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ओझा सर के स्टूडेंट्स का जलवा, तेलंगाना के चीफ सेक्रेटरी से लेकर स्विट्जरलैंड में हैं राजदूत

भोपाल के कैंपियन स्कूल के रिटायर्ड शिक्षक अरुण कुमार ओझा के पढ़ाए स्टूडे्ंट्स ने देश-विदेश में लहराया परचम. शिफाली पांडे की रिपोर्ट.

BHOPAL CAMPION SCHOOL TEACHER STORY
ओझा सर के स्टूडेंट्स तेलंगाना से लेकर स्विट्जरलैंड तक (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 20, 2026 at 8:53 PM IST

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Updated : August 20, 2026 at 10:43 PM IST

7 Min Read
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भोपाल: 1969 का साल है, सात जुलाई का दिन. ओझा सर पहली बार क्लास मे आए हैं. ग्याहरवीं तक के उस स्कूल में कैमेस्ट्री के टीचर. स्टूडेंट 16 साल के हैं और अरुण कुमार ओझा 23 साल के. यानि स्टूडेंट और टीचर के बीच कुल सात साल का फासला. ओझा सर यादों में क्लासरुम में चले जाते हैं और फिर कहते है, स्विट्जरलैंड में राजदूत बने सुबेन्दू बागची, तेलंगाना के चीफ सेक्रेटरी संजय जाजू, एयर वाइस मार्शल से रिटायर हुए मनमोहन बहादुर मेरे ये स्टूडेंट्स उसी समय अपनी चमक से बता रहे थे कि इनका मुस्तकबिल कितना रोशन होने वाला है.

ओझा सर भोपाल के पहले बॉयज स्कूल कैम्पियन स्कूल के शुरुआती टीचर्स में से एक थे. ओझा सर की क्लास से निकले स्टूडेंट आज भारत के साथ दुनिया के अलग अलग हिस्से में झंडा गाड़ रहे हैं. एक ऐसे टीचर जिनके हाथों से हर बार कोई हीरा ही तराशा गया.

रिटायर्ड शिक्षक अरुण कुमार ओझा (ETV Bharat)

ओझा सर के स्टूडेंट्स तेलंगाना से लेकर स्विट्जरलैंड तक

81 बरस के अरुण कुमार ओझा कैम्पियन स्कूल से रिटायर हो गए लेकिन टीचिंग से नहीं. 60 साल से ज्यादा वक्त गुजर गया लेकिन अरुण कुमार ओझा से क्लासरुम नहीं छूटा. पर वो क्लास छूट गई जिसे वो सबसे ज्यादा मिस करते हैं. कैम्पियन स्कूल के पहले दशक में निकले वो स्टूडेंट जिन्होंने बताया कि ओझा सर क्या हैं. हर नाम उनकी जुबान पर है. ओझा सर जब वो नाम लेते हैं तो उनकी चश्में से झांकती आंखों में चमक आ जाती है.

OJHA SIR STUDENTS CAMPION SCHOOL
पुराने स्टूडेंट्स के साथ ओझा सर (ETV Bharat)

मनमोहन बहादुर एयर वाइस मार्शल से रिटायर हुए मेरे स्टूडेंट रहे हैं. मेजर जनरल राजीव नारायण, कांग्रेस के लीडर अजय सिंह, स्विटजरलैंड में जो अभी भारत के राजदूत हैं सुबेन्दू बागची ये मेरे स्टूडेंट है. अनिल वाधवा इटली में भारत के राजदूत रहे हैं. इनके अलावा आईएएस जो मेरी क्लास के बच्चे बने हैं, उनमें दिलीप सिंह चौधरी, मनीष रस्तोगी, मनीष सिंह, प्रवल सिपाहा ये सब मेरी क्लास के मेरे हाथ से निकले स्टूडेंट हैं.

'जिंदगी में आगे बढ़ने का हौसला उन्हीं से मिला'

रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल मनमोहन बहादुर ओझा सर की याद करते 1966 के साल में चले जाते हैं. वे कहते हैं, "मैं छठवी से कैम्पियन में पढ़ा था. मिसेज ओझा और मिस्टर ओझा दोनों को कभी नहीं भुला सकते, वो कैमेस्ट्री पढ़ाते थे और बहुत स्ट्रिक्ट थे. उनका वही अनुशासन मुझे यहां तक लाया. वैसे तो सभी टीचर्स का हमारे बनने में योगदान होता है लेकिन ओझा सर खास हैं."

तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू ने कहा, "ओझा सर मेरे अब तक के सबसे अच्छे टीचर रहे हैं. मेरी तरक्की में उनका बहुत बड़ा योगदान है. केमिस्ट्री पढ़ाने के दौरान सर असल जिंदगी के उदाहरण देकर पढ़ाते थे."

TELANGANA CS SANJAY JAJU
ओझा सर के साथ तेलंगाना के चीफ सेकेट्री संजय जाजू (ETV Bharat)

'फेयरवेल में ऐसे रोते थे जैसे बेटी विदा हो रही'

ओझा सर फेयरवेल के दिन की याद करते हैं. मैं आज भी जब उस दिन को याद करता हूं तो भावुक हो जाता हूं. सारे बच्चे ऐसे गले मिलते थे फेयरवेल में कि जैसे बेटी विदा हो रही हो. रोते-रोते कहते थे सर जा रहे हैं. लेकिन खास बात ये है कि क्लासरुम छूटने के बाद आज 60 साल बाद भी ये मेरे स्टूडेंट मुझसे जुड़े हुए हैं.

