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E-FIR के 3 दिन में पहुंचना होगा साइबर सेल, वरना बढ़ जाएंगी आपकी मुश्किलें

मध्य प्रदेश में ई एफआईआर दर्ज कराने वालों को थाने में पहुंचकर 3 दिन में दर्ज कराना होगा बयान, नहीं पहुंचने पर जारी होगा नोटिस.

BHOPAL E ZERO FIR FOR CYBER FRAUD
E-FIR के 3 दिन में पहुंचा होगा साइबर सेल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 6, 2026 at 5:21 PM IST

2 Min Read
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भोपाल: यदि साइबर अपराध घटित होने पर आपने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ई जीरो एफआईआर दर्ज कराई है तो अब शिकायत के तीन दिन के अंदर संबंधित थाने पर पहुंचकर बयान दर्ज कराना होगा. ई-एफआईआर की पेंडेंसी को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने इसमें बयान की समय सीमा तय कर दी है. अब यदि शिकायतकर्ता द्वारा ई एफआईआर के बाद तीन दिन के अंदर संबंधित थाने पर पहुंचकर बयान दर्ज नहीं कराया तो संबंधित को नोटिस जारी कर बुलाया जाएगा. नोटिस के तीन दिन बाद भी यदि शिकायतकर्ता थाने नहीं पहुंचा तो शिकायत को निरस्त कर दिया जाएगा.

रेंज के डीआईजी करेंगे मॉनिटरिंग

बीएनएसएस की धारा 173 के तहत जीरो एफआईआर को कानूनी मान्यता दे दी गई है. इसके तहत यदि एक लाख रुपए से अधिक की किसी के साथ वित्तीय धोखाधड़ी हुई तो फरयादी ऑनलाइन तरीके से ई जीरो एफआईआर दर्ज करा सकता है. ताकि ऑनलाइन ठगी से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई की जा सके और वित्तीय हानि को कम से कम किया जा सके. ई एफआईआर दर्ज कराते ही शिकायत भोपाल के केंद्रीय साइबर पुलिस को पहुंचती है.

इसके बाद इस पर कार्रवाई शुरू की जाती है, लेकिन अब ऐसे सभी ई एफआईआर के मामलों की संबंधित रेंज के डीआईजी को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं. इसमें डीआईजी जोन रेंज, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त क्राइम भोपाल और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त क्राइम इंदौर को अपने-अपने क्षेत्रों में नोडल अधिकारी बनाया गया है.

तीन दिन में दर्ज कराना होगा बयान

पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि "नोडल अधिकारियों को हर माह राज्य साइबर मुख्यालय को ई जीरो एफआईआर की रिपोर्ट भेजनी होगी. इसमें यह भी बताना होगा कि ई जीरो एफआईआर में शिकायत के बाद कितने शिकायतकर्ता द्वारा उपस्थित होकर बयान दर्ज कराए गए. कितने शिकायतकर्ताओं को नोटिस जारी किए गए और कितनी शिकायतों को निरस्त किया गया. किसी मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक मामले की जांच करा सकते हैं और संबंधित मामले में एसआईटी का भी गठन किया जा सकता है.