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हाथियों के विचरण में बड़ा बदलाव, एक समूह के बदले छोटे दलों में बंटे, वनविभाग और ग्रामीण परेशान

हाथियों ने विचरण करने का पैटर्न बदला है. जिससे कोरबा वनमंडल में अब हाथियों की लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल भरा काम है.

BIG CHANGE IN MOVEMENT OF ELEPHANTS
हाथियों के विचरण में बड़ा बदलाव (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 8, 2026 at 2:54 PM IST

6 Min Read
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कोरबा : हाथियों को राष्ट्रीय धरोहर माना जाता है. यह संरक्षित श्रेणी के वन्यजीव हैं. सामान्य तौर पर अब तक हाथी बड़े समूह में जंगल में विचरण करते हैं, लेकिन बीते कुछ समय से हाथियों के इस पैटर्न में बदलाव आया है. वन विभाग के अधिकारी खुद ही कह रहे हैं कि हाथी छोटे-छोटे समूह में बंट गए हैं. हाथी अब 2, 3 , 10 इस तरह के छोटी संख्या का समूह बनाकर अलग-अलग दिशाओं में फैल गए हैं. इससे हाथियों के लोकेशन ट्रैक करने में समस्या आ रही है. हाथियों के विचरण का पैटर्न क्यों बदला है? इसके लिए व्यापक रिसर्च की जरूरत है. रिसर्च जब होगा तब होगा, फिलहाल वन विभाग की टेंशन बड़ी हुई है.

Forest department and villagers worried
वनविभाग और ग्रामीण परेशान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

कई दलों में बंटने के कारण हो रही परेशानी

हाथियों के एक दल को ट्रैक करने में वन अधिकारियों के पसीने छूट जाते हैं और जब इतने सारे दल अलग-अलग क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं. तब वन विभाग के अधिकारी उनकी लोकेशन ट्रैक करने में काफी परेशान हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ धान खरीदी के सीजन में किसान भी अपनी फसल की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं.



लोनर हाथी से पहले ही वन विभाग है परेशान

आपको बता दें कि पिछले कुछ समय से एक लोनर हाथी से वन विभाग काफी परेशान है. इस लोनर हाथी ने अकेले 7 से 8 लोगों को मार डाला है. कटघोरा वनमंडल के साथ ही कोरबा वनमंडल में भी इस हाथी ने जनहानि की घटनाओं का अंजाम दिया है. आखिरी घटना कोरबा वनमंडल के बालको रेंज में हुई थी.


जहां एक व्यक्ति को लोनर हाथी ने कुचल दिया था. ये लोनर हाथी कोरबा, कटघोरा धरमजयगढ़ के वनों में विचरण कर रहा है. वन विभाग के अधिकारी इसे ट्रेंकुलाइज करने के लिए भी अनुमति मांग रहे हैं. इसकी लोकेशन की मॉनिटरिंग करना मुश्किल है.

Loner elephant takes lives of many people
लोनर हाथी ने कई लोगों की ली जान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

घने जंगल में छिपने में माहिर है लोनर हाथी

वन के अधिक घने होने के कारण कई बार यह हाथी पेड़ों के पीछे छुप जाता है और सटीक लोकेशन की जानकारी नहीं मिल पाती. जिससे ग्रामीणों को समय रहते सूचना नहीं मिल रही है. लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है. ये लोनर हाथी लगातार लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है, ये दल से बिछड़कर आक्रमक हो चुका है. लोगों को मौत के घाट उतारने, कुचलना की प्रवृत्ति विकसित होने के कारण यह अधिक खतरनाक हो चुका है.



