भोज वेटलैंड पर एनजीटी सख्त, 50 मीटर दायरे में अवैध निर्माणों पर चलेंगे बुलडोजर
अवैध निर्माण व तालाब में मिल रहे नालों के पानी पर एनजीटी ने दिखाई सख्ती, मध्य प्रदेश के साथ राजस्थान-छत्तीसगढ़ से भी मांगा हिसाब.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 2, 2026 at 8:33 AM IST
भोपाल : राजधानी के भोज वेटलैंड यानी बड़ा तालाब और छोटा तालाब को अतिक्रमण और सीवेज प्रदूषण से बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है. अधिकरण ने फुल टैंक लेवल और हाई फ्लड लेवल से 50 मीटर के दायरे में वर्ष 2017 के बाद हुए अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही तालाबों में गिरने वाले प्रमुख नालों के मुहानों और सीवेज पंपिंग स्टेशनों पर निगरानी के लिए कैमरे और डिजिटल फ्लो मीटर लगाने को भी कहा गया है. वहीं मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से सीवेज उत्पादन, उपचार क्षमता और सीवेज प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है.
तीन महीने में हटाने होंगे 50 मीटर के दायरे में अवैध निर्माण
एनजीटी ने भोज वेटलैंड के संरक्षण को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय की है. इसके तहत फुल टैंक लेवल अथवा हाई फ्लड लेवल से 50 मीटर के दायरे में वर्ष 2017 के नियमों के बाद किए गए पक्के और कच्चे अवैध निर्माणों को चिह्नित कर तीन महीने के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए हैं.

हर बड़े नाले के मुहाने पर कैमरे और फ्लो मीटर
तालाब में पहुंचने वाले सीवेज की निगरानी के लिए सभी प्रमुख नालों के आउटफाल और सीवेज पंपिंग स्टेशनों पर पीटीजेड कैमरे व डिजिटल फ्लो मीटर लगाए जाएंगे. इनके माध्यम से नालों में आने वाले पानी और सीवेज की मात्रा की निगरानी की जाएगी. इसका छेड़छाड़-रहित अभिलेख तैयार होगा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसकी नियमित जांच करेगा.
बड़ा-छोटा तालाब में जीरो डिस्चार्ज का लक्ष्य
एनजीटी ने बड़ा तालाब और छोटा तालाब में मिलने वाले सभी नालों की वास्तविक स्थिति की जांच कर उन्हें सीवेज शोधन संयंत्रों की ओर मोड़ने के निर्देश दिए हैं. मध्यप्रदेश वेटलैंड प्राधिकरण, जिला वेटलैंड संरक्षण समिति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी. इसका उद्देश्य तालाब में बिना उपचारित सीवेज का एक भी प्रवाह रोकना है.
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ड्रोन से होगा वेटलैंड का सीमांकन
वेटलैंड की वास्तविक सीमा तय करने के लिए सितंबर में फुल टैंक लेवल प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर उच्च क्षमता वाले ड्रोन से सर्वे किया जाएगा. याचिकाकर्ता की मौजूदगी में वेटलैंड का सीमांकन और सत्यापन किया जाएगा. इससे अतिक्रमण और निर्माण की स्थिति को लेकर भविष्य के विवादों पर भी अंकुश लगाने की कोशिश होगी.
एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से मांगा सीवेज का हिसाब
अधिकरण ने तीन राज्यों से सीवेज उत्पादन, शोधन संयंत्रों की क्षमता, उनके वास्तविक उपयोग, उपचारित पानी के पुन: उपयोग की नीति और जारी परियोजनाओं की समयसीमा का विस्तृत ब्योरा मांगा है. मध्यप्रदेश में प्रतिदिन करीब 2183.7 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होने की जानकारी दी गई है, जबकि उपलब्ध उपचार क्षमता 1311.99 एमएलडी बताई गई है. इनमें भी वास्तविक रूप से करीब 696.03 एमएलडी क्षमता का ही उपयोग हो रहा है.
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लापरवाही पर अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी
एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेटलैंड नियमों, नगर निकाय के उपनियमों और पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी. सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे पाए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत तक मानी जा सकती है. साथ ही जिलों में वेटलैंड की सूची सार्वजनिक करने और अतिक्रमण व नियम उल्लंघन की शिकायत के लिए आसान व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं.अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी. जबकि राज्यों और संबंधित विभागों को छह सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करना है.

