भोपाल के इंजीनियर का नासा में डंका, चांद पर माइनिंग के लिए बनाया रोवर, मिला अवॉर्ड
भोपाल के बीटेक स्टूडेंट जयादित्य मालवीय ने चंद्रमा पर ड्रिलिंग के लिए तैयार किया रेगोलिथ माइनिंग रोवर. कैनेडी स्पेस सेंटर से मिला अवॉर्ड.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 31, 2025 at 9:37 PM IST
भोपाल: चंद्रमा पर भविष्य में संसाधनों के उपयोग की दिशा में नासा लगातार नई तकनीकों पर काम कर रहा है. इसी कड़ी में चांद पर माइनिंग के लिए बनाए गए एक अत्याधुनिक रोवर के डिजाइन और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में भोपाल के युवा इंजीनियर जयादित्य मालवीय ने अहम भूमिका निभाई है. उनके इस योगदान के लिए नासा ने उन्हें दूसरी बार प्रतिष्ठित अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया है. इससे पहले भी जयादित्य नासा की वेबसाइट में मौजूद गंभीर साइबर सिक्योरिटी खामियों को उजागर कर चुके हैं.
चांद पर माइनिंग के लिए तैयार किया खास रोवर
एलएनसीटी कॉलेज भोपाल से बीटेक के चौथे वर्ष के छात्र जयादित्य मालवीय ने बताया कि "चंद्रमा पर माइनिंग के लिए जमीन पर इस्तेमाल होने वाली जेसीबी या पोकलेन जैसी मशीनें काम नहीं कर सकतीं. इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए रोवर भेजे जाते हैं, जो चंद्र सतह पर जाकर ड्रिलिंग, मिट्टी का परीक्षण और खनिजों की पहचान करते हैं." नासा के मार्गदर्शन में वैश्विक स्तर पर बनी इंजीनियर्स की टीम ने ऐसा ही एक रेगोलिथ माइनिंग रोवर डिजाइन किया है, जिसमें सॉफ्टवेयर और सिस्टम इंटीग्रेशन का जिम्मा जयादित्य के पास था.
'सिक्योरिटी और ऑप्टिमाइजेशन पर दिया विशेष जोर'
जयादित्य मालवीय ने बताया कि "चंद्रमा माइनिंग रोवर में उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वह बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण थी. इसलिए शुरुआत से ही उन्होंने ऐसी प्रोग्रामिंग पर काम किया, जो पूरी तरह सुरक्षित हो. उनका मुख्य उद्देश्य यह था कि अंतरिक्ष से पृथ्वी तक आने वाले संवेदनशील डेटा को बीच में हैक न किया जा सके."
जयादित्य ने बताया कि "मौजूदा समय में साइबर हैकिंग एक बड़ी चुनौती बन चुकी है. इसी को ध्यान में रखते हुए रोवर के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के दौरान सिक्योरिटी और ऑप्टिमाइजेशन पर खास फोकस किया गया." उन्होंने ऐसा रेगोलिथ माइनिंग सिस्टम विकसित किया, जिसमें डेटा कम्युनिकेशन पूरी तरह सुरक्षित रहे, किसी तरह का गैप न आए और सिस्टम में लैक की संभावना न के बराबर हो."

रोवर प्रोजेक्ट में जयादित्य की अहम भूमिका
जयादित्य ने बताया कि "उनकी टीम में शामिल अन्य सदस्य विभिन्न देशों से थे, जिन्होंने रोवर का हार्डवेयर सिस्टम तैयार किया. वहीं उनका मुख्य रोल सिस्टम प्लानिंग, कंट्रोल लॉजिक तैयार करने और रोवर की विभिन्न उप-प्रणालियों के बीच समन्वय स्थापित करने का था. पूरी टीम के उत्कृष्ट तकनीकी प्रदर्शन और बेहतरीन टीमवर्क के आधार पर नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर द्वारा टीम को प्रतिष्ठित ग्रुप अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया."
जयादित्य ने कहा कि "एक भारतीय छात्र के रूप में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से पहचान मिलना उनके लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है."

स्पेस में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए बनाई भारतीय कम्युनिटी
जयादित्य ने बताया कि "अब तक उन्हें जो भी अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिले हैं, वे भारत के बाहर के प्लेटफॉर्म्स से प्राप्त हुए हैं. जबकि भारत में भी बड़ी संख्या में युवा अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक में रुचि रखते हैं, लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन और प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता.
इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर आईएसए (इंटरस्टेलर स्पेस टेक एस्ट्रोनॉमी) नामक एक भारतीय अंतरिक्ष कम्युनिटी की स्थापना की है. इस कम्युनिटी का उद्देश्य भारतीय छात्रों को मार्गदर्शन, तकनीकी अवसर और वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने का मंच प्रदान करना है, ताकि वे अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार कर सकें."
चांद पर माइनिंग के लिए अहम साबित होगा यह रोवर
नासा की लुनाबोटिक्स माइनिंग प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों को भविष्य के चंद्रमा, अन्वेषण और अंतरिक्ष संसाधनों के उपयोग से जुड़े मिशनों के लिए तैयार करना है. इस प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के छात्र ऐसी प्रणालियों का डिजाइन और सिमुलेशन करते हैं, जो चंद्रमा जैसी परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम कर सकें. इसमें खासतौर पर चंद्रमा की मिट्टी यानी रेगोलिथ के खनन, सिस्टम इंजीनियरिंग और मिशन आधारित समस्या समाधान पर ध्यान केंद्रित किया जाता है.
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जयादित्य के सुझावों पर नासा करेगी तकनीकी सुधार
20 वर्षीय जयादित्य मालवीय भोपाल के एलएनसीटी कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने नासा से कई सर्टिफिकेट कोर्स किए हैं और विशेष तकनीकी ट्रेनिंग भी ली है. जयादित्य ने बताया कि उन्होंने नासा की वेबसाइट में साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कुछ गंभीर खामियों की पहचान कर उसकी रिपोर्ट नासा को सौंपी थी. इसके साथ ही अपने एल्गोरिद्म और रिसर्च पोस्ट भी साझा किए. नासा प्रबंधन ने उनके सुझावों को स्वीकार करते हुए कहा है कि भविष्य में आने वाली नई सैटेलाइट प्रणालियों में जयादित्य की कोडिंग और एल्गोरिद्म का उपयोग किया जाएगा. इसके लिए नासा ने उन्हें आधिकारिक प्रमाणपत्र भी प्रदान किया है.

