कांग्रेस बोली ड्राफ्ट से सामने आई चोरी, 35 लाख से हारे, SIR में कटे 42 लाख नाम
मध्य प्रदेश में एसआईआर के ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद कांग्रेस का आरोप. 2023 में कांग्रेस जितने वोटों से हारी उससे ज्यादा अब काटे गए नाम.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 24, 2025 at 8:47 PM IST
भोपाल: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के ड्राफ्ट प्रकाशन के साथ ही मध्य प्रदेश में मतदाता सूची की तस्वीर साफ हो गई है. ड्राफ्ट में मध्य प्रदेश में 42 लाख 74 हजार मतदाताओं के नाम काटे गए हैं. एसआईआर के आंकड़ों के बाद कांग्रेस का आरोप है कि इन आंकड़ों से कांग्रेस के दावे हकीकत साबित हो रहे हैं.
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 35 लाख वोटों से हारी थी और अब 42 लाख से ज्यादा वोट काटे गए हैं. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 2023 के चुनाव में जिन सीटों पर कांग्रेस जितने वोटों से हारी, उससे कई गुना वोट शिफ्टेड बताकर अब काटे गए हैं. अब एसआईआर के नाम पर कांग्रेसियों के नाम गिन-गिनकर काटे जा रहे हैं.
24 हजार से हारे, अब मिले 65 हजार शिफ्टेड वोटर
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और सीडब्ल्यूसी सदस्य कमलेश्वर पटेल ने कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि "2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने फर्जी मतदाताओं का मुद्दा जोरशोर से उठाया था. भोपाल की नरेला विधानसभा सीट पर ही ऐसे बड़ी संख्या में फर्जी मतदाताओं की सूची चुनाव आयोग को सौंपी गई थी. चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मनोज शुक्ला और मंत्री विश्वास सारंग के बीच हार जीत का अंतर 24 हजार 569 का था, लेकिन अब एसआईआर में 65 हजार 356 मतदाता परमानेंट शिफ्टेड बताए गए हैं.
यही स्थिति मांधाता सीट पर जीत-हार का अंतर 589 का था, जबकि यहां 9789 मतदाता परमानेंट शिफ्टेड बताकर सूची से हटाए गए हैं. सागर की सुरखी विधानसभा सीट पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत 2178 वोटों से जीते थे. इस सीट पर अब 12207 मतदाता परमानेंट शिफ्टेड हुए हैं. इस सीट पर कुल 24830 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं."
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि "जिन मतदाताओं के नाम परमानेंट शिफ्टेड मानकर हटाए गए, वह वास्तव में फर्जी वोटर थे, जिनकी वजह से बीजेपी चुनाव जीती है."
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ड्राफ्ट सूची में कई विसंगतियां
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एसआईआर के पहले चरण के बाद जारी ड्राफ्ट सूची में कई विसंगतियां सामने आई हैं. चुनाव आयोग ने नो मैपिंग की जो सूची बताई है वह गलत है. न तो कोई सूची बूथ पर चस्पा की जा रही है और न उसे साइट पर अपलोड किया जा रहा है.
चुनाव आयोग द्वारा ड्राफ्ट सूची का प्रिंट बीएलओ को भी नहीं दिया गया और न ही राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराया गया है. इससे डिलीट किए गए मतदाताओं को चिन्हित करने में भारी असुविधा होगी. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान आयोग ने 7 हजार बूथों को बढ़ा दिया. इन बूथों पर एसआईआर की प्रक्रिया भी हो गई, लेकिन इसकी जानकारी राजनीतिक दलों को दी ही नहीं गई.

