600 टन कचरे का कहर, आदमपुर की जीवनरेखा बनी जहर, बैक्टीरिया मिला पानी पीने को मजबूर गांव
भोपाल के आदमपुर का भूजल बना संकट, 8 साल से दूषित पानी पीने को मजबूर लोग, NGT की नगर निगम को 330 दिन की मोहलत.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 11, 2026 at 10:19 AM IST
|Updated : January 11, 2026 at 10:25 AM IST
भोपाल: रायसेन रोड पर स्थित आदमपुर छावनी गांव के लिए कभी जीवनदायिनी रहा भूजल अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदल चुका है. भोपाल नगर निगम द्वारा कराए गए पानी के परीक्षण में पुष्टि हुई है कि गांव के पास स्थित कचरा डंपिंग साइट से निकले जहरीले लीचेट के कारण स्थानीय जल स्रोतों में ई. कोलाई बैक्टीरिया मौजूद हैं. यह वही जमीन है, जहां से वर्षों तक साफ और मीठा पानी निकलता था. लेकिन पिछले आठ वर्षों से आदमपुर और आसपास के गांवों के लोग दूषित पानी के साथ जीने को मजबूर हैं.
पीने और नहाने धोने में गंदे पानी का इस्तेमाल
आधिकारिक जांच रिपोर्ट ने ग्रामीणों की आशंकाओं को सच साबित कर दिया है. हालात इतने बदतर हैं कि हज़ारों ग्रामीण नहाने और कपड़े धोने के लिए भी प्रदूषित पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं, स्कूली बच्चे सड़क किनारे रखे टैंकरों से पानी भरकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने हाल ही में भोपाल नगर निगम को आदमपुर कचरा लैंडफिल के कुप्रबंधन पर कड़ी फटकार लगाई है. ट्रिब्यूनल ने 330 दिनों के भीतर कचरे के वैज्ञानिक निपटान और समस्या के स्थायी समाधान के निर्देश दिए हैं. अब इस डेडलाइन में 328 दिन शेष हैं.

हर दिन डल रहा 600 टन कचरा
समस्या की जड़ गांव के नजदीक स्थित विशाल कचरा डंपिंग साइट है, जहां भोपाल शहर का करीब 600 टन नगर निगम कचरा हर दिन डाला जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि 2018 तक भूजल पूरी तरह साफ था, लेकिन जैसे ही डंपिंग साइट को आदमपुर के पास स्थानांतरित किया गया, प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगा. सड़ते कचरे से निकलने वाला जहरीला लीचेट मिट्टी में रिसकर कुओं और बोरवेल तक पहुंच गया, जिससे वे पीने योग्य नहीं रहे.

बंद पड़ा है 50 हज़ार लीटर का टैंक
विडंबना यह है कि, पांच साल पहले नल जल योजना के तहत बनाया गया 50 हज़ार लीटर क्षमता वाला ओवरहेड टैंक अब पूरी तरह बंद पड़ा है. ग्रामीण इसे अब सफेद हाथी कह रहे हैं. गांव के आठ हैंडपंप और दो पारंपरिक कुओं से बदबूदार और गंदा पानी निकल रहा है. नतीजतन, आदमपुर की करीब 7 हजार की आबादी पूरी तरह रत्नागिरी क्षेत्र से आने वाले नगर निगम के टैंकरों पर निर्भर है, जो रोज 12 पानी के टैंक भरते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस संकट ने उनके स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी दोनों को प्रभावित किया है.

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दूर-दराज से पीने का पानी लाते हैं ग्रामीण
स्थानीय निवासी हिम्मत सिंह बताते हैं, ''1995 में खोदा गया कुआं, जिससे कभी साफ पानी निकलता था, अब कचरा डंपिंग की वजह से बदबू मारता है.'' वहीं गायत्री बाई कहती हैं, ''अब बोरवेल से लाल और गंदा पानी आता है. मजबूरी में दूर-दराज़ इलाकों से पीने का पानी लाना पड़ता है.'' भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने कहा है कि, ''ग्रामीणों को राहत देने के लिए टैंकरों से दिन में दो बार पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है. साथ ही डंपिंग साइट से कचरे को हटाने और वैज्ञानिक तरीके से निपटान के प्रयास तेज किए गए हैं.''

