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90 मिनट में गीतों भरी कहानी में गुरुदत्त के अनसुने किस्से, फौजिया ने सुनाई दास्तान

भोपाल में चल रहे भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में एक शाम गुरुदत्त के नाम हुई. फौजिया ने 90 मिनट में गुरुदत्त की पूरी कहानी सुनाई.

BHOPAL LITERATURE FESTIVAL
गीतों भरी कहानी में गुरुदत्त के अनसुने किस्से (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 10, 2026 at 11:06 PM IST

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Updated : January 10, 2026 at 11:16 PM IST

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भोपाल: सीन नहीं, किस्से बदल रहे थे. और किस्सा किस्सा पिरोई जा रही थी पूरी दास्तान. ज्योतिष ने ये तो बता दिया था उस मां को कि तुम्हारे घर जो बेटा जन्म लेगा वो दुनिया में नाम रोशन करेगा. लेकिन ये नहीं बताया कि जज़्बात में डूबे उस लड़के को खास ख्याल की ज़रुरत होगी. ये नहीं बताया कि वो कुल 39 बरस की छोटी जिंदगी लिए आया है. 39 बरस की उम्र में भारतीय सिनेमा कि इतिहास में अपने अभिनय लेखन और निर्देशन से एक गहरी लकीर खींच गए गुरुदत्त की कहानी की बयानी थी ये.

भारत की पहली महिला दास्तानगो फ़ौज़िया किस्सा गुरुदत्त की जिंदगी के अनदेखे लम्हे लफ्ज़ों में उतारतीं जाती और किस्सा किसी सिनेमा के सीन की तरह बदलता जाता. गुरदत्त की पैदाइश से लेकर शुरुआती संघर्ष पहले इश्क और फिर वहीदा से पहली मुलाकात और फ्लैट की आखिरी रात तक फौज़िया ने अपनी दास्तानगोई के 90 मिनट में गुरुदत्त की पूरी कहानी की बयान की थी.

फौजिया ने सुनाई दास्तान (ETV Bharat)

गीतों भरी कहानी में गुरुदत्त के अनसुने किस्से

दास्तान हिंदी सिनेमा के वक्त से पहले टूट गए ध्रुव तारे गुरुदत्त की थी. लिहाजा फौजिया ने इस दास्तान को एक सिनेमा की सी शक्ल दे दी. तीन घंटे का नहीं ,ये सिनेमा 90 मिनट का था. तस्वीर अल्फाज़ो से बनाई जा रही थी. फौज़िया जो किस्सागोई कर रही थीं. उससे सामने आती जाती एक-एक तस्वीर. और फिल्मों की तरह ही कहानी के बीच में गीत में गूंथे गए थे. वो भी इस तरह से कि वो कहानी का ही एक्सटेंशन मालूम होते थे.

GURU DUTT UNHEARD STORIES
फौजिया ने 90 मिनट में गुरुदत्त की पूरी कहानी सुनाई (ETV Bharat)

भोपाल में चल रहे भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल की एक शाम गुरुदत्त के नाम हुई. गुरुदत्त वो नाम दुनिया के हिंदी सिनेमा में भारत की पहचान बना फौजिया उस नामकरण के साथ शुरु करती है दास्तान और फिर गुरुदत्त की जिंदगी की शुरुआती मुश्किलें. उनसे जूझने जीतने का जज़्बा और जो चाहिए उसे पा लेने की ज़िद. कलकत्ता से शुरु हुई कहानी में मुंबई का ब्रेक. देवानंद से मुलाकात और कमीजों की अदल बदल. इस दास्तान में कॉमेडी भी थी और रुमानियत भी.

फौजिया दास्तान की शुरुआत कुछ यूं करती है, जिसका आशिक तमाम आलम है , जितनी तारीफ कीजिए कम है आज हम कर रहे हैं उसको याद उसके जैसे हुआ ना उसके बाद. जिसने छेड़ी थी कैमरे पर गज़ल. है गुरुदत्त उस चराग का नाम. फौजिया कहती हैं, जो गुरुदत्त एक फिल्मकार नहीं एक अदाकार नहीं बल्कि एक शायर थे रीलों पर उदासी की गज़ल कहने का हुनर जानते थे.

