मोहन यादव का नया मास्टर स्ट्रोक, टंट्या मामा के बाद अब भीलट देव, 2028 पर नजर
मध्य प्रदेश में आदिवासी वोट बैंक पर कब्जा करने बीजेपी ने खेला नया दांव. भगोरिया पर्व पर मोहन यादव की कृषि कैबिनेट मीटिंग.


By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 6:38 PM IST
रिपोर्ट : शिफाली पांडे
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले श्रीकृष्ण पाथेय योजना के साथ भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े स्थान तीर्थ स्थल के तौर पर तैयार किये. अब आदिवासियों के भगवान भीलट देव के स्थान से कैबिनेट करने के साथ मोहन सरकार ने फिर एक और मास्टर स्ट्रोक खेला है. जिस तरह से मोहन यादव भीलट देव की पूजा अर्चना के लिए पहुंचे, मध्य प्रदेश में आदिवासियों की राजनीति के नजरिए ये तस्वीर बहुत कुछ बयां करती है.
आदिवासियों के नायक टंट्या मामा के बाद अब जनजाति समाज के देवता भीलट देव, मध्य प्रदेश में आदिवासी सियासत का नया चेहरा होंगे. क्या इस रास्ते के सहारे बीजेपी चुनाव में नेक टू नेक फाइट वाली निमाड़ में खोई जमीन लौटा पाएगी.
टंट्या मामा के बाद अब भीलट देव, 2028 का दांव
भीलट देव के मंदिर में ठेठ भील भिलालों की वेशभूषा में पहुंची कैबिनेट. आदिवासी रंग ढंग में रंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ इसी आदिवासी समाज से आने वाले मंत्री विजय शाह अगुवाई कर रहे थे. भीलट देव की आरती उतारते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ये तस्वीर एक आयोजन की स्मृति से ज्यादा संदेश है. 2028 की राजनीति की दिशा तय करता संदेश. मध्यप्रदेश में आदिवासी सीटों के बहुत वाले निमाड़ इलाके में बीजेपी ने चुनाव के तीन सा पहले से चुनावी जमावट मजबूत कर दी है.

मालवा-निमाड़ की आदिवासी सीटें अहम
मध्य प्रदेश में राजनीतिक दलों की जीत का मजबूत रास्ता मालवा-निमाड़ की इन आदिवासी सीटों से होकर ही जाता है, जो गेमचेंजर कही जाती हैं. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रकाश भटनागर कहते हैं "निमाड़ में कांग्रेस व बीजेपी बराबर की स्थिति में है. बीजेपी जाहिर तौर पर यहां बढ़त चाहती है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौर में जननायक टंट्या मामा के साथ बीजेपी ने आदिवासी वोटर के बीच पैठ बनाई थी. लेकिन मोहन यादव ने दो कदम आगे बढ़कर और चुनाव से काफी पहले भीलट देव के स्थान नागलवाड़ी को आदिवासी राजनीति का एपिसेंटर बना दिया है. आदिवासियों की आस्था के केन्द्र भीलट देव को विकसित किया जा रहा है. संदेश दूर तक पहुंचाने का दांव हैं ये."

भगोरिया राष्ट्रीय पर्व, हाट में जुटी पूरी कैबिनेट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ आदिवासी पारंपरिक वस्त्रों आभूषणों से सजे कैबिनेट की तस्वीरें केवल एक स्मृति नहीं है. संदर्भ भी है इस तस्वीर का कि मुख्यधारा से अलग आदिवासियों के रंग में रंगी सरकार ने सीधे मध्यप्रदेश की जनजाति में 37 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी रखने वाले भील भिलालों को चुनाव से 3 साल पहले ही संबोधित कर दिया है. मध्य प्रदेश में भिलाला समाज की आबादी करीब 60 लाख से ऊपर है. रणनीाति के तहत भगोरिया उत्सव की शुरुआत के साथ इस पर्व को मोहन सरकार ने राष्ट्रीय पर्व घोषित किया.
आदिवासी अंचल में कृषि कैबिनेट का मतलब
मुख्यममंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा "भगोरिया को राष्ट्रीय पर्व बनाने के बाद भगोरिया हाट के इस आयोजन में हमारे सारे कैबिनेट के साथी पहुंचे. भीलट देव के स्थानों पर कई निर्माण कार्यों का लोकार्पण साथ ही कृषि कैबिनेट बड़वानी अंचल में करने का निर्णय किया गया. हमारे इस अंचल में जिस तरह से खेती बागवानी सभी प्रकार के हार्टीकल्चर में उन्नति हुई है, निमाड़ का सूखा बेल्ट जहां पलायन होता था, वह अब हरा-भरा है. हम हर वर्ष को एक वर्ग के कल्याण से जोड़कर आगे बढ़ रहे हैं. इसीलिए ये वर्ष किसान कल्याण को समर्पित किया और कृषि कैबिनेट बड़वानी में की."

निमाड़ की ये सीटें ऐसे बन जाती हैं चेंजमेकर
निमाड़ की जो 28 सीटें हैं, वे चेंजमेकर भी कही जा सकती हैं. बीते चुनाव में ये ही इलाका था, जहां कांग्रेस ने बीजेपी को बराबर की टक्कर दी थी. यहां की 14 सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई तो 14 ही सीटों पर कांग्रेस का कब्जा हुआ. मालवा में मजबूत बीजेपी अब निमाड़ की सीटों का गणित बदलना चाहती है और कोशिश ये है कि 14 का ये आंकड़ा 2028 के चुनाव में आगे बढ़े, जिसके लिए 3 साल पहले से इन आदिवासी जिलों में तैयारी शुरू हो गई है. बड़वानी जिले में कैबिनेट उसी का हिस्सा है.
- बड़वानी में पहली कृषि कैबिनेट बैठक, मोहन यादव सरकार ने मालवा-निमाड़ के लिए खोला खजाना
- मोहन कैबिनेट बैठक से पहले भीलटदेव मंदिर में पूजा-अर्चना, आदिवासी गीतों की धुन पर थिरके मंत्री
क्या कैबिनेट के भगोरिया देखने से हो जाएगा आदिवासियों का विकास
आदिवासी नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आदिवासी जिले बड़वानी में कृषि कैबिनेट की इस पूरी कवायद को पर ही सवालिया निशान लगा रहे हैं. वे कहते हैं "क्या भगोरिया देखने या कैबिनेट बैठक करने से आदिवासी किसानों का विकास हो जाएगा?" उमंग सिंघार सवाल खड़ा करते हैं "बीजेपी की ही सरकार में शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री रहते हुए नागलवाड़ी को धार्मिक पर्यटक स्थल बनाने की घोषणा की थी, जो आज तक पूरी नहीं हुई. वहीं आज हुई घोषणाओं का भगवान ही मालिक है."