वे स्कूल का ही एक वाकया बताते हैं, कैसे स्टूडेंट्स और मैनेजमेंट के लिए वे अपरिहार्य हो गए थे. वे कहते हैं, "मैं कैम्पियन की जगह किसी और स्कूल में जा रहा था. लेकिन प्रिसिंपल ने मुझे रोक लिया कहा कि आपका विकल्प ही नहीं है हमारे पास. आप नहीं जा सकते. बस उस दिन के बाद से 2006 तक कैम्पियन में काम करता रहा. ये फार्मेली रिटायरमेंट था लेकिन उसके बाद भी वहां पढ़ाता रहा और अब तक में मैंटर बतौर क्लासरुम से जुड़ा हुआ हूं."

ओझा सर और सुमन मैम का घर बच्चों का दूसरा घर था

ओझा सर की पत्नी सुमन भी उसी स्कूल में प्राइमरी विंग मे पढ़ाया करती थीं. वे स्कूल में फर्स्ट एड की इंचार्ज थी. सुमन याद करती हैं, "ओझा सर के स्टूडेंट्स को चोट लगती थी तो वो मेरे पास ही आते थे. किसी का घुटना छिल गया किसी को चोट लग गई. मैं फूंक देती थी उनके घाव पर तो वो कहते थे मैम ठीक हो गया. हमारा घर उनका दूसरा घर था. बच्चे आधी छुट्टी में हमारे घर लंच करने भी चले जाया करते थे."

Arun Kumar Ojha with wife Suman Ojha
अरुण कुमार ओझा अपनी पत्नी सुमन ओझा के साथ (ETV Bharat)

'कैमेस्ट्री के वायवा में पूछा अंबाला कहां है बताओ'

रिटायर्ड कर्नल प्रवीण मंडरोत्रा ओझा सर के ब्राइट स्टूडेंट्स में से एक हैं. वे कहते हैं, "हम तो उनके आगे धूल हैं, जो कुछ आज हैं वो ओझा सर की बदौलत हैं. वो हमारे दोस्त भी थे और टीचर भी. मुझे याद है कि कैमेस्ट्री का वायवा था हमारा. सर ने मुझसे पूछा कि ये बताओ अम्बाला कहां है.

असल में मेरा जीके बहुत स्ट्रांग था. हम तो सर से पैसे लेकर पिक्चर देखने भी चले जाया करते थे. उन जैसा टीचर मिलना मुश्किल है. मेरे बड़े भाई प्रेम मंडरोत्रा ब्रिग्रेडियर होकर रिटायर हुए, हम दोनों ओझा सर के ही स्टूडेंट्स थे. आप सोचिए हम 32 किलोमीटर दूर डिफेंस एरिया से वहां पढ़ने आते थे. हमारे लिए ओझा सर फैमिली थी और पैरेंट्स की तरह थे. 42 साल हो गए. आज भी गुडमार्निंग मैं सर को ही सबसे पहले करता हूं."

SWITZERLAND AMBASSADOR SUBENDU
पुराने स्टूडेंट्स के साथ ओझा सर (ETV Bharat)

'ओझा सर ने जिंदगी की इक्वेशन्स भी सिखाई'

मध्य प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा विभाग में कमिश्नर प्रबल सिपाहा भी ओझा सर के स्टूडेंट रहे हैं. वे कहते हैं, "ओझा सर से जो सबक हमें मिले उसमें सबसे पहला था अनुशासन. जो बहुत सख्त था. उसी की बदौलत हम आज तक परफार्म कर पाए है.

खास बात ये है कि इतने सारे टीचर्स ने पढ़ाया लेकिन कैमेस्ट्री की इक्वेश्न्स आज भी याद हैं. कैमिकल कम्पाउंड याद है. वो जिस तरह से पढ़ाते थे उसका कोई सानी नहीं. क्लासरुम में पढ़ाई के अलावा भी वे ऐसी बातें कह देते थे जो हमारे लिए लाइफ स्किल थीं और बहुत सामान्य रुप से वे ये कह देते थे."

'शरारत की इजाजत थी अभद्र होने की नहीं '

सरगुजा की रायल फैमिली से जुड़े हुए अरुणेश्वर सिंह देव कहते हैं, ओझा सर ने हमें दुनियादारी बहुत सिखाई. हमें शरारत करने की अनुमति थी लेकिन अभद्र होने की नहीं. जो दुनिया दारी उन्होंने हमें सिखाई, जो कॉन्फिडेंस हमें दिया वो आज तक काम आ रहा है.

रेड रोज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के ओनर सुमित पोडा भी ओझा सर के स्टूडेंट्स रहे हैं. सुमित कहते हैं, "ओझा सर को शब्दों में नहीं समेटा जा सकता. हर प्रकार से हमें गाईड करते रहे. उन जैसे टीचर्स अब मिलना ही बंद हो गए हैं."

Last Updated : August 20, 2026 at 10:43 PM IST