मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के पास हजारों करोड़ की प्रॉपर्टी कहां-कहां, कितनी सालाना कमाई?
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में पहली बार दो गैर मुस्लिम की एंट्री से बवाल. दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप की बौछार.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 6, 2026 at 7:00 PM IST
भोपाल : मध्य प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है जहां वक्फ बोर्ड में पहली बार गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की गई. इसी से सियासी बवाल शुरू हो गया. एक पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दे रहा है तो दूसरा पक्ष वक्फ बोर्ड के बेहिसाब कमाई की बंदरबांट पर उंगली उठा रहा है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर वक्फ बोर्ड के पास प्रदेश में कुल कितनी संपत्ति हैं और कहां-कहां पर हैं. वक्फ बोर्ड को सालाना कितनी कमाई होती है और कहां से?
मध्य प्रदेश में 23 हजार से ज्यादा प्रॉपर्टी
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के पास वर्तमान में 23 हजार से ज्यादा संपत्तियां दर्ज हैं, जो पूरे राज्य में फैली हुई हैं. इन संपत्तियों के अंतर्गत मस्जिदें, दरगाहें, कब्रिस्तान और वक्फ से जुड़ी कृषि व व्यावसायिक जमीनें शामिल हैं. भोपाल इनमें पहले नंबर पर है. अकेले भोपाल में ही 4 हजार से ज्यादा वक्फ की संपत्तिया हैं. इंदौर, उज्जैन, विदिशा, रतलाम, शाजापुर जिले भी वक्फ की काफी संपत्तियां हैं.
बोर्ड वक्फ के अधीन आने वाली संपत्तियों की निगरानी करता है. इनसे होने वाली आय, व्यय का ब्यौरा भी बोर्ड देखता है. वक्फ संपत्तियों पर कब्जे के मामले भी बोर्ड देखता है. मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यालय भोपाल में ताज-उल-मसाजिल के पास है.
मध्य प्रदेश के किस शहर में कितनी प्रॉपर्टी
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उसके अंडर में कुल 23,118 संपत्तियां हैं. भोपाल में सबसे अधिक 4,475 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं. इसके बाद उज्जैन में 1,473, इंदौर में 1,307, शाजापुर में 1,213, विदिशा में 1,011 और रतलाम में 907 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं. वक्फ बोर्ड के जानकारों का कहना है कि इतनी बेशुमार संपत्तियां होने के बाद भी वास्तविक आय बोर्ड के पास बहुत कम पहुंचती है. बताया जाता है कि बोर्ड के पास केवल 2 करोड़ सालाना पहुंचते हैं. माना जाता है कि कमाई इससे सैकड़ों गुना ज्यादा है.
सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के गठन की अधिसूचना राजपत्र में जारी कर दी है. नवगठित बोर्ड में सनवर पटेल को अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं पहली बार दो हिंदू सदस्यों, मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव को बोर्ड में जगह मिली है. इसका विरोध शुरू हो गया है. मुस्लिम संगठन सड़क पर आ गए हैं.

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा "ये मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. फिर ऐसा क्या था जो मोहन सरकार ने ये फैसला ले लिया. इस मामले में मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा." बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा का कहना है "जो वक्फ की प्रॉपर्टी खा रहे थे, उन मुसलमानों को तकलीफ हो रही है."
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वक्फ बोर्ड को मुस्लिम तक सीमित मत करें
कैबिनेट मंत्री विश्वास सांरग का कहना है "मस्जिद समेटी का मामला नहीं है. ये मस्जिद कमेटी नहीं है, जिसमें हिंदूओं को शामिल कर लिया गया हो. वक्फ बोर्ड को मुस्लिम तक सीमित मत रखिए. वक्फ की संपत्तियों के जो मामले हैं उसमें हिंदू लोग भी हैं. कोर्ट जो कह चुका है उसके खिलाफ कांग्रेस आवाज उठा रही है. ये तो संविधान का उल्लंघन है."
आल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने सरकार के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने कहा "संविधान ने सभी धर्मों को अपने-अपने नियमों के अनुसार चलने की आजादी दी है, फिर वक्फ कमेटी में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने की क्या आवश्यकता है."

