क्या Gay था बाबर! बाबरी लड़के से था आकर्षित, 'बाबर द क्वेस्ट' के लेखक का किताब में दावा
विवादों में बाबर द क्वेस्ट बुक, भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में रद्द हुआ राइटर आभाष का सत्र, ईटीवी भारत से बात में बताया बुक का सच.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 11, 2026 at 8:23 AM IST
|Updated : January 12, 2026 at 4:37 PM IST
भोपाल: बाबर द क्वेस्ट फॉर हिंदुस्तान के लेखक आभास मालधियार का सत्र भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल में रद्द किए जाने के बाद उन्होंने अपनी किताब से जुड़े पहलुओं पर ईटीवी भारत से खुलकर बात की. आभास ने कहा कि मेरी किताब में मुगल शासक बाबर से जुड़े वो तथ्य हैं, जो ये बताते हैं कि वो हिंदुस्तान से कितनी नफरत रखता था. किस तरह से उसने भारत पर लगातार हमले किए और और वो भारत का इस्लामीकरण करना चाहता था. आभास ने कहा कि 'द क्वेस्ट' के मायने भारत को पा लेने के उसकी डिजायर, उसकी ख्वाहिश से है. मैंने और मेरे पब्लिशर ने बहुत सोच विचार के बाद ये नाम रखा. वो तैमूर के सपने को पूरा करना चाहता था.
मेरी किताब के टाइटल को गलत समझा गया
राइटर आभास ने कहा "मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि इस तरह का विवाद होगा. उन्होंने कहा मैं विवाद में जाता ही नहीं हूं. इस किताब का जो टाइटिल है, उसमें भाषा की समझ में कुछ इश्यू हुआ है. इस किताब में 'क्वेस्ट' का मतलब 'चाहत', डिजायर है. जिसमें वो हिंदुस्तान को पाना चाहता था. उसने हिंदुस्तान को पाने के लिए 5 बार प्रयास किए थे. बाबर हिंदुस्तान पर कब्जा करना चाहता था, तैमूर के सपने को पूरा करने चाहता था. वो चाहता था कि भारत का इस्लामीकरण हो जाए. तो ये जो उसकी क्वेस्ट थी, उसी को मैंने इस किताब में लिखा है. मुझे नहीं लगता कि इस पर कोई विवाद होना चाहिए.
बाबर बाबरी नाम के एक लड़के से हुआ आकर्षित
आभास कहते हैं, बाबर बाबरी नाम के एक लड़के से आकर्षित होता था. उसका गे पार्टनर था. इसका खुलासा पहली बार वो अपने निकाह के वक्त करता है. ये एक लड़का जिसका नाम बाबरी है. बाबरनामा में इसका डॉक्यूमेंटेशन भी है, कि किस तरह से वो बाबरी नाम के लड़के से अट्रेक्ट यानि आकर्षित हुआ था. अपनी पहली पत्नी आयशा के पास नहीं जाना चाहता था. फिर उसकी दादी, नानी और मां वंश बढ़ाने के लिए फोर्स करती थीं.
तब इस दबाव के बाद वो अपनी पत्नियों के साथ रहना शुरू करता है. यहीं से ये एस्टबलिश होता है, कि वो गे था. आभास कहते हैं मैंने इस किताब में ये भी बताया है कि कैसे मुगलकाल में भारत में गरीबी बढ़ गई थी. मुगल काल में जीडीपी गिरती चली गई.
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मेरी किताब में बाबर के जिहाद की कहानी
आभास कहते हैं, मैं किसी भी आलोचना के लिए तैयार हूं. अगर मैने पुस्तक में कहीं महिमा मंडन किया है तो बताया जाए. क्योकि ऐसा है नहीं. मैने फैक्ट्स के आधार पर लिखा है कि बाबर को हदुस्तान से नफरत थी. यहां पर वो दारुल इस्लाम एस्टबलिश करना चाहता था. ये और बात है कि वो ज्यादा जीया नहीं. चार साल में भारत से भी चला गया. मुझे दिक्कत ये है कि बिना किताब को पढ़े हुए ओपिनियन बना ली गई. देश के लिए आप अच्छा सोच रहे हैं तो मैं भी सोच रहा हूं.

