मंत्रिमंडल विस्तार होली के बाद! CM नीतीश से अमित शाह की मुलाकात में लगेगी अंतिम मुहर
होली के बाद कभी भी नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. अमित शाह के बिहार दौरे के बाद कयास तेज हो गए हैं. पढ़ें..

Published : February 26, 2026 at 5:04 PM IST
पटना: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे से नीतीश मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चा शुरू हो गईं है. फिलहाल 26 मंत्री हैं, जबकि 36 मंत्री हो सकते हैं. ऐसे में अभी 10 मंत्री पद खाली है. जेडीयू कोटे से 6 और बीजेपी कोटे 3-4 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इसके अलावे लोजपा (रामविलास) को भी एक मंत्री पद मिल सकता है. 3 महीने से मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार है. ऐसे में चर्चा है कि होली के बाद कभी कैबिनेट एक्सपेंशन हो सकता है.
जल्द होगा नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार: अभी जनता दल यूनाइटेड कोटे से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ 9 मंत्री हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी से 13 मंत्री हैं. वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री बनाए गए है. हालांकि बीजेपी कोटे से 14 मंत्री बने थे लेकिन नितिन नबीन ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया.
3 महीने बाद भी नहीं हुआ कैबिनेट एक्सपेंशन: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रचंड जीत के बाद 20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ था. 3 महीने ज्यादा का वक्त गुजर चुका है लेकिन अभी तक कैबिनेट एक्सपेंशन नहीं हुआ है. जिस वजह से कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग है. पहले खरमास के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा हो रही थी लेकिन बजट सत्र के कारण टाल दिया गया. अब राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव के साथ-साथ मंत्रिमंडल का विस्तार भी होना है.
मंत्रियों पर अधिक बोझ: कई मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग है. चुनाव से पहले एनडीए ने जो लक्ष्य तय किया है, उसे प्राप्त करने के लिए मंत्रिपरिषद का विस्तार जरूरी है क्योंकि विजय कुमार सिन्हा, बिजेंद्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी, दिलीप कुमार जायसवाल, श्रवण कुमार, मंगल पांडे, श्रेयसी सिंह, प्रमोद कुमार, संजय सिंह टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद और सुनील कुमार के पास के पास एक से अधिक विभाग है.

इनके पास दो से अधिक मंत्रालय: कुछ मंत्रियों के पास दो से भी अधिक विभाग हैं और सभी बड़े विभाग हैं. बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास ऊर्जा विभाग, योजना विकास विभाग और वित्त एवं वाणिज्य कर विभाग जैसे बड़े विभाग है. विजय कुमार चौधरी के पास जल संसाधन, भवन निर्माण विभाग संसदीय कार्य और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, दिलीप जायसवाल के पास उद्योग विभाग और पथ निर्माण विभाग, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिंह के पास राजस्व एवं भूमि सुधार नगर एवं विकास विभाग और खान एवं भूतत्व विभाग जैसे बड़े विभाग हैं.
क्या कहते हैं एनडीए के सहयोगी?: अमित शाह के दौर को एलजेपीआर के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी महत्वपूर्ण मान रहे हैं लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार पर कुछ भी बोलने से चुप्पी साध ले रहे हैं. वहीं हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन का कहना है अमित शाह की महत्वपूर्ण बैठक है लेकिन जब बिहार आ रहे हैं तो एनडीए के घटक दल के नेताओं से भी मिलेंगे. वैसे मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है.

सीएम से शाह की मुलाकात की संभावना: हालाांकि राजनीतिक विशेषज्ञ भोलानाथ का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार को बहुत दिनों तक नहीं टाला जा सकता है. अब जब गृहमंत्री अमित शाह बिहार में हैं तो मुमकिन है कि नीतीश कुमार से इस पर बातचीत करें और नाम फाइनल कर तारीख की घोषणा कर दें. राज्यसभा चुनाव के लिए भी कैंडिडेट का चयन होना है.

"केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा महत्वपूर्ण है. ऐसे तो सीमांचल में घुसपैठिये और आंतरिक सुरक्षा को लेकर बैठक करेंगे लेकिन पटना में भी उनकी बड़ी बैठक होगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भी मुलाकात होगी. ऐसे में राज्यसभा उम्मीदवार के साथ मंत्रिमंडल विस्तार पर भी सहमति बन सकती है."- भोलानाथ, राजनीतिक विशेषज्ञ
मंत्री बनने के इंतजार में कई नेता: पिछले साल जब मंत्रिमंडल का गठन हुआ तो उस समय कई पुराने मंत्रियों को मौका नहीं मिला. जिसमें जयंत कुमार, शीला मंडल, रत्नेश सदा, महेश्वर हजारी, नीतीश मिश्रा, रेणु देवी और अन्य शामिल हैं. इनमें से कई नेता मंत्री बनने के इंतजार में हैं. इसके अलावे जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के भी मंत्री बनाने की चर्चा है. जेडीयू में संगठन का चुनाव चल रहा है. मार्च महीने में ही प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव भी होना है.

सामाजिक समीकरण पर होगा ध्यान: नीतीश मंत्रिमंडल में जातीय और सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा गया है. अभी सबसे अधिक ओबीसी वर्ग से 8, सवर्ण से 7 और दलित वर्ग से 5 मंत्री बनाए गए हैं, जबकि एक मुस्लिम मंत्री भी हैं. नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद कायस्थ जाति से एक भी मंत्री नहीं है. ऐसे में जब मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तो बाकी अन्य जातियों की नुमाइंदगी देखने को मिली सकती है.

मार्च में हो सकता है 'खेला': पहले चर्चा थी कि नीतीश कुमार की नजर कांग्रेस और आरजेडी पर है, क्योंकि दोनों दलों में बड़ी टूट हो सकती है. अब 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव भी होना है. 4 सीट एनडीए को आसानी से मिल जाएगी लेकिन 5वीं सीट के लिए तीन विधायकों की जरूरत होगी. ऐसे में चर्चा ये भी है कि राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ा खेल बिहार में होगा और उससे पहले मंत्रिमंडल का विस्तार संभव है. ऐसे में अब देखना है कि अमित शाह और नीतीश कुमार की मुलाकात जब पटना में होती है तो क्या फैसला होता है?
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