15 साल में घटे 50 लाख एडमिशन, मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की तस्वीर, बजट बढ़ा क्लासरूम खाली
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों से बच्चे हो रहे ड्रॉपआउट, 15 साल में 50 लाख घटे एडमिशन घटे, जबकि हर साल बढ़ रहा शिक्षा बजट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 27, 2026 at 12:11 PM IST
|Updated : February 27, 2026 at 12:35 PM IST
रिपोर्ट: बृजेंद्र पटेरिया
भोपाल: मध्य प्रदेश के स्कूलों का बजट भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के एडमिशन की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है. पिछले 15 सालों के दौरान मध्य प्रदेश में बच्चों के एडमिशन में 50 लाख की कमी आई है. कांग्रेस विधायक के सवाल पर सरकार ने विधानसभा में यह जानकारी दी है. उधर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आ रही छात्र-छात्राओं की लगातार कमी को देखते हुए राज्य शिक्षा केन्द्र ने अध्ययन कराने के लिए प्रदेश के अटल बिहारी सुशासन संस्थान को पत्र लिखा है. उधर जहां स्कूलों में छात्र संख्या घट रही है, वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग का बजट हर साल बढ़ रहा है.
हर साल कम हो रही छात्रों की संख्या
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या हर साल घट रही है. विधानसभा में सरकार द्वारा दी गई लिखित जानकारी से इसके आंकड़े सामने आए हैं. सरकार ने बताया है कि, प्रदेश के सरकारी स्कूलों के प्राइमरी और मिडिल क्लॉस में एडमिशन लेने वाले छात्र-छात्रों की संख्या में लगातार कमी आई है. साल 2010 में जहां कक्षा 1 से 8 वी तक 105.30 लाख स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया था, वह संख्या साल 2025-26 में घटकर 55.61 लाख रह गई है. यानी हर साल छात्रों की संख्या घटती गई. 2010 से 2025 के बीच यानी 15 सालों के दौरान मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में 50 लाख की कमी आई है. इसी तरह...
साल - 2010-11 में मध्य प्रदेश में कक्षा 1 से लेकर 8 तक की कक्षा में 105.30 लाख स्टूडेंट्स एडमिशन लिया था.
साल - 2011-12 में 1 से 8 वीं कक्षा तक एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 101.38 हो गई.
साल - 2014-15 में कक्षा 1 से 8 वीं तक एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 93.76 लाख रह गई.
साल - 2020-21 में कक्षा 1 से 8 वीं तक एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 64.34 लाख रह गई.
साल - 24-25 में कक्षा 1 से 8 वीं तक एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 58.17 लाख रह गई.
साल - 2025-26 में कक्षा 1 से 8 वीं तक एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या घटकर 55.61 लाख रह गई.

हाई स्कूलों में भी घट गई संख्या, बजट नहीं हो रहा खर्च
मध्य प्रदेश के छोटी क्लॉस ही नहीं, बल्कि कक्षा 10 वीं और 12 वीं में पहुंचने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में हर साल कमी आ रही है. कक्षा 9-10 और 11-12 क्लॉस में साल 2010-11 में 28.35 लाख स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया था. यह संख्या साल 2015-16 में घटकर 23.57 लाख, साल 2020-21 में घटकर 23.07 लाख पहुंच गई.
साल 2024-25 में 21.83 लाख स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया था. यानी पिछले 10 सालों में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 2 लाख तक घट गई है. उधर जहां स्कूलों में छात्र संख्या घट रही है, वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग का बजट हर साल बढ़ रहा है. साल 2023-24 में स्कूल शिक्षा का बजट 31961 करोड़ था. साल 2024-25 में यह बढ़कर 33532 करोड़ हो गया, जबकि साल 2025-26 में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 36811 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया.
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विभाग ने लिखा अध्ययन के लिए पत्र
उधर, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगातार घटती एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या के कारणों का पता लगाने के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान को पत्र लिखा है. लेकिन 4 माह बाद भी इस दिशा में कदम न उठाए जाने के चलते विभाग द्वारा संस्थान को रिमांडर भेजा गया है.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने छात्रों की कम होती संख्या को लेकर मोहन यादव सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने अपने X हैंडल पर ट्विट करते हुए लिखा कि, ''मध्य प्रदेश को मोहन यादव ने लापता प्रदेश बना दिया है. प्रदेश में लाड़ली बहनें लापता होने के बाद अब स्कूल के बच्चे भी लापता हो रहे हैं. 10 साल में प्रदेश के सरकारी स्कूलों से 22 लाख बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है. आज मध्य प्रदेश के अधिकतर सरकारी स्कूलों में न शिक्षक हैं, न शिक्षा. जहां विदेशों में स्कूल के बच्चे Mars पर पानी ढूंढ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश में बच्चे सरकारी स्कूलों में ब्लैकबोर्ड और किताबें ढूंढ रहे हैं.''
उधर कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि, ''स्टूडेंट्स की संख्या में भी गड़बड़ी की जा रही है और इन आंकड़ों में हेरफेर के नाम पर इससे जुड़े दूसरी योजनाओं में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है.'' कांग्रेस ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की है.

