40 पार महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षण? विशेषज्ञों ने बताए संक्रमण काल से उबरने के तरीके
भोपाल में मेनोपाज सोसाइटी ऑफ इंडिया के सेमिनार में महिला रोग विशेषज्ञों ने मेनोपॉज के दौरान संतुलन बनाने के उपाय बताए.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 28, 2026 at 4:28 PM IST
रिपोर्ट : विश्वास चतुर्वेदी
भोपाल : 40 साल की उम्र पार करते ही यदि महिलाओं की उदासी बढ़ने लगे, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन आए, अचानक गर्मी महसूस हो या बिना कारण थकान बनी रहे, तो इसे केवल स्वभाव का बदलाव मानकर नजरअंदाज करना, भविष्य में खतरे की घंटी साबित हो सकती है. महिला रोग विशेषज्ञों का मानना है कि यह मेनोपॉज की शुरुआत का संकेत हो सकता है.
भोपाल में आयोजित मेनोपाज सोसाइटी ऑफ इंडिया की 31वीं राष्ट्रीय कांग्रेस में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि रजोनिवृत्ति सिर्फ माहवारी रुकने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि महिलाओं के शरीर और मन में होने वाला गहरा संक्रमण काल है.
सिर्फ मूड स्विंग नहीं, हार्मोनल बदलाव का असर
मनोचिकित्सक डॉ. समीक्षा साहू का कहना है "42 से 45 वर्ष की आयु के बीच एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से घटता है. यही हार्मोन महिलाओं के मानसिक संतुलन, हड्डियों की मजबूती और हृदय स्वास्थ्य का सुरक्षा कवच होता है. इसकी कमी से चिड़चिड़ापन, गुस्सा, हॉट फ्लैशेस, घबराहट और नींद की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं."
इस तरह संतुलित बनाएं 40 पार का जीवन
डॉ. श्रद्धा अग्रवाल के अनुसार "कई महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य मानकर अनदेखा कर देती हैं. जबकि लगातार उदासी, थकान, काम में मन न लगना और आत्महत्या जैसे विचार डिप्रेशन के संकेत हो सकते हैं. 40 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएं अक्सर परिवार की धुरी होती हैं. ऐसे में उनका मानसिक स्वास्थ्य पूरे परिवार को प्रभावित करता है. यदि समय रहते पहचान और सही उपचार मिले तो महिलाएं अपने भविष्य की दूसरी पारी को संतुलित बनाया जा सकता है."

डिप्रेशन और सामान्य बदलाव में फर्क जरूरी
डॉ. रचना दुबे ने बताया "सामान्य मूड स्विंग कुछ समय के लिए होते हैं, लेकिन यदि उदासी लगातार बनी रहे और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होने लगे तो यह क्लिनिकल डिप्रेशन हो सकता है. रजोनिवृत्ति को उम्र का असर कहकर टालना खतरनाक है. सही समय पर परामर्श, विस्तृत हिस्ट्री और काउंसलिंग उपचार की पहली सीढ़ी है. विशेषज्ञों के अनुसार मेनोपॉज के लक्षण 5 से 10 वर्षों तक रह सकते हैं. लेकिन दवाइयों, काउंसलिंग और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के जरिए 100 प्रतिशत तक सुधार संभव है."
सार्कोपेनिया, एक मौन खतरा
सम्मेलन में शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने बताया कि मांसपेशियां शरीर की संरचना का अहम हिस्सा हैं. अधिक मसल मास तेज मेटाबॉलिज्म, अधिक ऊर्जा और बेहतर आत्मविश्वास देता है. सार्कोपेनिया यानी मांसपेशियों की संख्या और आकार में कमी, इस उम्र की बड़ी लेकिन अनदेखी समस्या है. जहां ऑस्टियोपोरोसिस के लिए दवाइयां उपलब्ध हैं, वहीं सार्कोपेनिया के लिए विशेष दवा नहीं है. मांसपेशियां घटने से गिरने का खतरा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मधुमेह का जोखिम बढ़ जाता है.
ऐसे मरीजों की जीवनशैली ही असली उपचार
डॉ. शशि श्रीवास्तव ने कहा "अब मेनोपॉज को मिडलाइफ हेल्थ के रूप में देखने की जरूरत है. लंबी उम्र से ज्यादा जरूरी है स्वस्थ जीवन. इस सम्मेलन शुक्रवार को 12 विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं, शनिवार और रविवार को भी वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा. जिनमें हड्डी स्वास्थ्य, पोषण, हृदय रोग और 40 के बाद की डाइट पर चर्चा हुई."
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हार्मोन थेरेपी का भ्रम दूर करेगा एआई
डॉ. शशि श्रीवास्तव ने बताया "एआई आधारित एमएचटी ऐप भी लॉन्च किया गया. सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती जांच के लिए आधुनिक तकनीक पर जोर दिया गया है. नियमित व्यायाम, प्रोटीनयुक्त संतुलित आहार, योग और पर्याप्त नींद मिडलाइफ हेल्थ की कुंजी हैं. रजोनिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि जीवन का नया अध्याय है. सही जानकारी, समय पर उपचार और सकारात्मक जीवनशैली के साथ महिलाएं इसे बहुत अच्छे से हैंडल कर सकती हैं."

