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"कलेक्टर को आदेश नहीं दे सकते तो किस बात के मंत्री", भूपेश बघेल ने मंत्री लखन लाल देवांगन को याद दिलाए अधिकार

छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन सीएसआर मद से खर्च राशि के विधायक व्यास कश्यप के जवाब पर तीखी बहस हो गई.

CHHATTISGARH BUDGET SESSION
भूपेश बघेल (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 25, 2026 at 5:08 PM IST

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रायपुर: विधायक व्यास कश्यप ने प्रश्नकाल में सवाल किया. "जांजगीर चांपा जिले में औद्योगिक इकाई द्वारा सीएसआर मद से कितनी राशि खर्च की गई और उस राशि में कितने काम कराए गए. जिले में कई औद्योगिक संस्थाओं द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए राशि प्रदान नहीं की गई और क्यों नहीं की गई ?

विधायक के प्रश्न का मंत्री ने दिया जवाब

उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जवाब दिया. "10 करोड़ 54 लाख 57 हजार 658 रुपये खर्च कर जो जो कार्य हुए उसकी सूची उन्हें जारी कर दी गई है. सीएसआर भारत सरकार के नियंत्रण में रहता है. सीएसआर में खर्च करने का प्रावधानिक प्रक्रिया है. निश्चित रूप से जनप्रतिनिधि जो जो मांग करते हैं उसके अनुसार कार्य पूर्ण होते हैं. सांसद औऱ विधायक की अनुशंसा से काम होते हैं. सीएसआर मद का पैसा क्षेत्र के विकास में खर्च किए जाते हैं."

छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र में बहस (ETV Bharat Chhattisgarh)

कश्यप ने अगला सवाल किया

जांजगीर चांपा जिले में सीएसआर मद के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद दिए गए प्रस्तावों को प्राथमिकता ना देकर कलेक्टर ने अपने ढंग से काम बांट दिया. कई काम ऐसे बांटे गए है जो आज शुरू भी नहीं हुए हैं. शहरी क्षेत्र में ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाकर काम दिया गया है. अनावश्यक काम कराए गए. सर्कल से बाहर देकर काम कराया गया है. कई गांव जैसे बिर्रा, कर्रा, बरबसपुर सर्कल एरिया से 25 से 30 किलोमीटर दूर है. ऐसे गांवों में ब्याज की राशि को बांट दिया गया है. इसकी क्या जांच कराएंगे. सर्वेसर्वा कलेक्टर महोदय है तो समिति का क्या औचित्य है.

व्यास कश्यप के प्रश्न पर मंत्री देवांगन का जवाब

सीएसआर मद की कोई कमेटी नहीं बनाई गई है. डीएमएफ की कमेटी बनती है. सीएसआर मद का औद्योगिक घराने या फिर किसी काम के लिए कलेक्टर के अनुशंसा पर भी काम होता है. कलेक्टर के पास जो राशि आती है उसकी जांच वह करते हैं, गुणवत्ताविहीन होने पर कलेक्टर जांच कराता है. उद्योगपति जिन कामों को अपने हिसाब से देते हैं उसकी जांच कलेक्टर नहीं करता उसकी जांच भारत सरकार के माध्यम से होती है.

सीएसआर मद में राज्य शासन को कोई हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होता. कलेक्टर को जो राशि उद्योगों से मिलती है जिसका आवंटन किया जाता है उस राशि की देखरेख कलेक्टर के नियंत्रण में होती है. ग्राम पंचायत को भी कलेक्टर 50 लाख तक का काम दे सकता है.

मंत्री की बात टोकते हुए विधायक ने कहा "शहरी क्षेत्र में ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाकर काम दिया गया. जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव का कोई काम नहीं हुआ.

मंत्री देवांगन का जवाब

क्षेत्र के विकास औऱ स्थिति को देखते हुए काम स्वीकृत किए जाते हैं. प्राथमिक्ता के आधार पर काम की अनुशंसा की जाती है. विधायक के दो प्रस्ताव जिसमें 2 करोड़ 69 लाख 30 हजार रुपये स्वीकृति की प्रक्रियाधीन है. वाटर जोन स्पॉट ग्राम पंचायत कुदरी में ओपिंग जिम, पेंटिंग समतलीकरण, पेचिंग कार्य, प्रतीक्षा औऱ सामुदायिक भवन, सीसी रोड 1 करोड़ 30 लाख का औऱ दूसरा काम 1 करोड़ 69 लाख के कई कामों की सूची दी गई है.

विधायक ने पूछा कि जो गांव उन्होंने चयन किए हैं वो अटल बिहारी बाजपेयी ताप विद्युत परियोजना के प्रभावित गांव है. इसकी घोषणा कर दीजिए.

इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि घोषणा करने का अधिकार उन्हें नहीं है. आप कलेक्टर के साथ विचार कर काम करवाइए.

विधायक ने कहा कि आप के पास कलेक्टर के जरिए ही प्रस्ताव आया है. रमन सिंह की सरकार के समय जांजगीर में सीएसआर मद से मोदी की गारंटी योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए भी है. छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह है कि पॉलिटेक्निक कॉलेज को अपग्रेड कर दें.

लखन लाल देवांगन पर भूपेश बघेल का हमला

प्रश्न और उत्तर के बीच विधायक के सवाल को काटते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा "मंत्री जी ने कहा कि कलेक्टर को मैं निर्देश नहीं दे सकता और कलेक्टर के साथ बैठ जाइए. तो हम फिर कलेक्टर के पास ही बैठते हैं, यहां बैठने का क्या औचित्य है. जब सारा काम कलेक्टर को ही करना है औऱ आप निर्देश नहीं दे सकते आदेश नहीं दे सकते तो फिर किस बात के लिए मंत्री बने हैं."

मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा- "स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं, विधायक ने घोषणा करने की बात कही उस पर मैंने कहा कि मैं घोषणा नहीं कर सकता."

मंत्री के जवाब के बाद भी भूपेश बघेल बोलते रहे. उन्होंने कहा "मंत्री के घोषणा करने के बाद कलेक्टर को वो काम पूरा करने की बाध्यता है. कलेक्टर पर कंट्रोल नहीं है आपका."

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