गर्मी के दस्तक के साथ ही अगलगी की घटना तेज, आग पर काबू के लिए अग्निशमन विभाग कितनी मुस्तैद?
गया में फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां पुरानी हो चुकी हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि इमरजेंसी में इससे कैसे आग बुझाई जा सकेगी?

Published : February 24, 2026 at 8:14 PM IST
- रिपोर्ट: रत्नेश कुमार
गया: बिहार में गर्मी की दस्तक के साथ ही अगलगी की घटनाओं में तेजी आने लगी है. आग पर काबू पाने के लिए गया का अग्निशमन विभाग अलर्ट मोड पर है. हालांकि जिस तरह से हर साल अगलगी की घटना सामने आती है, वैसे में विभाग की तैयारियों और दावों को लेकर कई तरह के सवाल रहते हैं. अग्निशमन विभाग दावा तो करता है कि पूरी तैयारी है लेकिन कई बार आखिरी मौके पर कमियां उजागर हो जाती हैं. ऐसे में इस बार अभी से ही विभाग की ओर से मुस्तैदी देखने को मिल रही है.
हर साल अगलगी की 300 घटना: गया जिले में हर साल औसतन 300 के करीब आगलगी की घटनाएं घटित होती हैं. अग्निशमन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 2024 में 300 के करीब आगलगी की घटनाएं हुई. वहीं, 2025 में यह अंतर थोड़ा कम रहा. इसी प्रकार 2023 में भी आंकड़ा कुछ इसी के पास आसपास रहा. 2026 के शुरुआती महीने में भी आगलगी की घटनाएं घटित हो रही है.
केवल गया शहरी क्षेत्र की बात करें तो वर्ष 2023 में 109 और 2024 में 121 अगलगी की घटनाएं हुईं. 2025 में यह आंकड़ा थोड़ा कम रहा. वहीं, गया जिले की बात करें तो 2024 में 300 आगलगी की घटनाएं हुईं. 2024 में गया शहरी क्षेत्र में 121 घटनाएं हुई. वहीं 2023 में यह आंकड़ा 109 का रहा.

सबसे बड़ा चौंकाने वाला पहलू ये है कि मार्च, अप्रैल, मई और जून के महीने में अगलगी की ज्यादा घटनाएं होती हैं. गया शहर में 2024 के आंकड़ों पर गौर करें तो मार्च में 5, अप्रैल में 7, मई में 45 और जून में 17 अगलगी की घटनाएं घटित हुईं. गया शहरी क्षेत्र में 2023 के अप्रैल महीने में 42 अगलगी की घटनाएं हुईं. गया जिले की भौगोलिक स्थिति थोड़ी अलग है. इसी को नजर में रखते हुए अग्निशमन विभाग को अलग-अलग जोन में बांटा गया है. अनुमंडल स्तर और प्रखंड स्तर पर भी अग्निशमन विभाग की व्यवस्था हुई.

गया शहर में संकीर्ण सड़कों में चुनौती: गया शहर क्षेत्र में संकीर्ण सड़कें हैं. जहां अग्निशमन विभाग के लिए पहुंच पाना चुनौतीपूर्ण होता है लेकिन फिर भी अग्निशमन विभाग अगलगी की घटनाओं से निपटता रहा है. अब अग्निशमन विभाग के पास 22 मीटर की ऊपर की ऊंचाई तक पहुंचने वाला हाइड्रोलिक दमकल है, इसकी संख्या दो है. इसके कारण अब सहजतापूर्वक अग्निशमन विभाग शहरी क्षेत्र में आसानी से अगलगी की घटनाओं से निपट सकता है.

अग्निशमन विभाग के पास 30 छोटे-बड़े दमकल वाहन उपलब्ध हैं. इनमें 10 बड़े और 18 छोटे वाहन हैं. इसमें दो हाइड्रोलिक गाड़ियां शामिल हैं. हालांकि अगलगी की घटनाओं में बढ़ोतरी को लेकर इसे कम करने का एकमात्र उपाय जागरुकता ही नजर आती है. अग्निशमन विभाग इसके लिए भी लगातार अभियान चला रहा है.

फायर प्रॉक्सिमिटी सूट बना कवच: अग्निशमन विभाग के पास अब पर्याप्त संख्या में फायर प्रॉक्सिमिटी सूट है. 45 अग्निशमन जवान 24 घंटे फायर प्रॉक्सिमिटी सूट से लैस रहते हैं. फायर प्रॉक्सिमिटी सूट अग्निशमन विभाग की सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे सूट पहनकर काम करने वाले अग्निशमन कर्मियों की संख्या 45 है. सहायक जिला अग्निशमन पदाधिकारी का दावा है कि अग्निशमन विभाग अगलगी की घटनाओं से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