कुदमुरा में घूम रहे हैं छोटे दल

लोनर हाथी के अलावा कोरबा वनमंडल के कुदमुरा रेंज में कई छोटे-छोटे दल विचरण कर रहे हैं. एक दल दो हाथियों का है, तो दूसरा दल तीन हाथियों का है. कुछ दल ऐसे भी हैं. जिसमें पांच हाथी शामिल हैं. सामान्य तौर पर अब तक हाथियों के विचरण में ऐसा पैटर्न नहीं देखा गया है. वह पूरे परिवार के साथ बड़े दलों में विचरण करते हैं. जिसमें आगे, दल के सीनियर लीडर अगुवाई करते हैं और बीच में छोटे बच्चों को रखा जाता है. हाथियों की इस तरह की मानसिकता और साथ में रहने वाली प्रवृत्ति के कारण ही उन्हें एक सामाजिक पशु की संज्ञा दी जाती है.

Elephants divided into small groups
हाथी एक समूह के बजाय छोटे दलों में बंटे (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

धान है हाथियों का पसंदीदा भोजन

हाथियों के मूवमेंट और बदले हुए पैटर्न के बीच एक तथ्य भी है कि धान हाथियों का पसंदीदा भोजन होता है. धान की खुशबू से वह आकर्षित होते हैं. वर्तमान समय में धान की कटाई हो चुकी है. किसानों ने इसे अपने घरों में धान स्टोर करके रखा हुआ है, तो ज्यादातर किसान धान बेचने मंडी जा रहे हैं. धान की खुशबू से हाथी रिहायशी इलाकों के करीब आ रहे हैं. फिर चाहे वह मंडी हो या सामान्य किसानों के घर. वन विभाग का एक तर्क यह भी है कि जहां खाना मिल रहा है. हाथी वहां जा रहे हैं, इसलिए वह अलग-अलग दल में बंट गए हैं. विभाग के अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि हाथियों का पैटर्न क्यों बदला है, इसके लिए रिसर्च की जरूरत है.

group of elephants having fun in water
पानी में मस्ती करता हाथियों का दल (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

इस विषय में कोरबा वनमंडल के डीएफओ प्रेमलता यादव कहती हैं कि हाथियों के मूवमेंट में निश्चित तौर पर बदलाव आया है. अब वह बड़े दल में नहीं घूम रहे हैं. छोटे-छोटे दल में बिखर गए हैं. छोटे दलों की मॉनिटरिंग करना काफी मुश्किलों भरा हो गया है.

एक समूह के बदले छोटे दलों में बंटे (ETV BHARAT CHHATTISGARH)


हर दल को ट्रैक करने का प्रयास कर रहे हैं. वर्तमान समय में धान की उपलब्धता व्यापक तौर पर बनी हुई है. जहां खाना मिल रहा है हाथी उससे आकर्षित हो रहे हैं. एक कारण यह भी है कि हाथी छोटे दल में बिखर गए हैं. लेकिन हाथियों के विचरण का मूवमेंट क्यों बदला है? इसके लिए व्यापक पैमाने पर रिसर्च की जरूरत है. तभी इसकी सटीक जानकारी दी जा सकती है, फिलहाल हमारा प्रयास है कि हाथी मानव द्वंद्व को रोका जाए और हर दल की सटीक तौर पर मॉनिटरिंग की जाए- प्रेमलता यादव, डीएफओ कोरबा वनमंडल

हाथियों के बदले व्यवहार से वनविभाग और ग्रामीण परेशान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)


छोटे दलों के कारण वनविभाग परेशान

फिलहाल वन विभाग भी यह समझ नहीं पा रहा है कि हाथी इतने छोटे-छोटे दलों में क्यों विचरण कर रहे हैं, अधिकारी भी कंफ्यूज है और अलग-अलग दलों को मॉनिटर करना उनके लिए बेहद कठिन हो रहा है. हालांकि वन विभाग के अफसर अपने स्तर पर इस प्रयास में हैं कि हर दल की मॉनिटरिंग की जाए. लेकिन व्यावहारिक तौर पर भी यह संभव नहीं हो पा रहा है. जिसके कारण कौन सा दल, किस क्षेत्र में, कब सक्रिय है. इसकी सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है. इस तरह के बदले हुए पैटर्न से ग्रामीण भी परेशान है. एक तरफ ग्रामीण वन विभाग को कोस रहे हैं, तो वन विभाग के अधिकारी इस बदले हुए पैटर्न की नई चुनौती से जूझ रहे हैं.

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