भोपाल में भुज की तर्ज पर बनेगा वर्ल्ड क्लास स्मारक, सिम्युलेटर सिस्टम से लाइव दिखेगी 1984 की गैस त्रासदी
भोपाल में यूनियन कार्बाइड परिसर की जमीन पर बनेगा विश्वस्तरीय स्मारक और अत्याधुनिक म्यूजियम. मोहन यादव ने एप्को को दिए निर्देश. विश्वास चतुर्वेदी की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 4, 2026 at 5:33 PM IST
भोपाल: साल 1984 की वो सर्द रात, जिसने भोपाल की हवाओं में मौत का ऐसा जहर घोला कि हजारों जिंदगियां हमेशा के लिए खामोश हो गईं. 4 दशक बाद अब उसी यूनियन कार्बाइड परिसर की जमीन पर भोपाल गैस त्रासदी के इतिहास और पीड़ितों के संघर्ष को सहेजने के लिए मध्य प्रदेश सरकार एक विश्वस्तरीय स्मारक और अत्याधुनिक म्यूजियम बनाने जा रही है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गुजरात के भुज में बने प्रसिद्ध स्मृति वन की तर्ज पर बनने वाले इस म्यूजियम में खास सिम्युलेटर सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे पर्यटक 1984 के उस भीषण मंजर और दर्द को लाइव महसूस कर सकेंगे.
मोहन यादव की बड़ी पहल, एप्को को मिले निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, "यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड की रासायनिक कचरे से मुक्त हो चुकी भूमि पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आकार दिया जाए." मुख्यमंत्री ने पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) को इस भव्य स्मारक की जिम्मेदारी सौंपी है. सीएम के निर्देशानुसार एप्को की एक विशेष टीम जल्द ही गुजरात के भुज का दौरा कर वहां बने आधुनिक भूकंप स्मारक और संग्रहालय की व्यवस्थाओं, डिजाइन और तकनीक का विस्तृत निरीक्षण करेगी. इस अध्ययन के बाद भोपाल में बनने वाले स्मारक के लिए एक ठोस एक्शन प्लान और विधिवत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा.
कच्छ दौरे से उपजा यूनियन कार्बाइड परिसर के कायाकल्प का विचार
इस भव्य स्मारक की प्रेरणा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को फरवरी 2026 में हुए उनके कच्छ दौरे के दौरान मिली. भुज के स्मृतिवन की भव्यता और उसकी आधुनिकता से सीएम बेहद प्रभावित हुए थे. बता दें कि 2001 के विनाशकारी गुजरात भूकंप पीड़ितों की याद में 470 एकड़ में फैला यह अनूठा स्मारक तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम है. पीएम मोदी ने साल 2011 में चीन के सिचुआन प्रांत के भूकंप स्मारक को देखने के बाद भुज में इस स्मृतिवन का खाका तैयार किया था, जो आज दुनिया भर में मशहूर है.
सिम्युलेटर तकनीक से लाइव दिखेगी त्रासदी
भोपाल में बनने वाले इस वर्ल्ड क्लास म्यूजियम का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का अत्याधुनिक सिम्युलेटर सिस्टम होगा. इस आधुनिक आपदा प्रबंधन तकनीक (सिम्युलेटर और थ्री-डी प्रोजेक्टर) के माध्यम से यहां आने वाले पर्यटक साल 1984 में हुई भीषण गैस त्रासदी के दौर, उस समय के हालात और दर्दनाक अनुभवों को लाइव देख और महसूस कर सकेंगे. इसके अलावा यहां पीड़ितों के संघर्ष और आपदा के बाद भोपाल के दोबारा खड़े होने की कहानी को भी गैजेट्स के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा.
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इसलिए खास है भुज का स्मृति वन माडल
भोपाल स्मारक के लिए भुज का जो मॉडल चुना गया है, वह भारत का सबसे बड़ा स्मारक है. यहां 7 खास थीम पर आधारित गैलरियां हैं, जो आधुनिक तकनीक से लैस हैं. यहां विशेष सिम्युलेटर की मदद से आगंतुकों को भूकंप का वास्तविक (लाइव) अनुभव कराया जाता है. भुज के इस परिसर में 50 चेकडेम बनाए गए हैं, साथ ही दिवंगतों की याद में 50,000 से अधिक पौधे लगाकर एक भव्य मियावाकी वन भी विकसित किया गया है.

