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मध्य प्रदेश में टाइगर क्यों होने लगे आदमखोर? विशेषज्ञों को असली कारण पता चला

मध्य प्रदेश में बीते 6 माह में बाघों ने 22 ग्रामीणों का शिकार किया. प्रदेश में हर साल औसतन 55 लोग बाघ के शिकार. भोपाल से ब्रिजेंद्र पटेरिया की रिपोर्ट.

Tiger Attacks human cattles
मध्य प्रदेश में टाइगर के हमले बढ़े (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 1, 2026 at 7:40 PM IST

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Updated : July 1, 2026 at 7:59 PM IST

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भोपाल: मध्य प्रदेश के बफर जोन में बढ़ती पर्यटकों की संख्या क्या बाघों को परेशान कर रही है? बफर जोन में ग्रामीणों पर बढ़ते बाघों के हमलों को लेकर यह सवाल वन्यजीव विशेषज्ञों ने उठाए हैं. प्रदेश के टाइगर रिजर्व खासतौर से बांधवगढ़, कान्हा में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं. बांधवगढ़ में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही टाइगर रिजर्व में बाघों के इंसानों से संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. पिछले 6 माह में प्रदेश में बाघों के हमलो में 22 लोगों की जान जा चुकी है. आखिरकार विशेषज्ञों ने बाघों द्वारा इंसान व पालतू पशुओं पर हमले के कारण जान लिए.

पर्यटकों की पसंद बना बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बाघों की संख्या बांधवगढ़ टाइगर रिवर्ज में है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या करीब 165 के आसपास है. इसे दुनिया के सबसे घनी बाघ आबादी वाले राष्ट्रीय उद्यानों में से एक माना जाता है. बाघों की ज्यादा संख्या के चलते बफर एरिया में बाघों का दीदार आसान होता है और यही वजह है कि बांधवगढ़ में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढोत्तरी हो रही है.

रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी सुदेश बाघमारे (ETV BHARAT)

बांधवगढ़ में साल 2024-25 में 1 लाख 96 हजार 889 पर्यटक बाघों की दीदार करने पहुंचे थे, इनमें 30 हजार 766 विदेशी पर्यटक भी शामिल थे, जबकि साल 2025-26 में पर्यटकों की संख्या बढ़कर 2 लाख 12 हजार 486 पहुंच गई है. बांधवगढ़ नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय कहते हैं "यहां आने वाले पर्यटक आमतौर पर निराश होकर नहीं लौटते, यही वजह है कि ये टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है."

कान्हा टाइगर रिजर्व में कम हुई पर्यटकों की संख्या

प्रदेश में सबसे ज्यादा पर्यटक बाघों को देखने के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व में पहुंचते हैं. कान्हा में साल 2025-26 में 2 लाख 41 हजार 416 पर्यटक पहुंचे थे, लेकिन पिछले सालों के मुकाबले आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या घट रही है. साल 2024-25 में कान्हा में 2 लाख 57 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंचे थे, यानी यहां 16 हजार पर्यटक कम पहुंचे. पेंच टाइगर रिजर्व में हर साल करीबन 2 लाख पर्यटक पहुंच रहे.

क्या ज्यादा पर्यटकों से बेचैन हो रहे बाघ

टाइगर रिजर्व में बढ़ती पर्यटकों की संख्या को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों ने अब सवाल उठाना शुरू कर दिए हैं. खासतौर से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को लेकर. रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी सुदेश बाघमारे कहते हैं "दूसरे टाइगर रिजर्व के मुकाबले बांधवगढ़ का क्षेत्रफल कम है, जबकि क्षेत्रफल के मुकाबले टाइगर बहुत ज्यादा हैं. यही वजह है कि बफर जोन में बड़ी संख्या में टाइगर का मूवमेंट देखा जा सकता है, लेकिन जिस तरह से बांधवगढ़ में इंसान और बाघ के लगातार संघर्ष के मामले सामने आ रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि बड़ी संख्या में पर्यटकों की वजह से यहां बाघ परेशान हो रहे हैं और इसका नतीजा इन संघर्ष के रूप में सामने आ रहा है. हालांकि टाइगर रिजर्व में टूरिस्ट को लेकर पूर्व में गाइडलाइन बनाई गई थी, लेकिन इस पर एक बार फिर विचार होना चाहिए."

लगातार बढ़ रहे बाघों के मामले

मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के ग्रामीणों पर वन्य प्राणियों के हमले बढ़े हैं. प्रदेश में पिछले 06 माह में ही करीब 22 लोगों की जान बाघों के हमलों में हुई है. जनवरी से 30 जून के बीच प्रदेश में कुल 48 ग्रामीणों की जान वन्य प्राणियों के हमलों में गई. पिछले 6 साल के आंकड़ों को देखा जाए तो प्रदेश में वन्य प्राणियों के हमलों में 292 लोगों की मौतें हुई हैं, जबकि 11 हजार 182 लोग घायल हुए. बाघों के हमलों के आंकड़े देखें तो पिछले 9 सालों में 2014 से 2022 के बीच 497 ग्रामीणों की जान टाइगर के हमलों में चली गई. औसतन 55 लोगों की जानें टाइगर के हमलों में जा रही है।

वन्य जीव विशेषज्ञ एके खरे कहते हैं "बाघों की बढ़ती संख्या और टाइगर रिजर्व के बफर जोन में पालतू पशुओं की आसान उपलब्धता बाघों को ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास ला रही है. जंगल में आधे बाघ हिरण, सांभर, चिंकारा, जंगली सुअर पर निर्भर हैं, गाय-भैंस जैसे पालतू पशुओं को भी अपना शिकार बना रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास मिलने वाले ये पालतू पशु के रूप में बाघों को आसानी से शिकार मिल रहे हैं, जिनका शिकार करना भी इनके लिए दूसरे वन्यजीव के मुकाबले आसान होता है. यही वजह है कि ग्रामीण भी बाघों की चपेट में आ रहे हैं."

Last Updated : July 1, 2026 at 7:59 PM IST