मोहन यादव का नक्सलियों को सादा सिंपल ऑफर, मानें सीएम की बात या फेस करें एक्शन
मोहन यादव का लाल आतंक को अल्टीमेटम, बचे नक्सली जल्द करें सरेंडर या मध्य प्रदेश पुलिस का सामना करने को रहें तैयार.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : November 3, 2025 at 4:38 PM IST
|Updated : November 3, 2025 at 4:56 PM IST
भोपाल: देश में आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा लाल आतंक दम तोड़ रहा है. हिंसक संगठन नक्सलवाद को मार्च 2026 तक जड़ से खत्म करने के लिए देश के गृह मंत्री अमित शाह ने डेडलाइन तय कर दी है. इसका जमीन पर असर भी दिखाई पड़ने लगा है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना झारखंड और ओडिशा के जंगलों में नक्सलवादियों के खिलाफ सुरक्षाबलों के ऑपरेशन लगातार जारी हैं. जिसमें लाखों रुपए के इनामी कई बड़े नक्सलवादी नेताओं को जवानों ने ढेर कर दिया है. वहीं, कई नामी नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं.
बालाघाट में महिला नक्सली ने किया सरेंडर
बालाघाट में 2 नवंबर को 14 लाख रुपए की इनामी नक्सली सुनीता ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ट्वीट कर इस जानकारी को साझा किया है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि "नक्सली सुनीता से बड़ी संख्या में हथियार व अन्य सामग्री बरामद की गई है. इस सफलता के लिए पुलिस बल प्रशंसा की पात्र है. अब जो कुछ नक्सली बचे हैं, वे आत्मसमर्पण करें या फिर पुलिस का सामना करने के लिए तैयार रहें."
14 लाख रुपए की इनामी नक्सली सुनीता ने आज बालाघाट में आत्मसमर्पण कर दिया है। उससे बड़ी संख्या में हथियार व अन्य सामग्री बरामद की गई है।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) November 2, 2025
इस सफलता के लिए पुलिस बल प्रशंसा की पात्र है। अब जो कुछ नक्सली बचे हैं, वे आत्मसमर्पण करें या फिर पुलिस का सामना करने के लिए तैयार रहें। pic.twitter.com/JJJGSKWtlL
अमित शाह की नीति का दिख रहा असर
बालाघाट में 12 साल बाद किसी नक्सली का यह आत्मसमर्पण है. सरेंडर करने वाली युवती का नाम सुनीता बताया जा रहा है और वो छत्तीसगढ़ के बीजापुर की निवासी है. वह बालाघाट में नक्सली गार्ड के रूप में काम कर रही थी. यह आत्मसमर्पण मध्य प्रदेश नक्सली पुनर्वास सह राहत नीति 2023 के तहत हुआ. इससे पहले साल 2013 में एक नक्सली ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था. अब एक महिला नक्सली ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया. फिलहाल, गृहमंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलियों के लिए समर्पण नीति लाई है. जिसके तहत नक्सलवाद को जड़ से साफ किया जा रहा है.
आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे नक्सली
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित नक्सल प्रभावित राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा नक्सल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है. सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान से नक्सलवाद की कमर टूट गई है. इस वजह से नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं. बीते कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ में पुलिस को नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता मिली. सैकड़ों नक्सलियों ने सरकार के सामने लाल आतंक का रास्ता छोड़कर अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने का फैसला किया था.

बालाघाट ने उतार फेंका नक्सलवाद का टैग
भोपाल में 26 सितंबर को एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लाल आतंक का गढ़ कहने जाने वाले बालाघाट ने नक्सलवाद का टैग उतार दिया है. प्रभावित के लेबल से मुक्त घोषित कर दिया था. रेड कॉरिडोर में लाल आतंक अंतिम सांसें गिन रहा है. मध्य प्रदेश में 1980 के दशक में नक्सलवाद की जड़ें काफी मजबूत थीं. जनजातीय असंतोष के बीच पनपे लाल आतंक ने भूमि अधिग्रहण, खनन अतिक्रमणों ने बढ़ावा दिया. छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से लगे दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश में 9,429 वर्ग किलोमीटर में फैला बालाघाट अपने बीहड़ भूभाग और हाशिये पर रहने वाली गोंड और बैगा जनजातियों के कारण आकर्षण का केंद्र बन गया.
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11 जिलों तक सिमटा लाल आतंक का साया
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक नक्सलवादी हिंसा की घटनाओं में भारी गिरावट आई है. 2014 में 18,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक इलाके में माओवादी सक्रिय थे, जो 2024 तक घटकर लगभग 4,200 वर्ग किलोमीटर में रह गए है. वहीं 2025 में यह और भी कम होकर कुछ 100 वर्ग किलोमीटर तक सीमित हो गए है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मार्च 2026 तक देश भर से लाल आतंक को खत्म करने की प्रतिज्ञा की वजह से यह संभव हो पाया है. एक समय था नक्सलवाद की जड़ें 126 जिलों तक फैली थीं. हालांकि, अब 03 जिलों तक रेड कॉरिडोर सिमट कर रह गया है. सरकार के ताबड़तोड़ ऑपरेशन की वजह से उग्र माओवादी संगठनों की कमर टूट गई है.

