विधानसभा के पटल पर लाड़ली लक्ष्मी योजना की हकीकत, आंकड़े देख सरकार भी चकराई
मध्य प्रदेश में 2007 में शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना अपने मकसद में नाकाम. 80 प्रतिशत बेटियां बीच में ही छोड़ रहीं स्कूल.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 24, 2026 at 1:52 PM IST
भोपाल : मध्य प्रदेश में बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा के उद्देश्य से शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना के बावजूद 80 प्रतिशत लड़कियां कक्षा 12वीं तक नहीं पहुंच पा रही हैं. विधानसभा के बजट सत्र में एक सवाल के जवाब में महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए. आंकड़े देखकर सरकार भी हैरान रह गई. इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन में हंगामा किया. लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी बड़ी संख्या में बेटियां स्कूल से ही पढ़ाई छोड़ रही हैं.
साल 2010-11 में पहली कक्षा में शामिल 11.07 लाख बच्चियों में से केवल साल 2021-22 तक 3.44 लाख छात्राएं ही 12वीं कक्षा तक पहुंच सकी. ये करीब 30 फीसदी है. साल 2025 कि बात करें तो यह आंकड़ा गिरकर 19.97 प्रतिशत तक पहुंच गया.
19 साल में 52.2 लाख लड़कियों का पंजीयन
महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में बताया "वर्ष 2007 से 2025 तक कुल 52.2 लाख बेटियों का पंजीयन हुआ. वर्ष 2012 में सर्वाधिक 3 लाख 54 हजार 271 पंजीयन हुए. 2021 में 3 लाख 44 हजार 649 और 2025 में 2,72,006 बेटियों का नामांकन हुआ. इसके बावजूद 2025-26 तक पात्र 26.13 लाख लाड़ली लक्ष्मियों में से केवल 13.68 लाख यानी 52.35 प्रतिशत ने ही छठी कक्षा में प्रवेश लिया. नौवीं में यह प्रतिशत घटकर 42.21 रह गया."

20 प्रतिशत बेटियों को ही मिलेंगे एक लाख रुपये
विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार स्नातक स्तर पर यह आंकड़ा 5.83 प्रतिशत और स्नातकोत्तर में मात्र 0.33 प्रतिशत है. यानि जो लाडली लक्ष्मी में पंजीयन हो रहे हैं, उसमें से एक प्रतिशत बच्चियां भी पोस्ट ग्रेजुएशन तक नहीं पहुंच पाती हैं. ऐसे में कुल पंजीकृत बेटियों में से केवल लगभग 20 प्रतिशत को ही 1 लाख रुपये की अंतिम प्रोत्साहन राशि मिल पाएगी.
पहले बैच की 1477 लड़कियों को ही मिलेंगे एक लाख
साल 2010-11 में पहली कक्षा में 23.38 लाख बच्चे थे. इनमें 11.07 लाख लड़कियां लाड़ली लक्ष्मी योजना में शामिल थीं. लेकिन 2021-22 में 12वीं तक पहुंचने वाली बेटियों की संख्या केवल 3.4 लाख रही. यानी लगभग 30 प्रतिशत ही अंतिम कक्षा तक पहुंच सकीं. योजना के शुरुआती वर्ष यानि 2007 में लगभग 40 हजार 854 बच्चियों का पंजीयन हुआ था. लेकिन उनमें से केवल 1477 बेटियां ही 12वीं तक पहुंच पाईं.अब तक 52.2 लाख बेटियों का पंजीयन हो चुका है. इनमें से 12.35 लाख को स्कूल स्तर पर छात्रवृत्ति दी गई है. छात्रवृत्ति पर अब तक 565 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.
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इस तरह मिलता है लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ
2007-08 से 2010-11 के बीच पंजीकृत 7.46 लाख बेटियों पर लगभग 7400 करोड़ रुपये खर्च होंगे. वहीं 2011-12 में पंजीकृत 3.80 लाख बेटियों के लिए 3800 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी. इस योजना के तहत छठी कक्षा में 2 हजार रुपये, नौवीं में 4 हजार रुपये, 11वीं और 12वीं में 6-6 हजार रुपये, कॉलेज में 25 हजार रुपये और 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1 लाख रुपये दिए जाते हैं.

