एम्स भोपाल में मरीजों की परेशानी खत्म, मोबाइल पर मिलेगी गूगल मैप जैसी पूरी जानकारी
एम्स भोपाल में AI मरीजों और परिजनों को सही विभाग तक पहुंचने का बताएगा रास्ता. आईआईटी इंदौर तैयार कर रहा स्मार्ट नेविगेशन प्रणाली.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 21, 2026 at 3:49 PM IST
भोपाल: एम्स भोपाल अब देश का पहला ऐसा सरकारी अस्पताल बनने जा रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई मरीजों और उनके परिजनों को सही विभाग तक पहुंचने का रास्ता बताएगा. दरअसल प्रतिदिन यहां 10 हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. लेकिन एक जैसी दिखने वाली इमारतों और बड़े कैंपस के कारण अक्सर लोग भटक जाते हैं. इसी समस्या के समाधान के लिए स्मार्ट नेविगेशन प्रणाली विकसित की जा रही है, जो वेब और मोबाइल ऐप दोनों माध्यमों से उपलब्ध होगी.
आईआईटी इंदौर तैयार कर रहा स्मार्ट नेविगेशन प्रणाली
इस परियोजना को आईआईटी इंदौर की दृष्टि टीम के सहयोग से तैयार किया जा रहा है. भोपाल के एक स्टार्टअप की मदद से एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम विकसित किया जा रहा है. एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन ने बताया कि "परिसर में 66 स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे. इन्हें स्कैन करते ही मरीज को कार्डियोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, पैथोलॉजी, एमआरआई, अमृत फार्मेसी या डॉक्टर के कमरे तक पहुंचने की पूरी जानकारी मिल जाएगी."
क्यूआर कोड और मोबाइल ऐप से आसान होगा सफर
यह सिस्टम दो तरीके से काम करेगा. पहला वेब आधारित होगा, जिसमें मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही मोबाइल स्क्रीन पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा. यह मैप वर्तमान स्थान से सही जगह पहुंचने तक स्पष्ट दिशा-निर्देशन देगा. वहीं दूसरा तरीका मोबाइल ऐप आधारित होगा. उपयोगकर्ता ऐप डाउनलोड कर सीधे विभाग का नाम सर्च कर सकेंगे.

भवनों के बीच पहुंचने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा. वहीं भवनों के अंदर, जहां जीपीएस सटीक काम नहीं करता, वहां लगभग हर 15 मीटर पर रिले उपकरण लगाए जाएंगे. ये उपकरण इनडोर नेविगेशन को सटीक और प्रभावी बनाएंगे.
- हाई वोल्टेज करंट के बाद अंगों को बचाने की नई उम्मीद, एम्स भोपाल में उन्नत सर्जरी से बची 23 मरीजों की जान
- मध्य प्रदेश में खुलेगा AI डेटा सेंटर, पढ़ाई से लेकर इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन तक नया सिस्टम
पायलट प्रोजेक्ट के बाद पूरे परिसर में होगा विस्तार
स्मार्ट नेविगेशन प्रणाली को पहले एक माह के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा. इस दौरान उपयोगकर्ता अनुभव, तकनीकी सटीकता और संचालन की प्रभावशीलता का मूल्यांकन होगा. परिणाम सकारात्मक रहने पर इसे पूरे परिसर में लागू किया जाएगा.
डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन ने बताया कि "इस पहल से मरीजों का समय बचेगा, बार-बार रास्ता पूछने की जरूरत कम होगी और तनाव में भी कमी आएगी. इससे बाहर से या पहली बार आने वाले मरीजों को इलाज में आसानी होगी."

