युवाओं को धोखा दे रही किडनी, 40 प्रतिशत ट्रांसप्लांट मामलों में 17 से 35 साल के मरीज ज्यादा
मध्य प्रदेश के युवाओं में बढ़ रही किडनी की समस्या. एम्स भोपाल में 17 किडनी ट्रांसप्लांट में 10 लोगों की उम्र 35 साल से कम.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 17, 2025 at 6:20 PM IST
|Updated : December 17, 2025 at 6:30 PM IST
भोपाल: सीहोर के रहने वाले असलम को टाइफाइड हो गया था. उसने सीहोर में ही स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराया. कुछ दिन में टाइफाइड तो ठीक हो गया लेकिन पेशाब करने में उसे समस्या होने लगी. जब एम्स भोपाल में असलम ने जांच कराई तो पता चला कि उसकी दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं. असलम की उम्र महज 30 साल थी, ऐसे में डॉक्टर भी अचंभित थे. न तो असलम शराब का सेवन करता था और न ही उसे डाइबिटीज या ब्लड प्रेशर की समस्या थी. हालांकि किडनी खराब होने का यह ऐसा पहला मामला नहीं है. आज के समय में किडनी की समस्या को लेकर अस्पतालों में पहुंचने वाले करीब 40 प्रतिशत मरीज 17 से 35 वर्ष के हैं.
युवाओं को हार्ट के बाद किडनी की समस्या
युवाओं को अब हार्ट के साथ किडनी भी धोखा दे रही है. राजधानी के एम्स, हमीदिया और जयप्रकाश अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में किडनी की समस्या लेकर पहुंचने वाले 40 प्रतिशत मरीज 17 से 35 वर्ष आयु वाले हैं. खास बात यह है कि ऐसे 30 प्रतिशत मरीजों को डायलिसिस भी कराना पड़ रहा है. बीते एक महीने पहले एम्स भोपाल में 2 लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट की गई, ये दोनों ही युवा 35 वर्ष से कम आयु के थे. वहीं वर्तमान में एम्स अस्पताल में 30 मरीजों का डायलिसिस चल रहा है, इनमें से 10 मरीज 17 से 35 साल के हैं. हमीदिया और जयप्रकाश अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों का भी यही ट्रेंड है.
एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट के मामलों में 58 प्रतिशत युवा
डॉक्टरों का कहना है कि युवाओं की खराब लाइफ स्टाइल, डाइबिटीज और ब्लड प्रेशर के कारण युवाओं में तेजी से किडनी खराब होने के मामले सामने आ रहे हैं. एम्स भोपाल में अब तक 17 किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं, इनमें 10 लोगों की उम्र 35 साल से कम थी. यानि 58 प्रतिशत किडनी ट्रांसप्लांट युवाओं के किए गए. इसके साथ ही एक निजी अस्पताल में अब 10 किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं. इनमें 4 मरीजों की उम्र 30 वर्ष से कम थी.

किडनी खराब होने के प्रमुख कारण
एम्स भोपाल के डाक्टर मनोहर अटलानी ने बताया कि "खराब जीवन शैली, डाइबिटीज और ब्लडप्रेशर किडनी फेल्योर का कारण तो बन ही रहा है, लेकिन इसमें अमानक दवाएं साइलेंट किलर का काम कर रही हैं. दरअसल कई बार मरीज कोई दर्द या अन्य परेशानी होने पर मेडिकल स्टोर से टैबलेट ले लेते हैं. बिना डॉक्टरों की सलाह के इस तरह की दवाएं किडनी फेल्योर का बड़ा कारण बन रही हैं. इसके साथ ही बार-बार डिहाइड्रेशन होना या पेशाब को अधिक देर तक रोके रखना भी किडनी खराब होने के अन्य कारक हैं."
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इस तरह पहचानें किडनी खराब होने के लक्षण
निजी अस्पताल के डॉ विद्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि "किडनी खराब होने पर मरीज को थकावट जल्दी महसूस होती है. उसे बार-बार पेशाब आती है. पेशाब के साथ झाग भी बनता है. पैरों में सूजन आना, भूख कम लगना, आंखो के नीचे सूजन और उल्टी समेत अन्य लक्षण यदि किसी को दिखते हैं, तो उसे डॉक्टरों से सलाह लेकर किडनी की जांच करानी चाहिए. नमक का कम प्रयोग, नियमित व्यायाम, दर्द निवारक दवाओं का कम सेवन, डाइबिटीज और शुगर को कंट्रोल करके किडनी की गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है.

