ETV Bharat / state

विपक्ष भी विजय सिन्हा के एक्शन के मुरीद! बिहार विधानसभा में विधायकों ने की तारीफ

ऐसा लगता है कि विजय सिन्हा का 'ऑन स्पॉट एक्शन' विपक्ष को भी पसंद आने लगा है, क्योंकि आज कई विधायकों ने तारीफ की.

Vijay Kumar Sinha
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 13, 2026 at 8:44 PM IST

6 Min Read
Choose ETV Bharat

पटना: बिहार विधानसभा में आज राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के बजट पर चर्चा के बाद सरकार की तरफ से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जवाब दिया. सर्वसमिति से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये 2190.15 करोड रुपये का अनुदान मांग सदन से पास हो गया. चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने विजय सिन्हा के कामकाज का तारीफ भी की.

विपक्षी विधायकों ने की विजय सिन्हा की तारीफ: आईआईपी के इंद्रजीत गुप्ता ने कहा कि इस काम को अंजाम तक पहुंचाइये, किसी से डरिए मत. वहीं बीजेपी का हर मौके पर विरोध करने वाले एआइएमआइएम के अख्तरुल ईमान भी डिप्टी सीएम की तारीफ करते दिखे. विजय सिन्हा ने कहा कि ऑनलाइन दाखिल खारिज में काफी सुधार हुआ है. लंबित मामले के निष्पादन में तेजी आई है और राजस्व में भी काफी वृद्धि हुई है.

आरजेडी और सीपीएम विधायक के बयान (ETV Bharat)

बाहर निकलकर क्या बोले विधायक?: हालांकि चर्चा के दौरान जब विजय सिन्हा जवाब दे रहे थे, तभी विपक्षी सदस्यों ने सदन का बहिष्कार यह कहते हुए कर दिया कि उन्होंने जो सवाल उठाया, उसका जवाब मंत्री नहीं दे रहे हैं, वहीं बाहर निकलकर विजय सिन्हा की तारीफ के सवाल पर विधायकों ने कहा कि हमने मंत्री या किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, उनके लिए कुछ कार्यों की तारीफ की है. इसमें कुछ भी गलत नहीं है.

"यदि कोई मंत्री अच्छा काम करेंगे तो निश्चित रूप से उनकी तारीफ होनी चाहिए लेकिन जब जवाब नहीं मिलेगा और आंकड़े सही नहीं दिए जाएंगे तो बहिष्कार करेंगे. हमलोग उप-मुख्यमंत्री से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े कुछ सवाल का जवाब चाह रहे थे मगर वह उत्तर नहीं दे रहे थे."- गौतम कृष्णा, विधायक, आरजेडी

क्या बोले विजय सिन्हा?: चर्चा के दौरान अपनी बात रखते हुए विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि विभाग में खाली पदों को भी तेजी से भरा जा रहा है. डिप्टी सीएम ने चर्चा के बाद जवाब देते हुए कहा कि मक्खन पर लकीर तो सब खींचते हैं. खींचनी है तो पत्थर पर लकीर खींचो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसी सूत्र को ध्येय बनाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 24 नवंबर से दायित्व संभालने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आमजन से जुड़े प्रशासन को सरल, सुलभ, पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं.

"भूमि से जुड़ी प्रक्रियाएँ कानून की जटिलता, प्रक्रियात्मक अपेक्षाओं और समाज के भावनात्मक जुड़ाव से प्रभावित होती हैं. इसलिए वरीय पदाधिकारियों के साथ शुरुआती बैठकों में ही स्पष्ट कर दिया गया कि राजस्व प्रशासन को जनकेंद्रित और विश्वसनीय बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी. बिचौलियों और भूमाफियाओं के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू की गई है. साथ ही डिजिटल और फिजिकल तकनीक से व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है."- विजय कुमार सिन्हा, डिप्टी सीएम सह मंत्री, रेवेन्यू और लैंड रिफॉर्म्स डिपार्टमेंट

जिलावार होगा संवाद: विजय सिन्हा ने कहा कि 12 दिसंबर से प्रमंडलवार शुरू हुआ 'भूमिसुधार जनकल्याण संवाद' जिलावार भी आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर लाइव कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है. इसमें तीन मूल समस्याओं दाखिल-खारिज, परिमार्जन और जमीन मापी को लक्षित कर मौके पर समाधान कराया जा रहा है और समान प्रकृति की समस्याओं के लिए गाइडलाइन तय की जा रही है.

