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राजधानी भोपाल के बस अड्डे के हाल चौंकाने वाले, 50 करोड़ के टर्मिनल में कीचड़ और गंदगी का अंबार

राजधानी भोपाल के ISBT में बजबजाती गंदगी, कीचड़ और गंदगी ऐसी कि 5 मिनट खड़े होना भी मुश्किल, विश्वास चतुर्वेदी की रिपोर्ट.

ISBT BHOPAL REALITY
राजधानी भोपाल के ISBT के बुरे हाल (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 29, 2026 at 7:06 AM IST

4 Min Read
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भोपाल : राजधानी भोपाल के अंतरराज्यीय बस अड्डे (ISBT) से यात्रियों को बस पकड़ने से पहले यात्रियों को कीचड़ और कचरे से सामना करना पड़ता है. जहां बसें खड़ी होती हैं, वहां लोगों के घुटने तक पानी भरा रहता है. बस स्टैंड से जब बस बाहर निकलती है, उस मार्ग पर कचरे का ढेर लगा हुआ है. करीब 50 करोड़ रु की लागत से बने इस टर्मिनल में बारिश के बाद जगह-जगह जहां कीचड़, कचरा और गंदगी पसरी है, वहीं पीने के पानी के लिए लगे नल-टोंटियां खराब हैं, इसलिए यात्रियों को 20 रु की बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है.

बस स्टैंड में टायलेट की हालत इतनी भयानक है कि यहां एक पल खड़े होना भी मुश्किल है. हाल यह है कि रोजाना 25 हजार से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही वाले बस अड्डे पर जरूरी सुविधाओं के लिए लोग भटक रहे हैं.

50 करोड़ का टर्मिनल, कीचड़ और गंदगी के बीच बसें

यात्रियों ने बताया कि कचरा पड़ा होने के साथ आसपास भयानक दुर्गंध भी बनी रहती है. बस संचालकों और यहां काम करने वालों का कहना है कि सफाई नियमित नहीं होती. ऐसे में बारिश के बाद समस्या और बढ़ जाती है. एक व्यक्ति ने बताया कि कभी झाड़ू लगती है और कभी नहीं. कीचड़ में पार्सल और सामान लेकर चलना तक मुश्किल हो जाता है. यात्रियों को भी बस तक पहुंचने में परेशानी होती है.

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राजधानी भोपाल के बस अड्डे के हाल चौंकाने वाले (Etv Bharat)

पानी के लिए बोतल खरीदना मजबूरी

यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी पीने के पानी को लेकर है. परिसर में लगे कई नल और टोंटियां खराब हो चुकी हैं. ऐसे में यात्रियों को बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है. यात्रियों का कहना है कि आम आदमी हर बार 10 से 20 रु खर्च कर पानी नहीं खरीद सकता. महेश नाम के यात्री ने कहा, '' सार्वजनिक पानी की व्यवस्था बंद होने के कारण लोग मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं.''

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500 बसें रोज, फिर भी जानकारी के लिए भटकते हैं यात्री (Etv Bharat)

टायलेट से फीडिंग रूम तक बदहाल

आइएसबीटी से रोजाना 25 हजार से ज्यादा यात्री आते-जाते हैं. इनमें करीब 40 प्रतिशत महिलाएं हैं. इसके बावजूद महिला यात्रियों के लिए बनाई गई सुविधाएं बदहाल हैं. स्मार्ट टॉयलेट और बेबी फीडिंग रूम संचालन के अभाव में बंद पड़े हैं. यात्रियों ने टॉयलेट की सफाई व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई. उनका कहना है कि गंदे वाशरूम में जाना बीमारी को न्योता देने जैसा है.

500 बसें रोज, फिर भी जानकारी के लिए भटकते यात्री

आइएसबीटी से रोजाना 500 से ज्यादा बसों का संचालन होता है, लेकिन यात्रियों के लिए व्यवस्थित पूछताछ केंद्र नहीं है. बसों के समय, रूट और किराए की जानकारी के लिए यात्रियों को अलग-अलग काउंटरों और लोगों से पूछना पड़ता है. वहीं अनाउंसमेंट, किराया सूची और बुकिंग काउंटर जैसी जरूरी सुविधाओं का भी अभाव है.

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हर बस से 40 रु शुल्क, सुविधाएं नदारद

नगर निगम आइएसबीटी के संधारण के नाम पर यहां से चलने वाली प्रत्येक बस से 40 रु प्रवेश शुल्क लेता है. करीब 500 बसों के रोज संचालन के हिसाब से यह राशि हर महीने लगभग 4 से 5 लाख रु तक पहुंचती है. इसके बावजूद सफाई, पेयजल, टायलेट और यात्री सूचना जैसी बुनियादी सुविधाओं की हालत खराब है.