मध्य प्रदेश में रेयर डिजीज से पीड़ित मिले 2 मरीज, ब्लड निकालते ही बीमारी छूमंतर
भोपाल में दुलर्भ बीमारी से पीड़ित में मिले 2 लोग, ब्लड टेस्ट में पकड़ में आई बीमारी, खून निकालने पर ही मिलता है आराम.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 5, 2026 at 4:45 PM IST
रिपोर्ट: ब्रिजेंद्र पटेरिया
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले एक माह में 2 लोगों में ऐसी बीमारी पाई गई, जो लाखों में से किसी एक में ही पाई जाती है. बीमारी से पीड़ित दोनों मरीजों को कई तरह के बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे थे. परेशान होकर दोनों भोपाल के एक निजी हॉस्पिटल पहुंचे. चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों ही मरीजों का इलाज बिना किसी गोली-दवाई और इंजेक्शन के ही हो गया. अब दोनों मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं.
चलना-फिरना भी हुआ मुश्किल, ब्लड टेस्ट से पकड़ी गई बीमारी
विदिशा के रहने वाले 40 साल के आदित्य आचार्य एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं. उनकी मां रेखा आचार्य बताती हैं कि "जनवरी माह से बेटे को थकावट महसूस हो रही थी. विदिशा में डॉक्टर्स को दिखाया तो शुरूआती दवाई से बेटा ठीक हो गया, लेकिन कुछ समय बाद फिर तबीयत बिगड़ी. पहले सर्दी हुई, पेट खराब हुआ. कुछ समय बाद स्थिति यह हुई कि बेटे का चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया. विदिशा में कई पैथोलॉजी टेस्ट कराए, लेकिन जब डॉक्टर को कुछ समझ नहीं आया तो उन्होंने भोपाल जाने का बोल दिया.
भोपाल में एक निजी हॉस्पिटल में बेटे को एडमिट कराया. डॉक्टर ने पैथोलॉजी टेस्ट देखने के बाद ब्लड का कंम्पलीट टेस्ट कराया, तब पता चला कि बेटा पॉलीसिथेमिया से पीड़ित है." ऐसी ही बीमारी से सिंरौज का एक युवक भी पीड़ित मिला. मरीज संजय यादव के भाई मुकेश ने बताया कि "भाई को सिर में दर्द और बीच-बीच में सांस उखड़ने की समस्या हो रही थी. इन लक्षणों को देखते हुए पहले डॉक्टर्स ने सिटी स्कैन तक कराई.
लंग्स की भी जांच कराई, लेकिन दवा से बहुत ज्यादा आराम नहीं मिला. फिर भोपाल में आकर निजी हॉस्पिटल में एडमिट होने के बाद जब ब्लड की जांच कराई गई तो पॉलीसिथेमिया का पता चला."
मरीज को समझाना मुश्किल होता है
डॉ. जेपी पालीवाल कहते हैं कि "पॉलीसिथेमिया बीमारी में शरीर से ब्लड निकालकर फेंकना ही इलाज होता है. हालांकि कई बार मरीज को यह बात समझाना मुश्किल होती है. पिछले दिनों सिंरौज से आए मरीज संजय यादव को जब बताया कि उनके शरीर से 3 से 4 यूनिट ब्लड निकाल कर फेंकना होगा, तो वह मानने को तैयार ही नहीं थे. हालांकि बाद में उनके भाई को बुलाकर इस बीमारी के बारे में बताया गया. वह मेडिकल लाइन से जुडे़ हुए थे, इसलिए बाद में उनके समझाने पर संजय तैयार हुए. अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं.
लाख में किसी एक को हाती है पॉलीसिथेमिया
डॉ. जेपी पालीवाल कहते हैं कि पॉलीसिथेमिया एक दुर्लभ रक्त यानि ब्लड विकार होता है, इसमें बोनमैरो बहुत अधिक लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने लगता है. इससे शरीर में होमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ने लगती है. आमतौर पर शरीर में होमोग्लोबिन की मात्रा 13.5 से 17 तक होनी चाहिए, लेकिन इस बीमारी में होमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ने लगती है, कई बार यह बढ़कर 25 तक पहुंच जाती है. साथ ही रक्त गाढ़ा हो जाता है. डॉ. पालीवाल बताते हैं कि जब रक्त गाढ़ा हो जाता है तो यह शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है. ऐसे ब्लड से मस्तिष्क, लंग्स, लीवर, गुर्दे आदि अंगों से जुड़ी कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं.
- हर सांस मशीनों के सहारे, फेफड़ों की गंभीर बीमारी से ग्रस्त मासूम ऋतिका, एक मदद की है आस
- हाई वोल्टेज करंट के बाद अंगों को बचाने की नई उम्मीद, एम्स भोपाल में उन्नत सर्जरी से बची 23 मरीजों की जान
बीमारी में सिर्फ शरीर से ब्लड निकालना ही उपाए
डॉक्टर के मुताबिक जितनी भी बीमारी है, उनमें यह बीमारी ही ऐसी है, जिसका इलाज ही सिर्फ शरीर से ब्लड निकाले जाने से होता है. ऐसी बीमारी से ग्रसित मरीजों के शरीर से कई बार में 2 से 5 यूनिट तक ब्लड निकाला जाता है. ऐसे मरीजों का ब्लड इतना गाढ़ा होता है, लेकिन यह किसी को डोनेट करने के भी काम का नहीं होता. ऐसी स्थिति में इसे नष्ट करना ही एक मात्र उपाए होता है."

