ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से गमज़दा शिया समाज, नहीं मनाएगा ईद
भोपाल में खामेनेई की मौत से दु:खी शिया मुसलमान नहीं मनाएंगे ईद, संगठनों ने सादगी और शोक के साथ नमाज पढ़ने का किया ऐलान.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 6:36 PM IST
|Updated : March 2, 2026 at 7:15 PM IST
रिपोर्ट: आबिद मुमताज
भोपाल: अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में देश के अगल-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किया गया. उनकी हत्या से शिया समुदाय गहरे सदमे में है. मध्य प्रदेश के कई शहरों में भी गम का माहौल देखा जा रहा है. भोपाल में शिया मुसलमान ईद नहीं मनाएंगे, संगठनों ने सादगी और शोक के साथ नमाज पढ़ने का फैलसा किया है.
पारंपरिक रस्मों से किया जाएगा परहेज
अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत से शिया समुदाय गमगीन है. शिया समुदाय ने इस बार ईद नहीं मनाने का फैसला किया है. शिया धर्मगुरू मौलाना अजहर हुसैन जैदी ने कहा, "ईद की नमाज अदा की जाएगी, लेकिन त्योहार की रौनक और रस्मों में कटौती की जाएगी. नए कपड़े पहनने और घरों में पारंपरिक सिवइयां सहित अन्य पकवान बनाने से परहेज किया जाएगा. रमजान के पवित्र महीने में हुई इस घटना ने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है."
तीन दिवसीय शोक की घोषणा
प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर में शोक सभाएं और मातमी जुलूस निकाले जा रहे हैं. भोपाल के करोंद क्षेत्र स्थित शिया जामा मस्जिद के इमाम अजहर हुसैन रिजवी ने कहा, "हम एक ऐसे नेतृत्व को याद कर रहे हैं, जो अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए जाना जाता था. ऐसे व्यक्तित्व की शहादत केवल एक देश का नहीं, बल्कि पूरी उम्मत का नुकसान है. भोपाल में तीन दिवसीय शोक की घोषणा की गई है. साथ ही हमने लोगों से अपने खुशियों में कटौती करते हुए गम में शरीक होने की अपील की है."
उम्मत-ए-मुसलमान खुद को यतीम महसूस कर रही
वहीं, इमाम रिजवी ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों पर चिंता जताते हुए कहा, "आम इंसान जंग नहीं, बल्कि अमन और शांति चाहता है, लेकिन इजरायल और अमेरिका फिलिस्तीन के साथ क्या कर रहा है वह सबको दिख रहा है." भोपाल के नायब शहर काजी मौलाना अली कदर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "सिद्धांतों के लिए जान देने वाले लोग इतिहास में हमेशा याद रखे जाते हैं."

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नायब शहर काजी मौलाना अली कदर ने शहीद-ए-आजम भगत सिंह और टीपू सुल्तान का जिक्र करते हुए कहा, " विचारों में मतभेद संभव हैं, लेकिन कुर्बानी देने वालों का जिक्र सम्मान के साथ किया जाता है. शहादतें समाज को सब्र, हिम्मत और संघर्ष का संदेश देती हैं." शिया मुसलमानों ने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई की शहादत से उम्मत-ए-मुसलमान खुद को यतीम महसूस कर रहा है. शहादत किसी भी विचारधारा को कमजोर नहीं करती, बल्कि उसे और मजबूत बनाती है.

