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विदेशों तक मशहूर है भिवानी का 'लाल सोना', इन किस्मों की गाजर से किसानों की हो रही बल्ले-बल्ले

भिवानी की गाजर की डिमांड केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक है. किसानों ने बताया क्वालिटी वाली गाजर की खेती का राज.

Bhiwani carrot cultivation
Bhiwani carrot cultivation (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : January 9, 2026 at 2:48 PM IST

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Updated : January 9, 2026 at 2:55 PM IST

3 Min Read
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भिवानी: गाजर सिर्फ सेहत के लिए ही अच्छी नहीं होती, बल्कि जो किसान इसकी खेती करते हैं, उनके लिए भी ये मुनाफे का सौदा है. गाजर की अगर सही तरीके से खेती की जाए तो आपको बंपर पैदावार मिलेगी और आप मालामाल हो जाएंगे. जी हां 90 दिनों से भी कम वक्त में आप गाजर की खेती से लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं. किसानों की मानें तो गाजर की खेती में लागत और समय कम, जबकि मुनाफा ज्यादा होता है. भिवानी की गाजर तो विदेश तक मशहूर है.

गाजर की खेती का तरीका: भिवानी के गांव चांग, बामला, सरसा, ढाणी हरसुख, रिवाड़ी खेड़ा में गाजर की खेती बहुत अधिक होती है. यहां की गाजर देश में तो बिकती है, लेकिन विदेश में भी काफी मशहूर है. इसका कारण है यहां की जलवायु और मिट्टी. गाजर की खेती के लिए मिट्टी बहुत उपयुक्त है. गाजर की खेती करने के लिए अक्टूबर से नवंबर तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है. जब तापमान 15-25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. गाजर की कई उत्तम किस्में होती है. जैसे की पूसा रुधिरा और पूरा केसर जो कम समय में जबरदस्त मुनाफा देती है.

गाजर की खेती का तरीका (Etv Bharat)

दोमट मिट्टी में होती है गाजर की गजब पैदावार: भिवानी के किसानों का कहना है कि "गाजर की खेती के लिए भुरभुरी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो. खेत तैयार करते समय 10-12 बार जुताई करनी चाहिए, प्रति एकड़ खेत में 40 किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फास्फोरस और 20 किलो पोटाश डालना उचित रहता है. यानी क्षेत्र की जलवायु व मिट्टी गाजर की खेती के लिए फायदेमंद है".

किसानों को हो रहा मुनाफा: बता दें कि भिवानी में गाजर की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा होता है, क्योंकि यहां की गाजर की मांग बहुत ज्यादा रहती है. गाजर की ऑर्गेनिक खेती भी की जा सकती है. यदि गोबर की खाद मिलाकर बुवाई की जाए तो उत्तम किस्म की फसल तैयार हो जाती है. एक एकड़ में औसतन 100 क्विंटल तक पैदावार होती है. जिसका औसत भाव 20-30 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है. गाजर की बुवाई भी मशीनों से की जाती है और खुदाई भी ट्रैक्टरों द्वारा होती है. जिससे करीब 20 परिवारों को रोजगार मिलता है. गाजर की धुलाई भी मशीनों से ही की जाती है.

विदेशों तक होता है निर्यात: भिवानी से गाजर का निर्यात हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग देशों तक है. यहां की गाजर भूटान, नेपाल, श्रीलंका तक भी इसका निर्यात किया जाता है. भिवानी जिले की मंडी से देश व विदेश तक गाजर का व्यापार किया जाता है. जिससे किसानों को भी फायदा होता है. यहां गाजर को भिवानी का लाल सोना के नाम से भी जाना जाता है.

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Last Updated : January 9, 2026 at 2:55 PM IST