क्या बिहार में खत्म हो जाएगी शराबबंदी? जीतन राम मांझी के बाद राबड़ी देवी ने खोला मोर्चा
बिहार में शराबबंदी को लेकर एनडीए के नेताओं ने मुखर होकर बोलना शुरू कर दिया है. वहीं राबड़ी देवी ने भी हमला किया. पढ़ें

Published : February 19, 2026 at 12:50 PM IST
पटना: बिहार में शराबबंदी कानून पर समीक्षा की मांग को लेकर सियासी पारा गरम है. विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के भी कई नेता इसके पक्ष में हैं. एनडीए के अंदर ही शराबबंदी को लेकर समीक्षा की मांग उठने लगी है. नीतीश सरकार पर इसको लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिहार सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी? फिलहाल विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने में लगा है. बिहार विधान परिषद की नेता विपक्ष राबड़ी देवी ने भी शराबबंदी कानून को लेकर बड़ा बयान दिया है. सदन की कार्यवाही में शामिल होने पहुंचीं राबड़ी देवी के नेतृत्व में विपक्ष ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
शराबबंदी पर राबड़ी देवी का बड़ा बयान: पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी गुरुवार को विधान परिषद पहुंचीं. इस दौरान परिषद के बाहर विपक्षी सदस्यों ने बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर हंगामा किया. वहीं राबड़ी देवी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि "राज्य में कानून व्यवस्था नाम की चीज नहीं है. सभी जगह बिहार में शराब उपलब्ध है. बॉर्डर से शराब बिहार आ रही है."
कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल: बिहार विधानसभा के बाहर बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर राजद विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया. RJD विधायक रणविजय साहू ने कहा, "बिहार के हालात खराब हैं. पटना में लगातार मर्डर और दुष्कर्म हो रहे हैं. बिहार में अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है और सरकार खामोश है. मुख्यमंत्री कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं. हम लगातार विरोध कर रहे हैं लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है."
मांझी ने कही थी ये बात: शराबबंदी को लेकर खुद नीतीश कुमार के सहयोगी भी सवाल उठा रहे हैं. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी नीतीश कुमार से एक बार फिर से शराबबंदी पर सोचने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि हम नीतीश कुमार को बार-बार बोल रहे हैं और उनको धन्यवाद देते हैं कि हमारे कहने पर उन्होंने तीसरी बार शराबबंदी को लेकर समीक्षा की.

"हम तो शुरू से ही कह रहे हैं कि शराबबंदी नीति गलत नहीं है. शराबबंदी होनी चाहिए, लेकिन क्रियान्वयन में गड़बड़ी हो रही है."- जीतन राम मांझी, केंद्रीय मंत्री
माधव आनंद ने की थी समीक्षा की मांग: आरएलएम के विधायक माधव आनंद ने मंगलवार को नीतीश कुमार से शराबबंदी की समीक्षा की मांग की था. बुधवार को भी उन्होंने इस मुद्दे को सदन में उठाया था.
बिहार के मंत्रियों का बयान : वहीं बिहार सरकार के एससी एसटी मंत्री लखींद्र पासवान ने भी कहा था कि हम शराबबंदी की समीक्षा के पक्ष में हैं. बिहार में सूखा नशा का ट्रेंड बढ़ रहा है और इसको ध्यान में रखते हुए लखींद्र पासवान ने शराबबंदी की समीक्षा को जरूरी बताया था. हालांकि मंत्री विजय चौधरी ने बिहार में शराबबंदी कानून पर समीक्षा को जरूरी नहीं बताया था.
शराबबंदी पर क्या होगा सरकार का अगला कदम?: फिलहाल नीतीश कुमार अपने फैसले पर अडिग नजर आ रहे हैं. लेकिन 2026 के राजनीतिक समीकरण थोड़े अलग जरूर हैं. बीजेपी इस बार गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है और सहयोगी दलों पर दबाव बढ़ा रही है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि भले ही शराबबंदी पूरी तरह खत्म न हो, लेकिन समय आने पर इसके कड़े नियमों में कुछ बड़े संशोधन किए जा सकते हैं. हालांकि अब सबकुछ सरकार के रुख पर निर्भर करता है.
RJD का प्रदर्शन: बता दें कि गुरुवार को बिहार विधानसभा के बजट सत्र में राजद और लेफ्ट के विधायकों ने कानून व्यवस्था को लेकर जमकर प्रदर्शन किया. राजद और लेफ्ट के विधायकों ने कहा कि बिहार में सरकार आपराधिक घटना को रोकने में लाचार है. राजद और लेफ्ट के विधायकों ने कई स्लोगन वाले पोस्टर लेकर काफी देर तक विधानसभा पोर्टिको में प्रदर्शन किया.
उर्दू शिक्षकों की बहाली को लेकर प्रदर्शन: एआईएमआईएम के विधायकों ने उर्दू शिक्षकों की बहाली और एएमयू केंद्र को लेकर प्रदर्शन किया. टीआरई-4 में उर्दू शिक्षकों की बहाली की मांग की गई. एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल इमान ने कहा बिहार में उर्दू दूसरी भाषा होने के बावजूद सरकार भेदभाव कर रही है.

"बिहार सरकार भाजपा शासित राज्यों से भी अधिक उर्दू के साथ दुश्मनी कर रही है. अभी के शिक्षा मंत्री को भाषा के साथ इंसाफ करना नहीं आता है. हम सबने बार-बार आग्रह किया कि नया मानक जो बनाए हैं, उसमें उर्दू विषय को शामिल कीजिए."- अख्तरुल इमान, विधायक, एआईएमआईएम
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