टेक्नोलॉजी का करिश्मा, 9 साल बाद घर लौटी खुशियां, 2017 से लापता बुजुर्ग की घर वापसी
9 साल से लापता बुजुर्ग ग्वालियर में मिला, तकनीक और संवेदनशील युवाओं की काउंसलिंग ने मिलाया बिछड़ा परिवार.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 19, 2026 at 10:36 PM IST
ग्वालियर: जब अपना कोई बिछड़ जाए तो लोग बेचैन हो जाते हैं, गुमशुदा हो तो ढूंढने का प्रयास करते हैं, लेकिन कई सालों तक कोई सुराग नहीं मिलने पर परिवार और कानून दोनों गुमशुदा आदमी को मृत मन लेता है. लेकिन जब किसी को वर्षों बाद अपने खोए हुए सदस्य की जानकारी मिले तो उसकी खुशियों का अंदाजा कोई नहीं लगा सकता है. ठीक ऐसा ही एक बुजुर्ग और उसके परिवार के साथ हुआ, करीब 9 साल पहले घर से बाजार जाने के लिए निकले बद्री नामक व्यक्ति कभी वापस नहीं लौटे. लेकिन एक दिन अचानक ग्वालियर के एक आश्रम ने उनके घरवालों को बताया कि, उनके परिवार का मुखिया आश्रम में है. इस खबर ने बिछड़े परिवार को मिलाया और अब बद्री अपने घर अपनों के बीच लौट गए हैं.
कड़ाके की ठंड में सड़क किनारे मिला था बुजुर्ग
करीब दो महीने पहले दिसंबर की कड़कड़ाती ठंड में हजीरा के गौसपुरा नंबर 1 के पास सड़क किनारे एक बुजुर्ग लेटा हुआ था, उसके पास न कोई कंबल का सहारा और न अलाव की कोई व्यवस्था थी. बदन पर सिर्फ एक जैकेट और पैरों में पजामा. ठंड से ठिठुरते इस शख्स पर आयुष गोस्वामी नामक व्यक्ति की नजर पड़ी, वह एक निराश्रित सेवा के आश्रम से जुड़े हुए थे. आयुष गोस्वामी ने देखा कि ठंड से बुजुर्ग की हालत खराब है और वह कुछ बोलने की भी स्थिति में नहीं है. वे किसी तरह बुजुर्ग को ग्वालियर के स्वर्ग सदन आश्रम लेकर पहुंचे, जहां बुजुर्ग की देखभाल की गई.
सैर पर निकले सेवा साथी ने पहुंचाया आश्रम
आयुष गोस्वामी ने बताया, "20 दिसंबर 2025 को हम करीब सुबह 5 बजे पर सैर पर निकले थे, तभी गौसपुरा नंबर 1 के पास एक बुजुर्ग व्यक्ति सड़क किनारे लेटा दिखाई दिया, मैं उससे बात करने का प्रयास किया, लेकिन वह कुछ बोलने की हालत में नहीं थे. इससे ये समझ आ गया था कि ये कोई परेशान व्यक्ति है, जो अपने परिवार से अलग हो चुका है. लेकिन इतनी कड़ी ठंड में उसे इस तरह छोड़ना उचित नहीं लगा तो हम उसे स्वर्ग सदन आश्रम ले गए. जहां निराश्रित लोगों की सेवा की जाती है. मैं खुद भी उस आश्रम से जुड़े हैं और सेवा कार्य करते हैं. इसलिए वहां उन्हें भर्ती करा दिया था."
सेवाभाव देख बुजुर्ग ने बताया नाम और शहर
स्वर्ग सदन आश्रम चलाने वाले पवन सूर्यवंशी ने बताया, "जब बुजुर्ग दो महीने पहले यहां आए थे तब वे कुछ नहीं बोलते थे. आश्रम में जब उनकी देखभाल हुई, उनका इलाज हुआ तो उन्हें भरोसा हुआ और तब उन्होंने अपना नाम बद्री नाथ बताया, उन्होंने यह भी बताया की वे भोपाल के रहने वाले हैं."
साइकोलॉजी छात्रों ने काउंसलिंग से पता लगाया सुराग
उन्होंने आगे बताया, "आश्रम में एमिटी यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी विभाग के इंटर्न छात्र विशेष अनुबंध के तहत आश्रम में काउंसलिंग के लिए आते हैं. कुछ दिन पहले इनमें से दो छात्राओं शाम्भवी किशोर और श्रेया कोकिवार ने बुजुर्ग बद्री की काउंसलिंग की. पहले तो चार पांच दिन तक उन्होंने कोई बात नहीं की, लेकिन फिर धीरे-धीरे उन्होंने बोलना शुरू किया. करीब एक सप्ताह बाद बताया कि वे भोपाल के कोलार रोड चीचली बैरागढ़ स्थित गरीब नगर में एक संस्कार स्कूल हैं, जहां काम करते थे."
स्कूल ढूंढ कर परिवार तक पहुंचाई खुशखबरी
बद्रीनाथ के परिवार को ढूंढने का एक सुराग मिला था. इसके बाद गूगल पर स्कूल के बारे में जानकारी जुटाई गई और स्कूल प्रबंधन से उनके बारे में पता लगाया गया. उनकी जानकारी पुष्ट होने पर स्कूल प्रबंधन के माध्यम से बद्रीनाथ के परिवार तक उनके ग्वालियर में होने की खबर पहुंचाई गई. ये जानकारी मिलते ही उनके परिवार में खुशियों का सैलाब आ गया. जिसके मिलने की उम्मीद टूटने लगी थी, वहां अचानक आशा की किरण नजर आई.
गुमशुदगी का दुख नहीं झेल पाए पिता
बीती 13 फरवरी को बद्री नाथ की बहन सुंदरी, ज्योति और उनके जीजा उन्हें लेने ग्वालियर के स्वर्ग सदन आश्रम पहुंचे. 9 साल का इंतज़ार ख़त्म हुआ परिवार फिर से मिल गया था. लेकिन इस सब के बीच बद्री नाथ को दुखद समाचार भी मिला कि, उनके पिता बद्री की गुमशुदा होने के दुख में इस दुनिया से चल बसे थे.
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बद्री नाथ की बहन सुंदरी के मुताबिक, भाई बद्री साल 2017 में घर से गेंहू लेने गांव गए थे, लेकिन कभी वापस नहीं लौटे. कोलार थाने में उनके गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. लेकिन उनका इतने सालों में कुछ पता नहीं चला था. हालांकि, बद्री नाथ भोपाल से ग्वालियर तक कैसे पहुंचे और इस बीच उन्होंने किन हालातों को झेला इस बारे में अब तक किसी को कोई जानकारी नहीं है. बहरहाल 13 फरवरी को ही बद्री नाथ अपनी बहन और जीजा के साथ खुशी-खुशी अपने घर भोपाल लौट गए हैं.

