असहनीय दर्द से तड़प रही महिला को 6 महीने बाद मिला आराम, एम्स भोपाल की स्मार्ट पंप थेरेपी ने दी राहत
उत्तर प्रदेश के ललितपुर की महिला रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण गंभीर समस्या से थीं पीड़ित. इंट्राथीकल बैक्लोफेन थेरेपी से दर्द हुआ खत्म.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 1, 2026 at 10:57 PM IST
भोपाल: राजधानी के एम्स अस्पताल की उन्नत चिकित्सा के कारण 65 साल की एक बुजुर्ग महिला को असहनीय दर्द से आजादी मिली है. यह महिला बीते 6-7 महीनों से लकवे जैसी स्थिति से जूझ रही थीं. लेकिन एम्स अस्पताल में हुए इलाज के बाद अब पूरी तरह राहत महसूस कर रही हैं. एम्स के डाक्टरों ने इंट्राथीकल बैक्लोफेन पंप जैसी आधुनिक तकनीक से न सिर्फ महिला का दर्द खत्म किया, बल्कि उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने का मौका भी दिया.
गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं बुजुर्ग
उत्तर प्रदेश के ललितपुर की रहने वाली महिला रीढ़ की हड्डी में चोट के बाद स्पास्टिक पैराप्लेजिया नामक गंभीर समस्या से पीड़ित थीं. इस बीमारी में मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से जकड़ जाती हैं. जिससे लगातार तेज दर्द बना रहता है. मरीज की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें दिन-रात चैन नहीं मिलता था और नींद तक गायब हो चुकी थी. डॉक्टर अनुज जैन के अनुसार "यह थेरेपी उन मरीजों के लिए बेहद प्रभावी है, जिन्हें सामान्य दवाओं से राहत नहीं मिलती."
कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी नहीं मिला आराम
परिजनों ने महिला का अलग-अलग जगह इलाज कराया, दवाइयों की खुराक बदली गई, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ. लगातार दर्द के कारण मरीज के साथ-साथ पूरा परिवार मानसिक तनाव में आ गया था. आखिरकार मरीज एम्स भोपाल पहुंचीं, जहां दर्द चिकित्सा यूनिट और न्यूरो सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने उनका परीक्षण किया. डॉक्टर अनुज जैन और डॉक्टर सुमित राज के नेतृत्व में विशेषज्ञों ने इंट्राथीकल बैक्लोफेन थेरेपी अपनाने का फैसला लिया.
उन्नत तकनीक से तुरंत राहत
इस थेरेपी के तहत दवा को सीधे रीढ़ के तरल (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड) में दिया जाता है. जिससे कम मात्रा में ही असरदार इलाज संभव होता है. पहला ट्रायल इंजेक्शन दिया गया, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा और मरीज को तुरंत राहत मिल गई. सफल ट्रायल के बाद डाक्टरों ने मरीज के शरीर में त्वचा के नीचे प्रोग्रामेबल ड्रग डिलीवरी पंप प्रत्यारोपित किया.
यह पंप लगातार नियंत्रित मात्रा में दवा पहुंचाता है. जिससे दर्द और जकड़न पूरी तरह खत्म हो गई. एम्स के डॉक्टर सुमित राज ने "इस सफलता का श्रेय टीमवर्क को देते हुए कहा कि समन्वित प्रयासों से ही ऐसे जटिल मामलों में सफलता मिलती है."
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प्राइवेट इलाज में 10 लाख से अधिक का खर्च
इलाज के बाद मरीज अब दर्द मुक्त हैं और उन्हें सामान्य नींद आने लगी है. उनके परिजन भी राहत महसूस कर रहे हैं, क्योंकि लंबे समय बाद परिवार ने सुकून देखा है. बता दें कि यह उन्नत उपचार देश के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही उपलब्ध है. निजी अस्पतालों में इसका खर्च 10 लाख रुपए से अधिक होता है, जबकि एम्स भोपाल में यह सुविधा अपेक्षाकृत कम खर्च पर उपलब्ध कराई गई, जो आम मरीजों के लिए बड़ी राहत है.

