ETV Bharat / state

गटर का पानी पी रहे भोपालवासी, जिम्मेदारों के शर्मनाक जवाब- मौतें इंदौर में हुईं, भोपाल में नहीं

इंदौर जैसे हादसे का खतरा राजधानी भोपाल में भी. सभी जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधियों का एक ही जवाब मुझे जानकारी नहीं, दिखवाते हैं.

BHOPAL SEWAGE WATER PIPELINES
गटर का पानी पी रहे भोपालवासी, वाजपेयी नगर की ग्राउंड रिपोर्ट (ETV BHARAT)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 3, 2026 at 4:05 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

भोपाल : इंदौर में सीवेज का जहर पाइपलाइनों के जरिये घरों में पहुंचा. इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से लाशें बिछ गईं. उल्टी-दस्त से पीड़ित करीब 4 सौ लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं. 45 लोगों की हालत गंभीर है. इंदौर कांड की गूंज पूरे देश में है. शहर-दर-शहर पेयजल सप्लाई की समीक्षा की जा रही है. लेकिन दुर्भाग्य यह कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इंदौर हादसे का डर या खतरा अफसरों और जनप्रतिनिधियों में नहीं दिख रहा.

भोपाल में कई इलाके ऐसे हैं, जहां दूषित पेयजल सप्लाई किया जा रहा है. यहां तक कि सीवेज की गंदगी पेयजल पाइपलाइनों में बेधड़क पहुंच रही है.

इंदौर जैसे हादसे का खतरा राजधानी भोपाल में भी (ETV BHARAT)

वाजपेयी नगर में सीवेज की गंदगी पाइपलाइनों में

आइए हम आपको लेकर चलते हैं भोपाल नगर निगम के जोनल कार्यालय 2 स्थित वाजपेयी नगर में. यहां बनी मल्टियों में पिछले 15 दिन से पीने के पानी में सीवेज की गंदगी मिलकर आ रही है. परेशान लोगों ने इसकी शिकायत पार्षद से लेकर जोनल अधिकारी तक से की है. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इंदौर की घटना से रहवासी डरे हुए हैं. पाइपलाइन से आ रहे पानी को उबालकर पी रहे हैं. क्योंकि इसके अलावा उनके पास कोई रास्ता भी नहीं है. क्योंकि इतने पैसे नहीं कि रोज पीने के लिए पानी खरीद सकें.

भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह (ETV BHARAT)

शिकायतों का कोई असर नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पेयजल की अधिकांश पाइपलाइन सीवेज लाइन के बीच से होकर गुजर रही है. कई जगह पाइपलाइन काफी पुरानी और जर्जर हालत में है, जिनमें जगह-जगह लीकेज हो रहा है. इन लीकेज पाइपों के कारण सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिलकर सीधे घरों तक पहुंच रहा है. कई बार इस समस्या की शिकायत नगर निगम से की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले, समाधान आज तक नहीं हुआ.

सवाल करो तो अफसरों के शर्मनाक जवाब

लोगों का कहना है "बच्चों और बुजुर्गों में पेट से जुड़ी बीमारियां, उल्टी-दस्त और त्वचा रोग बढ़ते जा रहे हैं." ईटीवी भारत संवाददाता ने जब संबंधित नगर निगम अधिकारियों से चर्चा की तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला मिला. अधिकारी ने कहा “घटना इंदौर में हुई है, भोपाल में नहीं” और साथ ही यह भी दावा किया कि नगर निगम अपना काम कर रही है.

BHOPAL SEWAGE WATER PIPELINES
लीवेज लाइन की गंदगी पाइपलाइनों में (ETV BHARAT)

15 दिन से गटर का पानी पेयजल में

रहवासी सुमित भोमराज ने बताया "पिछले 15 दिन से गंदा पानी हमारे घरों में आ रहा है और यही पानी हम पी रहे हैं. एक मल्टी में 64 घर हैं. सभी को यह पानी पीना पड़ रहा है. मल्टी में छोटे-छोटे बच्चे हैं. सवेज से गंदा पानी आ रहा है, चेंबर लाइन से आ रहा है. सभी चैंबर टूटे हुए हैं." पार्षद पति हरिओम आसेरी ने बताया "मैं अभी बाहर हूं. इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है. आपके द्वारा मुझे यह सूचना मिली है. मैं दिखवाता हूं."

मजबूरी में उबालकर पीते हैं गंदा पानी

वाजपई नगर रहवासी कविता बाई ने बताया "हमारे घरों में गटर का गंदा पानी आ रहा है. पिछले 6 महीने से हम परेशान हैं. शिकायत कर चुके लेकिन कोई आता ही नहीं है. कोई सुनवाई नहीं करता. मजबूरी में गंदा पानी उबाल कर पीना पड़ रहा है." नगर निगम के जोनल अधिकारी अभय त्रिवेदी से जब बात हुई उनका कहना "मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. मैं जानकारी लेता हूं."

BHOPAL SEWAGE WATER PIPELINES
वाजयेपी नगर में गटर पानी उबाल कर पी रहे (ETV BHARAT)

भोपाल नगर निगम को हादसे का इंतजार

पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि नगर निगम द्वारा पानी के सैंपल लेने और जांच की जिम्मेदारी प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ के बजाय ड्राइवरों और सीमित संसाधनों के भरोसे छोड़ी गई है. नगर निगम के ड्राइवर पंकज जांगड़े बीते कई दिनों से शहर के अलग-अलग इलाकों से सैकड़ों पानी के सैंपल ले चुके हैं. टीटी नगर और रोशनपुरा क्षेत्रों से भी उसी ने पानी के सैंपल कलेक्ट किए. कई स्थानों पर ड्राइवर द्वारा खुद ही टेस्ट ट्यूब में क्लोरीन की जांच भी की गई.

BHOPAL SEWAGE WATER PIPELINES
नगर निगम के ड्राइवर कर रहे पानी की टेस्टिंग (ETV BHARAT)

भोपाल महापौर ने सारा जिम्मा अफसरों का बताया

चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि भोपाल के 15 वॉटर फिल्टर प्लांट केवल 4 केमिस्ट के भरोसे संचालित किए जा रहे हैं. इस मामले में नगर निगम के सुप्रिटेंडेंट इंजीनियर उदित गर्ग का कहना है "कोई भी पानी की सैंपलिंग कर सकता है." वहीं, महापौर मालती राय से जब ये सवाल किए गए तो वह एक ही रटना लगाती रही "पता करके बताते हैं." अगर और सवाल करो तो कहती हैं "इसका मुझे पता न,हीं अफसरों से पूछो." भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह का कहना है "गाइडलाइन बना दी गयी है. एक जगह की शिकयात मिली थी. एसडीएम व तहसीलदार को भेजा गया था. यदि शिकायत मिलेगी तो जांच करवाएंगे."