डिप्टी सीएम ने बताया कि ऑनलाइन दाखिल-खारिज निष्पादन 75% से बढ़कर 84% हो गया है. लंबित मामलों का अनुपात 25% से घटकर 16% पर आ गया है. 'परिमार्जन प्लस' निष्पादन 10% से बढ़कर 75% पर पहुंच गया है. विवाद-रहित दाखिल-खारिज के लिए 14 दिन की समय-सीमा निर्धारित कर कार्यों में तेजी लाई जा रही है. भूमि मापी के लिए ई मापी व्यवस्था लागू की गई है. निर्विवाद मापी 7 दिन में, विवादित मापी 11 दिन में और रिपोर्ट अपलोड करने की सीमा 14 दिन तय की गई है.

विजय सिन्हा ने कहा कि दिसंबर से जनवरी अंत तक दाखिल-खारिज और परिमार्जन के 40 लाख लंबित आवेदनों में से 11.50 लाख का निष्पादन किया गया. भूमि विवाद का बड़ा कारण जाली दस्तावेजों पर अब अनिवार्य प्राथमिकी का निर्देश दिया गया है. शहरी क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने की जिम्मेदारी अंचलाधिकारियों को सौंपी गई है. अधिकांश भूमि अभिलेख 1890–1920 के कैडेस्ट्रल सर्वे काल के हैं. 1958 में शुरू रीविजनल सर्वे 1975 में रुक गया था. अब सटीक, सहज और समयबद्ध भूमि सर्वे की दिशा में राजस्व महाभियान को गति दी गई है. 31 मार्च 2026 तक 46 लाख लंबित आवेदनों के निष्पादन का लक्ष्य है. अब तक 34 लाख से अधिक दस्तावेज स्कैन किया जा चुका है.

डिजिटल, पेपरलेस और AI का उपयोग: विजय सिन्हा ने कहा कि आवेदन से आदेश तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया गया है, जिसमें AI तकनीक का उपयोग भी शामिल है. इससे न्याय देने की गति बढ़ी है. नियमित सुनवाई, समय पर अपील और आधुनिक प्रणाली से राजस्व न्याय व्यवस्था में सुधार हुआ है. DCLR/ADM स्तर पर निष्पादन दर 51.7% से बढ़कर 55.9% हुई है, इसको लगातार बढ़ाना उद्देश्य है.

खाली पदों पर होगी बहाली: उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में राजस्व कर्मचारी के 3303 नए पद सृजित किए गए हैं. पहले स्वीकृत 8472 पदों की तुलना में अब कुल पदों की संख्या बढ़कर 11,775 हो गई है. वर्तमान में लगभग 3767 कर्मी कार्यरत हैं. रिक्तियों को भरने के लिए वर्ष 2023 में 3559 पदों पर बहाली हेतु अधियाचना बिहार कर्मचारी चयन आयोग को भेजी गई. शेष रिक्त पदों के रोस्टर क्लियरेंस के बाद वर्ष 2025 में 4492 पदों के लिए प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को प्रेषित की गई है.

राज्य में अमीन के कुल 2502 स्वीकृत पद हैं, जिनमें लगभग 1199 कार्यरत हैं. शेष रिक्तियों के रोस्टर क्लियरेंस के बाद 765 पदों पर नियमित नियुक्ति हेतु प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया है. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व अभिलेखों को अब ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है. एक जनवरी से चिरकुट से दस्तावेज निकालने की व्यवस्था बंद कर दी गई है. लोगों को इसमें परेशानी न हो इसके लिए प्रत्येक अंचल में अंचल अभिलेखागार भवन स्थापित किये गए हैं.

ये भी पढ़ें:

विजय सिन्हा का ऑन स्पॉट एक्शन, शिकायत सुनते ही CO को किया सस्पेंड

बिहार में भ्रष्टाचार के आरोप में राजस्व कर्मचारी बर्खास्त, उपमुख्यमंत्री का सख्त संदेश

'होम्योपैथी इलाज पर विश्वास लेकिन ऑपरेशन की जरूरत पड़ेगी तो एलोपैथी की भी व्यवस्था है', डिप्टी CM की चेतावनी