नाबालिग के साथ दुष्कर्म, भाटापारा कोर्ट ने आरोपी और सहयोगी को सुनाई 20–20 साल की कठोर सजा
भाटापारा के अपर सत्र न्यायालय ने नाबालिग लड़की के साथ अनाचार करने वाले दो आरोपियों को 20–20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 7, 2026 at 7:52 AM IST
बलौदाबाजार: जिले की न्यायिक व्यवस्था से एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने यह साफ संदेश दे दिया है कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर कानून की नजर सख्त है और दोषियों के लिए कोई नरमी नहीं. भाटापारा के अपर सत्र न्यायालय ने नाबालिग लड़की के साथ अनाचार और उसे अंजाम देने में सहयोग करने वाले दो आरोपियों को 20–20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाकर समाज में एक मजबूत नजीर पेश की है.
पूरा मामला: स्कूल जाने निकली, घर नहीं लौटी
मामला भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र का है. 11 अगस्त 2024 को पीड़िता के पिता ने थाना भाटापारा ग्रामीण में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग बेटी 10 अगस्त की सुबह करीब 8 बजे घर से स्कूल जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी. परिवार ने पहले अपने स्तर पर रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में खोजबीन की, लेकिन बच्ची का कहीं कोई सुराग नहीं मिला. पिता की रिपोर्ट पर पुलिस ने गुम इंसान दर्ज करते हुए यह आशंका जताई कि अज्ञात व्यक्ति बहला-फुसलाकर बच्ची को भगा ले गया होगा. अपहरण की आशंका जताते हुए अपराध पंजीबद्ध किया.
जांच के दौरान सामने आया कि पीड़िता को एक व्यक्ति ने शादी का प्रलोभन देकर बहला-फुसला कर घर से भगा ले गया था. सबसे गंभीर बात यह थी कि आरोपी अकेला नहीं था. इस अपराध में उसका साथी भी शामिल था. दोनों ने मिलकर नाबालिग को भाटापारा ग्रामीण क्षेत्र के नयापारा स्थित एक मकान में रखा.
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म
लगातार प्रयासों और तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने 2 सितंबर 2024 को बड़ी सफलता हासिल की. पीड़िता को सह आरोपी के नयापारा स्थित मकान से सुरक्षित बरामद किया गया. बरामदगी के बाद पीड़िता ने बयान में बताया कि आरोपी ने उसे शादी का भरोसा दिलाया और फिर अपने दोस्त के घर में रखकर उसके साथ बार-बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए. पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया, मेडिकल परीक्षण कराया और आवश्यक जब्ती की कार्रवाई की.
अभियोजन ने अदालत में रखा पूरा सच
पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपियों के खिलाफ चालान माननीय न्यायालय में पेश किया. मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता, उसके परिजन और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए. मेडिकल रिपोर्ट, जप्ती पंचनामा और परिस्थितिजन्य साक्ष्य अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत करते चले गए. विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी ने अदालत में प्रभावी पैरवी की. अंतिम बहस में उन्होंने कहा कि यह अपराध न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि समाज की आत्मा को झकझोरने वाला है. उन्होंने अदालत से अपील की कि ऐसे अपराधियों को कड़ा दंड दिया जाए, ताकि समाज में एक सख्त संदेश जाए और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ अपराधों में कमी आए.
अपर सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार जायसवाल ने मामले की गंभीरता, अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण किया. अदालत ने माना कि आरोपी ने नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया. और सह आरोपी ने इस अपराध में सक्रिय सहयोग दिया. अदालत ने स्पष्ट कहा कि नाबालिग के खिलाफ किए गए इस तरह के अपराध में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय के साथ अन्याय होगी. दोनों आरोपियों को पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया.

