बुजुर्ग दंपती को 3 माह तक किया डिजिटल अरेस्ट, गहने गिरवी रख 22 लाख खातों में भेजे
भोपाल के बुजुर्ग दंपती के साथ सायबर ठगी. मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी की धमकी दे दबाव बनाया. आबिद मुमताज की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 27, 2026 at 3:37 PM IST
भोपाल : राजधानी में बुजुर्ग दंपती से सायबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. कोलार में रहने वाले दंपती को सायबर ठगों ने 96 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा. ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी, चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी दी. डर के कारण दंपती ने अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपये जुटाए और ठगों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में जमा कर दिए. रकम देने के बाद भी जालसाज लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी करते रहे.
गिरफ्तारी वारंट का झांसा दे धमकाया
पुलिस के मुताबिक कोलार इलाके के कृष्णा कॉम्प्लेक्स, गणपति एन्क्लेव निवासी सुवर्णा लक्ष्मी और नरसिम्हा राव मूल रूप से आंध्र प्रदेश के पलनाडू जिले के रहने वाले हैं. ये लोग फरवरी में अपने शहर गए थे. 19 मई को सुवर्णा लक्ष्मी के मोबाइल पर कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का पुलिस अधिकारी मिस्टर खन्ना बताया और कहा "उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है. दिल्ली में केनरा बैंक खाते से नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है."
वीडियो कॉल पर पूछताछ, फर्जी जज ने दी धमकी
इसके बाद ठगों ने दंपती को वीडियो कॉल पर पूछताछ के नाम पर अपने नियंत्रण में ले लिया. उन्हें किसी से बात करने और घर से बाहर निकलने से मना किया गया. 21 मई को खुद को चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताने वाली एक महिला ने दंपती से उनके बैंक खातों और अन्य वित्तीय जानकारी ली. अगले दिन दंपती की वीडियो कॉल के जरिए एक फ़र्ज़ी जज से बात कराई गई.
उसने दंपती के आधार कार्ड की जानकारी दिखाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने और संपत्ति सीज करने की धमकी दी. 9 जून को कथित जज ने संपत्ति सीज करने का आदेश सुनाने का दावा किया. इसके बाद निशा पटेल नाम की महिला ने दंपती को भोपाल लौटने के लिए कहा.

जेवर गिरवी रखकर जुटाए 22 लाख रुपये
ठगों ने दंपती से कहा "मामला खत्म कराने के लिए उन्हें अपनी एफडी और जेवर बेचने या गिरवी रखने होंगे." इसके बाद दंपती 10 जून को आंध्र प्रदेश से रवाना हुए और 11 जून को भोपाल पहुंचे. 12 जून को उन्होंने अपने जेवर गिरवी रखकर करीब 22 लाख रुपये जुटाए. ठगों के निर्देश पर यह रकम अलग-अलग बैंक खातों में 5 बार में जमा की गई. आरोपियों ने 7 अलग-अलग WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल किया.
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22 लाख ठगने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ा
हैरानी की बात यह है कि 22 लाख रुपये देने के बाद भी ठगों ने दंपती को डिजिटल अरेस्ट से मुक्त नहीं किया. उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने और निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया. पुलिस के अनुसार, 19 मई से 23 अगस्त तक करीब 96 दिनों तक दंपती ठगों के संपर्क में रहे. इस दौरान लगातार वीडियो कॉल के जरिए उनकी निगरानी की जाती रही. बाद में दंपती को संदेह हुआ. उन्होंने मामले की जानकारी जुटाई तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट के नाम पर दिखाया गया कथित आदेश फर्जी था. इसके बाद उन्हें सायबर ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की.
27 अगस्त को FIR दर्ज, जांच शुरू
दंपती ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत की जांच के बाद 27 अगस्त को FIR दर्ज की गई. इसके बाद केस डायरी कोलार थाने भेजी गई. कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी ने बताया "पुलिस अब आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए सात WhatsApp नंबरों, वीडियो कॉल और 5 अलग-अलग बैंक खातों में हुए लेनदेन की जांच कर रही है. आरोपियों की पहचान और उनके बैंक खातों तक पहुंचने के लिए पुलिस तकनीकी जांच भी कर रही है."

