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ट्रेन में कंफर्म टिकट के बाद भी नहीं मिली सीट, कोर्ट का एक्‍शन, अब रेलवे को देना होगा जुर्माना

भोजपुर उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को दोषी ठहराया. यात्रियों को टिकट राशि ब्याज सहित, 20 हजार मुआवजा और 15 हजार मुकदमा खर्च लौटाने का आदेश.

Bhojpur Consumer Commission Verdict
भोजपुर उपभोक्ता (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 2, 2026 at 3:22 PM IST

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भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय रेलवे को आरक्षित सीट नहीं उपलब्ध कराने के मामले में दोषी ठहराया है. आयोग ने रेलवे की सेवा को गंभीर रूप से दोषपूर्ण मानते हुए टिकट राशि ब्याज सहित वापस करने, मुआवजा देने और मुकदमे का खर्च वहन करने का आदेश दिया है.

यात्रियों को भुगतना पड़ा पूरी यात्रा खड़े रहकर: कोईलवर प्रखंड के कायमनगर निवासी रविशंकर पांडेय अपने तीन साथियों के साथ विंध्याचल से आरा लौट रहे थे. उन्होंने आईआरसीटीसी के माध्यम से ट्रेन संख्या 13202 एलटीटी-पटना एक्सप्रेस के बी-4 कोच में सीट नंबर 58, 62, 63 और 68 आरक्षित कराई थी इसके लिए कुल 1,876.80 रुपये का भुगतान किया गया था, लेकिन ट्रेन में अत्यधिक भीड़ के कारण उनकी सीटें अन्य यात्रियों ने घेर ली थी.

भोजपुर उपभोक्ता (ETV Bharat)

"ट्रेन में अत्यधिक भीड़ होने के कारण आरक्षित सीटों पर अन्य यात्रियों ने कब्जा जमा रखा था. सीट खाली करने का आग्रह करने पर संबंधित लोगों ने दुर्व्यवहार किया. इसके बाद टीटीई तथा रेलवे पुलिस से सहायता लेने का प्रयास किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली."-रविशंकर पांडेय, भुक्तभोगी

टीटीई और आरपीएफ से मिली नाकामी: सीट खाली कराने का आग्रह करने पर अन्य यात्रियों ने दुर्व्यवहार किया. परिवादियों ने टिकट परीक्षक (टीटीई) और रेलवे पुलिस से मदद मांगी, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली. उन्होंने रेलवे सेवा और रेल मंत्रालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर भी शिकायत दर्ज कराई, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ.

आरक्षित सीट न मिलने को माना अधिकारों का उल्लंघन: नतीजतन चारों यात्रियों को पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ी. आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा कि आरक्षित टिकट होने के बावजूद सीट उपलब्ध न कराना यात्रियों के अधिकारों का उल्लंघन और रेलवे की सेवा में गंभीर कमी है.

रेलवे की दलील खारिज, साक्ष्यों पर आयोग ने लिया फैसला: सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से दलील दी गई कि शिकायत पर कार्रवाई की गई थी और यह कानून-व्यवस्था का मामला है. हालांकि आयोग ने प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद इस दलील को खारिज कर दिया और इसे रेलवे की स्पष्ट सेवा कमी माना.

चार वर्ष बाद मिला न्याय, रेलवे पर लगा जुर्माना: लगभग चार वर्षों की लंबी सुनवाई के बाद भोजपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवादियों के पक्ष में फैसला सुनाया. आयोग ने उत्तर मध्य रेलवे और रेल मंत्रालय को निर्देश दिया कि 1,876.80 रुपये की टिकट राशि 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस की जाए. साथ ही मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये और मुकदमा खर्च के रूप में 15 हजार रुपये 60 दिनों के अंदर दिए जाएं.

उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला: यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में मील का पत्थर माना जा रहा है. इससे साफ संदेश गया है कि आरक्षित टिकट जारी करने के बावजूद यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध न कराना रेलवे को अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता. यह फैसला अन्य यात्रियों के लिए भी राहत और रेलवे के लिए जवाबदेही का उदाहरण बनेगा.

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