GURU DUTT LIFE STORY
भोपाल में चल रहे भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में एक शाम गुरुदत्त के नाम (ETV Bharat)

चिड़ियों की तस्वीरें उतारते गुरुदत्त जब आत्मा के गीत पर नाचे

फौजिया की दास्तानगोई की शुरुआत गुरुदत्त की पैदाइश के दिन से होती है नौ जुलाई का दिन. वो बताती हैं कि कैसे वसंती और शिवशंकर के बेटे के दो नाम रखे जा रहे थे और फिर आखिरकार गुरुदत्त नाम रखा गया. कैसे बीबी बेनेगल जो रिश्ते में गुरुदत्त के मामा थे उनके पहले गुरु बने. कैसे उन्होxने कैमरे से गुरुदत्त की चाहत को पहचाना और फिर वो वाकया जब वे गुरुदत्त को लेकर ईडन गार्डन गए और आत्मा के सुरों पर नाचते गुरुदत्त को उन्होने कैमरे में कैद किया.

यहां से कोरिगोग्राफर गुरुदत्त का जन्म होता है. कैसे बेनेगल ने उनके भीतर छिपे कलाकार को बचपन में ही पहचान लिया था. हर इतवार को नानी के साथ ट्राम में बैठकर मामा के घर जाना और एसडी बर्मन के गाने बार बार बजाना. कैमरा उठाकर चिड़िया घर जाना, जानवरों की तस्वीरें खींचते खींचते हुए कहना एक दिन मैं भी फिल्म बनाऊंगा.

फौजिया किस्सों में बयानी करते कहती हैं, बैनेगल की दुनिया में ख्वाब देखने की इजाजत थी. बेनेगल के कैमरे में नौजवान गुरुदत्त की आजादी का रक्स था. फौजिया ने गीता दत्ता से उनके प्रेम शादी और फिर वहीदा रहमान को लेकर उड़ी अफवाहों तक हर हिस्सा शामिल किया. और वो रात भी जब अपने फ्लैट पर नींद की ज्यादा गोलियां खाकर कमरा बंद करके ऐसे सोए गुरुदत्त की फिर वो दरवाज़ा खुद खोलने के लिए नहीं उठे.

'गुरुदत्त मेरे लिए एक्टर नहीं एक सॉलिड इमोशन थे'

गुरुदत्त की दास्तानगोई के एस प्रोजेक्ट के प्रोड्यूसर विकास कहते हैं " गुरुदत्त बचपन से मेरे ज़हन में हमेशा से कनेक्शन महसूस होता है. वो एक एक्टर नहीं थे सिनेमा डायरेक्टर नहीं वो एक सोलिड इमोशन है, मैं ऐसा मानता हूं. बताइए किसी औपचारिक ट्रेनिंग के बिना उन्होंने 39 साल की छोटी जिंदगी में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को क्या क्या नहीं दे दिया."

'मेरा मकसद इस दास्तान के बाद आप गुरुदत्त को जानें '

फौजिया कहती हैं कि "हमारी कोशिश ये है कि आप इस दास्तान को सुनने के बाद गुरुदत्त जैसी शख्सियत के बारे में जाने. खासतौर पर नई पीढ़ी जो है. उससे मेरी दरख्वास्त है. एक बार कमानी में हमारे शो के बाद एक नौजवान ने आकर पूछा गुरुदत्ता क्या संजय दत्त के दादा हैं. तो खास तौर पर नई जनरेशन हमारे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के इस सितारे के बारे में जाने जो बेशक कम उम्र में चला गया लेकिन एक लंबी लकीर खींच कर."

Last Updated : January 10, 2026 at 11:16 PM IST