ग्वालियर चंबल में पवैया नया पॉवर सेंटर!, राज्य वित्त आयोग का संभाला पदभार, कही ये बात
जयभान सिंह पवैया बने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष, ग्वालियर चंबल की राजनीति में माधव राव सिंधिया से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक चली सियासी अदावत.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 23, 2026 at 9:35 PM IST
भोपाल: राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि नगरीय निकाय और पंचायत निकाय दोनों की ही माली हालत का अध्ययन करेंगे. ये भी पता करेंगे कि अलग-अलग अंचलों में विकास कम ज्यादा तो नहीं है. अगर ग्राउण्ड जीरो पर भ्रमण की जरुरत होगी तो वहां भी जाएंगे. ग्वालियर चंबल की राजनीति में पवैया की सियासत का एक बड़ा हिस्सा सिंधिया के विरोध में बीता है. बीजेपी में आने के बाद ग्वालियर चंबल में सिंधिया के बढ़ते प्रभाव के बाद पवैया के इस पदभार को ग्वालियर चंबल में नए पॉवर सेंटर की तरह देखा जा रहा है.
विभिन्न अंचलों में विकास का किया जाएगा आंकलन
पदभार ग्रहण करने से पहले जयभान सिंह पवैया ने बीजेपी मुख्यालय में बीजेपी के पितृम पुरुष दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ केन्द्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आभार जताया.
नगरीय निकाय और पंचायत निकाय की माली हालत का होगा अध्ययन
जयभान सिंह पवैया ने कहा, "सीएम डॉ. मोहन यादव का इस बात के लिए कृतज्ञ हूं कि उन्होंने मेरी क्षमता को परखने का अवसर दिया. मैं इसका अध्ययन करूंगा और अगर इस संबंध में ग्राउण्ड जीरो से भी जानकारी जुटाने की जरूरत होगी तो जाऊंगा. आयोग राज्य की सेवा किस तरह से कर पाए इसकी पूरी रणनीति हम आयोग की बैठक में बनाएंगे. जो नगरीय निकाय और पंचायत निकाय होते हैं. दोनों की माली हालत का अध्ययन करेंगे. ये जानेंगे कि अलग-अलग अंचलों में विकास कम ज्यादा तो नहीं है. इसके बाद ये भी निश्चित करेंगे कि राज्य के करों का बंटवारा विकास के लिए किस तरह से करना है."

महल का विरोध और पवैया की सियासत
मध्य प्रदेश बीजेपी में जयभान सिंह पवैया कट्टर हिंदुत्व के चेहरे की तरह देखे जाते हैं. ग्वालियर चंबल में उनकी राजनीति महल विरोध से परवान चढ़ती गई. हांलाकि, ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद समीकरण बदल गए. लंबे समय से हाशिए पर चल रहे पवैया की मेन स्ट्रीम में वापसी असल में ग्वालियर चंबल में एक नए पॉवर सेंटर के उदय के तौर पर देखी जा रही है.
ग्वालियर की राजनीति को संतुलित करने की कोशिश
साल 2020 के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया इस इलाके की राजनीति में नए शक्ति केन्द्र बने. इसके अलावा उनके समर्थक प्रदुम्न सिंह तोमर मंत्री बने और तुलसी सिलावट को ग्वालियर का प्रभार दिया गया. जिससे सिंधिया की क्षेत्र में ताकत और बढ़ गई. वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश भटनागर कहते हैं कि राज्य वित्त आयोग जैसे अहम पद पर पवैया की नियुक्ति सिर्फ संघ और हिंदुत्व विचारक एक नेता का पुर्नवास भर नहीं है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजनीतिक परिपक्वता के साथ ग्वालियर चंबल की राजनीति को संतुलित किया है.

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दो दशक से ज्यादा चली सिंधिया से पवैया की सियासी अदावत
ग्वालियर चंबल की राजनीति में माधव राव सिंधिया से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक जयभान सिंह पवैया की सियासी अदावत दो दशक से ज्यादा चली. 1998 का बरस इसमें अहम था. वो इसलिए कि इसी बरस में हुए लोकसभा चुनाव में पवैया सिंधिया के खिलाफ बीजेपी के उम्मीदवार थे और इतने ताकतवर साबित हुए कि उन्होंने सिंधिया के खिलाफ जीत का अंतर महज 28 हजार वोट पर समेट दिया था. इसके बाद फिर कभी माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर से चुनाव लड़ा ही नहीं. उन्होंने गुना का रुख कर लिया. पवैया ने साल 1998 में दिवंगत माधव राव सिंधिया को कड़ी टक्कर दी. तो वहीं साल 2014 में गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ मैदान में उतरे. यहां भी जीत का अंतर करीब डेढ लाख के भीतर समेट दिया था.

