे में बच्चों की पढ़ाई होती है."- राकेश कुमार, ग्रामीण

डीईओ के पास जवाब नहीं: वहीं इस मामले को लेकर जब ईटीवी भारत संवाददाता ने जमुई जिला शिक्षा पदाधिकारी दयाशंकर से सवाल पूछा तो वह दाएं-बाएं झांकने लगे. जवाब देने की बजाय वह इतना कहकर निकल गए कि बच्चों को ले जा रहे है, डीएम साहब से मिलवाते हैं. डीईओ ने एक भी नहीं कहा कि स्कूल भवन कब बनेगा?

डीएम से भी आश्वासन ही मिला: अपनी मांग को लेकर बच्चों की अभिभावकों की जिलाधिकारी नवीन से मुलाकात जरूर हुई लेकिन बिल्डिंग निर्माण के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई. डीएम को आवेदन देकर बच्चों के अभिभावक जब बाहर निकले तो उन्होंने कहा कि हमें एक बार फिर से आश्वासन मिला है लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि हर बार की तरह इस दफे आश्वासन हवा-हवाई नहीं, बल्कि कारगर साबित होगा.
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