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मध्य प्रदेश में बढ़ेगा मगरमच्छों का कुनबा, मोहन यादव नर्मदा नदी में छोड़ेंगे क्रोकोडाइल

घड़ियाल के बाद मगरमच्छों को मध्य प्रदेश में बसाएगी मोहन यादव सरकार, नर्मदा नदी में मगरमच्छ छोड़ने को लेकर मुख्यमंत्री ने किए बड़ा ऐलान.

BHOPAL CROCODILES RELEASE NARMADA
मध्य प्रदेश में बढ़ेगा मगरमच्छों का कुनबा (Getty Image)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : October 29, 2025 at 10:22 PM IST

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भोपाल: मध्य प्रदेश में घड़ियाल के बाद अब मगरमच्छों का कुनबा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार उन्हें नया घर देने जा रही है. राज्य सरकार अब प्रदेश की जीवनदायनी कही जाने वाली नर्मदा नदी में मगरमच्छों को बसाने जा रही है. इसकी शुरूआत 30 अक्टूबर से होने जा रही है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 अक्टूबर को नर्मदा नदी में मगरमच्छों को छोड़ेंगे. हालांकि, उन्हें ऐसे स्थानों पर छोड़ा जाएगा, जहां नदी के पास इंसानी बसाहट न हो और न ही धार्मिक स्थल हो. डॉ. मोहन यादव ने कहा कि "पिछले दिनों चंबल नदी में घड़ियाल छोड़े गए थे और अब मगरमच्छ के संरक्षण के लिए उन्हें नर्मदा नदी में छोड़ा जाएगा."

सीएम ने कहा सावधानी भी रखी जाएगी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा "नर्मदा नदी के कुछ अंचलों में मगरमच्छ दिखाई देते हैं. जबकि देखा जाए तो नर्मदा नदी की धारा मगरमच्छ के बेहद अनुकूल है, इसलिए इसमें मगरमच्छ छोड़े जा रहे हैं." सीएम ने कहा कि "मगरमच्छ छोड़ने के दौरान जरूरी सावधानी भी रखी जाएगी. खासतौर से नर्मदा के किनारे जहां आबादी क्षेत्र है या फिर धार्मिक स्थल है. उन स्थानों पर मगरमच्छ नहीं छोड़े जाएंगे. हालांकि, देखा जाए तो नर्मदा नदी में कितने मगरमच्छ मौजूद हैं. इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी वन विभाग के पास मौजूद नहीं है."

मोहन यादव नर्मदा नदी में छोड़ेंगे क्रोकोडाइल (ETV Bharat)

खतरे में मगरमच्छ की प्रजाति

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के मुताबिक संकटग्रस्त जलीय जीव के रूप में मगरमच्छ सूचीबद्ध हैं. मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली मगरमच्छ की प्रजाति को असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है. वन विभाग मगरमच्छों की गणना नहीं कराती, इसलिए प्रदेश में इनकी कितनी संख्या है, यह ज्ञात नहीं है. हालांकि रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी सुदेश बाघमारे कहते हैं कि निजी संस्थाओं द्वारा पूर्व में कराई गणना के आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश में करीबन 5 हजार मगरमच्छ मौजूद हैं, लेकिन यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है."

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मध्य प्रदेश में बढ़ेगा मगरमच्छों का कुनबा (ETV Bharat)

कम होते मगरमच्छ की संख्या को लेकर रिटायर्ड अधिकारी ने बताया कि "मगरमच्छों की नेचुरल हेबीटेट में मानव गतिविधियां बढ़ रही हैं. इस वजह से इसका सरवाईवल रेट भी कम हो रहा है. खासतौर से नदियों में होने वाला उत्खनन इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है. क्योंकि मगरमच्छ नदी के किनारे रेत में अपने अंडे देते हैं."

सर्दियों में पानी से ज्यादा बाहर रहते हैं मगरमच्छ

सर्दियों में मगरमच्छ आमतौर पर ज्यादा पानी से बाहर दिखाई देते हैं. क्योंकि मगरमच्छ को पसीना नहीं आता, इसलिए तेज धूप में वह बहुत देर तक बाहर नहीं रह पाता. बॉडी हीट होते ही वह पानी के अंदर चला जाता है. सर्दियों में तापमान कम रहता है, इसलिए वह ज्यादा समय बाहर रहता है. मगरमच्छ की काउंटिंग भी सर्दियों में ही की जाती है.

साल में एक बार अंडे देती है मादा मगरमच्छ

मादा मगरमच्छ साल में एक बार अंडे देती है. एक बार में करीब 45 अंडे तक मादा मगरमच्छ देती है. अंडे की हैचलिंग यानी अंडे से मगरमच्छ के बच्चे को बाहर निकलने में 2 से 3 माह का वक्त लग जाता है, लेकिन इनका सरर्वाइवल रेट कम होता है. 45 अंडों में से 2 से 3 बच्चे ही जिंदा रह पाते हैं. यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि मगरमच्छ का नेचुरल हैबिटैट कितना सुरक्षित है.