"हमारे पास 45 अग्निशमन जवान ऐसे हैं, जो फायर प्रॉक्सी सूट से लैस है और 24 घंटे तैयार हैं. इस बार हमारे पास दो हाइड्रोलिक दमकल वाहन हैं, जिसमें 22 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने का संसाधन है. हमारे पास नई छोटी बड़ी दमकल गाड़ियां 30 हैं. आग लगी की घटनाओं से निपटने के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि जागरूकता से इसमें काफी कमी लाई जा सकती है."- नवीन कुमार सिंह, सहायक जिला अग्निशमन पदाधिकारी, गया
अग्नि सुरक्षा के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
— Bihar Fire Service & Home Guard (@Biharfire112) December 15, 2025
सतर्क नागरिक अग्नि दुर्घटनाओं को होने से पहले ही रोक सकते हैं।
जन-जन तक सुरक्षा का संदेश पहुँचाती बिहार अग्निशमन सेवा!
हर आपदा में तत्पर, हर जीवन की रक्षा के लिए सदैव तैयार।#BiharFireService #FireSafetyAwareness #FirePrevention pic.twitter.com/RKSw8cyA4e
क्या है फायर प्रॉक्सिमिटी सूट?: आग से बचाव में फायर प्रॉक्सिमिटी सूट काफी असरदार साबित होता है. इसे सिल्वर बंकर सूट या एस्बेस्टस सूट भी कहा जाता है, क्योंकि यह मूल रूप से एस्बेस्टस कपड़े से बना होता है. असल में यह एक ऐसा सूट होता है, जिसे अग्निशामक या ज्वालामुखी विज्ञानी को अत्यधिक उच्च तापमान से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है. पहली बार साल 1930 के दशक में इसे डिजाइन और इस्तेमाल किया गया था.
क्यों बढ़ जाती है अगलगी की घटना?: मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक तापमान में अचानक बढ़ोतरी के साथ ही दिन और रात के टेम्परेचर में कम अंतर होना और तेज हवाएं चलना अगलगी का मुख्य कारण है. ऐसे में लोगों को ये ध्यान रखना होगा कि घर में खाना बनाने के बाद आग को बुझा दें. बीड़ी-सिगरेट जैसी चीजों को हवा के रुख में सुलगाने से बचें. तीली का बुझाकर ही फेंकें.
🔥 आग लगने की स्थिति में हर सेकंड कीमती होता है।⁰जब तक अग्निशमन दल मौके पर पहुंचे, आपकी थोड़ी सी जागरूकता और सूझबूझ कई जिंदगियों और कीमती सामान को बचा सकती है।#FireSafetyAwareness #fireprevention #biharfireservice #weservetosave #fireawareness pic.twitter.com/Wdtr9gPsFI
— Bihar Fire Service & Home Guard (@Biharfire112) July 5, 2025
आग से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी: जानकार कहते हैं कि आग से बचाव के लिए जागरूकता ही बड़ा उपाय है. बिहार अग्निशमन सेवा गया की ओर से आग से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें लोगों को बताया जाता है कि खाना बनाते समय बर्तन में दो बाल्टी पानी रखें. थ्रेसर मशीन के पास दो ड्राम गर्म पानी रखें. फूस की झोपड़ी पर मिट्टी का लेप करें. जहां तक संभव हो खाना खुले में बनाएं. सुबह 9:00 से पहले और शाम में 6:00 बजे के बाद खाना बनाएं, काम खत्म होने के बाद गैस रेगुलेटर बंद रखें. खेत के अवशेष को नहीं जलाएं. हवा बहने के समय भूल कर भी आग नहीं जलाएं.
झुग्गी-झोपड़ियों में आग लगने की घटनाएँ न केवल जान-माल की हानि करती हैं, बल्कि पूरे समुदाय को संकट में डाल देती हैं।
— Bihar Fire Service & Home Guard (@Biharfire112) March 21, 2025
थोड़ी सी सतर्कता और ज़िम्मेदारी अपनाकर हम इस खतरे से खुद को और अपने आस-पास के लोगों को सुरक्षित रख सकते हैं।#SummerSeason #FireSafety pic.twitter.com/Z6qmQguBj3
जानकार कहते हैं कि जलते हुए माचिस के तीली और सिगरेट बीड़ी के टुकड़े को जहां-तहां न फेंकें, रसोई घर में मिट्टी का तेल और ज्वलनशील पदार्थ न रखें, दो झोपड़ियां को सटाकर ना बनाएं. बहुमंजली इमारत में अग्नि सुरक्षा और बचाव के मद्देनजर फ्लैट में लगे अग्निशमन यंत्र और अन्य सुरक्षा उपकरणों को नियमित रूप से जांच करें. पुराने भवनों का फायर ऑडिट कराएं और अग्निशमन विभाग के दिशा निर्देशों का पालन करें. भवनों में लगे फायर एग्जिट के मार्ग को बाधित न करें. वहीं, होली पर्व को लेकर भी अग्निशमन विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.
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