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22 साल से अपना भवन नहीं, बिहार में एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर पूरा स्कूल!

भोजपुर के न्यू प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 5वीं तक के बच्चे एक कमरे में पढ़ने को मजबूर.पढ़ें आलोक कुमार भारती की रिपोर्ट

BHOJPUR NEW PRATHMIK VIDYALAYA
भोजपुर में एक कमरे में संचालित स्कूल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 25, 2026 at 6:58 AM IST

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भोजपुर: बिहार में राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा को आधुनिक स्वरूप देने की कोशिश में कई अहम बदलावों की घोषणा कर चुकी है. इनमें लाइव क्लासेस, AI पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग व्यवस्था जैसे बदलाव शामिल है. लेकिन प्रदेश के भोजपुर में एक ऐसा स्कूल है जहां पहली से पांचवी कक्षा के बच्चों की पढ़ाई सामुदायिक भवन के एक कमरे में हो रही है.

अक्टूबर 2004 में स्थापित विद्यालय: जिले के बड़हरा प्रखंड के पश्चिमी बबूरा पंचायत स्थित न्यू प्राथमिक विद्यालय, कुतुबपुर डेरा की तस्वीर कुछ ऐसी ही है. अक्टूबर 2004 में स्थापित यह विद्यालय आज भी सामुदायिक भवन के सहारे चल रहा है और इस विद्यालय में पढ़ने वाले 75 छात्र-छात्राएं एक ही कमरे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

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एक साथ अलग-अलग क्लास के बच्चों की शिक्षा (ETV Bharat)

22 साल बाद भी विद्यालय को अपना भवन नहीं: यकीनन न्यू प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर डेरा सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने ला रहा है. स्कूल की स्थापना के करीब 22 साल बाद भी विद्यालय को अपना भवन नसीब नहीं हो सका है. स्थापना के बाद से ये विद्यालय कभी एक तो कभी किसी दूसरे सामुदायिक भवन में संचालित होता रहा है.

बच्चों की पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कमरा: उदासीनता का आलम ऐसा है कि इस सरकारी स्कूल में पांच कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कमरा है. उसपर भी पर्याप्त बेंच-डेस्क नहीं होने के कारण कुछ बच्चे बेंच पर तो कुछ फर्श पर बैठने को मजबूर हो जाते हैं. ऐसे में प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था के दावों की हकीकत आसानी से समझी जा सकती है.

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ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

सामुदायिक भवन में होती रही है पढ़ाई: दरअसल मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआत से ही विद्यालय की पढ़ाई सामुदायिक भवन में होती रही है. बाद में उसी भवन में आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होने लगा. समय के साथ भवन की स्थिति जर्जर हो गई. इसके बाद अप्रैल 2026 में विद्यालय को दूसरे सामुदायिक भवन में स्थानांतरित कर दिया गया. हालांकि नए ठिकाने पर भी विद्यालय को सिर्फ एक कमरा ही उपलब्ध हो सका.

बच्चों की पढ़ाई प्रभावित: एक ही कमरे में पहली से पांचवीं तक की पांच कक्षाएं संचालित होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. कमरे में जगह कम होने के चलते कुछ बच्चों को बेंच मिलती है जबकि कुछ छात्र-छात्राओं को फर्श पर बैठकर पढ़ना पड़ता है. अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाने के कारण शिक्षक के सामने भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

देखें रिपोर्ट (ETV Bharat)

75 बच्चों को एक साथ पढ़ाना चुनौतीपूर्ण: विद्यालय के शिक्षक कुमार मोहित ने बताया कि पांच अलग-अलग कक्षाओं के 75 बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाना काफी चुनौतीपूर्ण है. सीमित संसाधनों के बीच किसी तरह शिक्षण कार्य कराया जा रहा है. विद्यालय भवन निर्माण को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने मांग रखी गई है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है.

"पांच अलग-अलग कक्षाओं के 75 बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाना काफी चुनौतीपूर्ण है. सीमित संसाधनों के बीच किसी तरह शिक्षण कार्य कराया जा रहा है. विद्यालय भवन निर्माण को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने मांग रखी गई है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है."- कुमार मोहित, शिक्षक

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कुमार मोहित, शिक्षक (ETV Bharat)

फुटबॉल की तरह भटक रहा स्कूल: ग्रामीण पिंटू ने बताया कि विद्यालय फुटबॉल की तरह एक सामुदायिक भवन से दूसरे सामुदायिक भवन में भटक रहा है. सरकारी दावे और आंकड़े अपनी जगह हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बच्चे आज भी एक कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं. उन्होंने विद्यालय के लिए जल्द से जल्द स्थायी भवन निर्माण की मांग की.

"विद्यालय फुटबॉल की तरह एक सामुदायिक भवन से दूसरे सामुदायिक भवन में भटक रहा है. सरकारी दावे और आंकड़े अपनी जगह हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बच्चे आज भी एक कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं."- पिंटू सिंह, ग्रामीण

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पिंटू सिंह, ग्रामीण (ETV Bharat)

स्थायी भवन का निर्माण जरूरी: वार्ड सदस्य टुनटुन कुमार ने कहा कि पुराने सामुदायिक भवन के जर्जर होने के कारण विद्यालय को दूसरे भवन में शिफ्ट करना पड़ा. करीब 22 वर्षो बाद भी विद्यालय को अपना भवन नहीं मिलना शिक्षा विभाग की बड़ी विफलता है.बच्चों के भविष्य को देखते हुए स्थायी भवन का निर्माण जल्द कराया जाना चाहिए.

"करीब 22 वर्षो बाद भी विद्यालय को अपना भवन नहीं मिलना शिक्षा विभाग की बड़ी विफलता है.बच्चों के भविष्य को देखते हुए स्थायी भवन का निर्माण जल्द कराया जाना चाहिए."-टुनटुन कुमार, वार्ड सदस्य

डीईओ का बयान: जिला शिक्षा पदाधिकारी मानवेंद्र कुमार राय ने बताया कि स्कूल की अपनी भूमि नहीं होने कारण भवन का निर्माण नहीं हो पाया था लेकिन अब भूमि उपलब्ध हो गई है. जल्द ही स्कूल सामुदायिक भवन से अपने भवन में शिफ्ट हो जायेगा. उन्होंने कहा कि शायद इसमें थोड़ा वक्त लगे लेकिन कोशिश होगी कि जल्द से जल्द स्कूल भवन का निर्माण हो जाए.

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मानवेंद्र कुमार राय, जिला शिक्षा पदाधिकारी (ETV Bharat)

"स्कूल की अपनी भूमि नहीं होने कारण भवन का निर्माण नहीं हो पाया था लेकिन अब भूमि उपलब्ध हो गई है. जल्द ही स्कूल सामुदायिक भवन से अपने भवन में शिफ्ट हो जायेगा. कोशिश होगी कि जल्द से जल्द स्कूल भवन का निर्माण हो जाए."- मानवेंद्र कुमार राय, जिला शिक्षा पदाधिकारी

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