बिहार के भूमिहीन स्कूल को मिली जमीन, DEO ने भवन निर्माण के लिए लिखा पत्र
ईटीवी भारत की खबर पर प्रशासन सजग, न्यू प्राथमिक विद्यालय, कुतुबपुर डेरा के लिए कुल 16 डिसमिल ज़मीन की हुई रजिस्ट्री. रिपोर्ट-आलोक कुमार भारती

Published : August 26, 2026 at 7:14 PM IST
भोजपुर: बिहार के भोजपुर में ईटीवी भारत की खबर पर प्रशासन सजग हो गया है. दरअसल हमने बड़हरा प्रखंड के पश्चिमी बबूरा पंचायत स्थित न्यू प्राथमिक विद्यालय, कुतुबपुर डेरा की एक खबर दिखाई थी जहां स्कूल 22 सालों से सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा था. इसी खबर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षा विभाग के निदेशक को पत्र लिखा है.
डीईओ ने लिखा पत्र: पत्र में डीईओ मानवेंद्र कुमार राय द्वारा लिखे पत्र के अनुसार, यह स्कूल लंबे समय से भूमिहीन था. जमीन न होने की वजह से स्कूल की अपनी बिल्डिंग नहीं बन पा रही थी. इसके लिए साल 2025 में अंचलाधिकारी को कई बार पत्र लिखकर ज़मीन ढूंढने का अनुरोध किया गया था.

कुल 16 डिसमिल ज़मीन की रजिस्ट्री: पत्र में डीईओ ने बताया है कि अब राहत की बात यह है कि एक दानकर्ता ने स्कूल के नाम पर कुल 16 डिसमिल ज़मीन की रजिस्ट्री कर दी है, जिसकी जानकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने विभाग को दी है. जमीन मिलने के बाद अब स्कूल की नई बिल्डिंग बनाने की तैयारी तेज हो गई है.
जल्द भवन निर्माण का अनुरोध: जिला शिक्षा कार्यालय ने पटना के भवन निर्माण विभाग (BSEIDC) को पत्र लिखकर स्कूल का भवन जल्द से जल्द बनाने का अनुरोध किया है. भोजपुर जिले के जिन भूमिहीन स्कूलों को जमीन मिली है, उसकी सरकारी लिस्ट में इस स्कूल का नाम चौथे नंबर पर दर्ज है.

75 छात्र-छात्राओं के लिए एक ही कमरा: गौरतलब है कि हमने 25 अगस्त को खबर दिखाई थी जिसमें ये बताया था कि अक्टूबर 2004 में स्थापित बड़हरा प्रखंड के पश्चिमी बबूरा पंचायत स्थित न्यू प्राथमिक विद्यालय आज भी सामुदायिक भवन के सहारे चल रहा है. और इस विद्यालय में पढ़ने वाले 75 छात्र-छात्राएं एक ही कमरे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं.
इतने बच्चों को एक साथ पढ़ाना चुनौतीपूर्ण: विद्यालय के शिक्षक कुमार मोहित ने बताया था कि पांच अलग-अलग कक्षाओं के 75 बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाना काफी चुनौतीपूर्ण है. सीमित संसाधनों के बीच किसी तरह शिक्षण कार्य कराया जा रहा है. विद्यालय भवन निर्माण को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने मांग रखी गई है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है.
''सीमित संसाधनों के बीच किसी तरह शिक्षण कार्य कराया जा रहा है. विद्यालय भवन निर्माण को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने मांग रखी गई है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है."- कुमार मोहित, शिक्षक

सामुदायिक भवन में पढ़ाई: हमें मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआत से ही विद्यालय की पढ़ाई सामुदायिक भवन में होती रही थी. बाद में उसी भवन में आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होने लगा. समय के साथ भवन की स्थिति जर्जर हो गई. इसके बाद अप्रैल 2026 में विद्यालय को दूसरे सामुदायिक भवन में स्थानांतरित कर दिया गया. हालांकि नए ठिकाने पर भी विद्यालय को सिर्फ एक कमरा ही उपलब्ध हो सका.
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित: एक ही कमरे में पहली से पांचवीं तक की पांच कक्षाएं संचालित होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी. कमरे में जगह कम होने के चलते कुछ बच्चों को बेंच मिलती है जबकि कुछ छात्र-छात्राओं को फर्श पर बैठकर पढ़ रहे थे. अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाने के कारण शिक्षकों को भी परेशानी हो रही थी.
डीईओ ने क्या कहा था: जिला शिक्षा पदाधिकारी मानवेंद्र कुमार राय ने तब बताया कि स्कूल की अपनी भूमि नहीं होने कारण भवन का निर्माण नहीं हो पाया था लेकिन अब भूमि उपलब्ध हो गई है. उन्होंने कहा था कि शायद इसमें थोड़ा वक्त लगे लेकिन कोशिश होगी कि जल्द से जल्द स्कूल भवन का निर्माण हो जाए.
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