मध्य प्रदेश में तबादले को लेकर Whatsapp चैट लीक, भोपाल लूप लाइन है, इसलिए लगे 5 L
मध्य प्रदेश की तबादला नीति को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने उठाए सवाल, सरकारी विभाग पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 22, 2026 at 5:56 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश में तबादला नीति 2026 को लेकर सियासत तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय ने प्रेस वार्ता में प्रदेश सरकार के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में चल रहे कथित तबादला उद्योग और व्यापक भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. सपा का आरोप है कि पारदर्शी व्यवस्था के लिए बनाई गई तबादला नीति पूरी तरह विफल हो चुकी है और यह केवल चहेते अधिकारियों को बचाने व भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का जरिया बनकर रह गई है. अन्य विभागों ने समय पर सूची जारी कर दी, लेकिन उद्यानिकी विभाग ने जानबूझकर फाइलें रोकी, ताकि मलाईदार पदों पर भ्रष्टाचार का खेल खेला जा सके.
दागी अफसरों पर लोकायुक्त जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं
यश भारतीय ने बताया कि "मध्य प्रदेश के धार जिले में प्रभारी उप संचालक उद्यान के पद पर पदस्थ नीरज सांवरिया के खिलाफ लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में भ्रष्टाचार और अनियमितता की जांच चल रही है. सामान्य प्रशासन विभाग की नीति के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सांवरिया को वर्तमान पद से नहीं हटाया गया. इसी तरह इंदौर के ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी सौरभ व्यास के मामले में गोपनीय चरित्रावली में नियमों के विरुद्ध छेड़छाड़ की गई. उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी पद से नहीं हटाया गया, जो शीर्ष अधिकारियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
अधिकारियों के व्हाट्सएप चैट में हुआ खुलासा
यश भारतीय के अनुसार भ्रष्टाचार का सबसे चौंकाने वाला मामला धार के प्रभारी अधिकारी भूपेंद्र सगोरे का सामने आया है. दरअसल, सगोरे का एक व्हाट्सएप चैट तेजी से सकुर्लेट हो रहा है, जिसमें वे अपने एक मित्र से बात कर रहे हैं. चैट में कथित तौर पर खुलासा हुआ है कि उनका तबादला सीधे सचिव साहब से बात करने पर हुआ है. जब उनके मित्र ने उनसे पूछा कि इस ऑर्डर के लिए कितने रुपये लगे, तो भूपेंद्र सगोरे ने जवाब दिया कि भोपाल लूप लाइन है, इसलिए 5 एल (5 लाख) लगे. भारतीय का आरोप है कि यह लीक चौट सीधे तौर पर तबादलों में चल रहे बड़े लेन-देन और मोटी घूसखोरी की ओर इशारा करती है.

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नियमों को ताक पर रखकर डॉ. पूजा सिंह की नियुक्ति
यश भारतीय का आरोप है कि उद्यानिकी विभाग मंत्रालय में ओएसडी पद पर पदस्थ डॉ. पूजा सिंह की नियुक्ति भी सवालों के घेरे में है. पहले कृषि विभाग ने उनकी सेवाएं उनके मूल विश्वविद्यालय वापस कर दी थी, लेकिन बाद में विभाग के सचिव द्वारा नियमों के विपरीत जाकर आदेश संशोधित करते हुए उन्हें पुनः ओएसडी पद पर कार्य करने के निर्देश जारी कर दिए गए. शासन के नियमों के अनुसार एक विभाग के सचिव को दूसरे विभाग में किसी भी अधिकारी को पदस्थ करने का अधिकार नहीं होता, फिर भी दोनों विभागों की सहमति के बिना यह प्रतिनियुक्ति की गई.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के आरोपों पर प्रभारी मंत्री चेतन कश्यप ने कहा कि "मेरे साइन के बिना तबादला सूची जारी की गई है. मुझे इसकी जानकारी अब मिली है, तो जांच कराऊंगा, इसके बाद ही जवाब दे पाऊंगा."

