1.99 लाख हेक्टेयर में रबी की बुवाई की उम्मीद, सरसों पर खास फोकस, ज्यादा यूरिया नहीं…संतुलित खाद से बढ़ेगी तेल और दाने की गुणवत्ता
यूरिया और एनपीके की मौजूदा उपलब्धता सितंबर की अनुमानित मांग से अधिक है, जबकि डीएपी की उपलब्धता मांग से काफ़ी कम है.

Published : August 25, 2026 at 2:55 PM IST
भरतपुर: जिले में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियां शुरू हो गई हैं. कृषि विभाग ने इस बार जिले में करीब एक लाख 98 हजार 915 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई होने का अनुमान लगाया है. इनमें सरसों सबसे प्रमुख फसल 1.32 लाख हेक्टेयर रहेगी. सितंबर से बुवाई का दौर शुरू होने के साथ ही जिले में उर्वरकों की मांग भी बढ़ेगी. कृषि विभाग ने किसानों को खाद की उपलब्धता के साथ-साथ संतुलित पोषक तत्वों के इस्तेमाल पर जोर दिया है. सरसों को सिर्फ यूरिया के भरोसे न छोड़ें. फसल को नाइट्रोजन के साथ फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और कैल्शियम का संतुलित पोषण देना जरूरी है.
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक राधेश्याम मीणा ने बताया कि सितंबर माह में जिले में करीब 4,500 मीट्रिक टन यूरिया, 6,550 मीट्रिक टन डीएपी और 1,240 मीट्रिक टन एनपीके की आवश्यकता का अनुमान है. वर्तमान में जिले में 6,340 मीट्रिक टन यूरिया, 1,643 मीट्रिक टन डीएपी और 3,187 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है. यूरिया और एनपीके की मौजूदा उपलब्धता सितंबर की अनुमानित मांग से अधिक है, जबकि डीएपी की उपलब्धता मांग से काफ़ी कम है. ऐसे में कृषि विभाग की नजर उर्वरक आपूर्ति व्यवस्था पर है. किसानों से भी अपील की गई है कि वे आवश्यकता के अनुरूप ही खाद खरीदें और अनावश्यक भंडारण से बचें.
पढ़ें: भीलवाड़ा में 3 लाख 60 हजार हेक्टेयर में होगी रबी की बुवाई, बांधों से छोड़ेंगे पानी
सल्फर और कैल्शियम की जरूरत: राधेश्याम मीणा ने बताया कि भरतपुर में रबी सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में सरसों शामिल है. सरसों तिलहनी फसल होने के कारण इसमें सल्फर और कैल्शियम की विशेष आवश्यकता होती है. सरसों में सिंगल सुपर फास्फेट यानी एसएसपी का उपयोग उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इसमें फास्फोरस के साथ सल्फर और कैल्शियम भी उपलब्ध होता है. वहीं डीएपी से मुख्य रूप से नाइट्रोजन और फास्फोरस मिलता है, जबकि यूरिया में केवल नाइट्रोजन होती है. ऐसे में यदि किसान लगातार केवल यूरिया का इस्तेमाल करता है तो फसल को सभी आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते. मिट्टी और फसल की आवश्यकता के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और कैल्शियम का संतुलित पोषण सुनिश्चित किया जाए.
दाने की गुणवत्ता भी जरूरी: मीणा ने बताया कि किसी भी फसल को संतुलित पोषण मिलने पर उसका असर केवल पौधे की बढ़वार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि तने की मजबूती, जड़ों के विकास, फली में दाने के आकार और फसल की गुणवत्ता पर भी दिखाई देता है. अलग-अलग पोषक तत्वों का फसल में अलग-अलग काम होता है. कुछ तत्व पौधे की बढ़वार बढ़ाते हैं, कुछ तने और जड़ों को मजबूत करते हैं, जबकि कुछ तत्व दाने की गुणवत्ता और तेल की मात्रा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसलिए सरसों में संतुलित पोषण देने से दाने का आकार, चमक और तेल की मात्रा बेहतर होने की संभावना रहती है. कृषि विभाग पहले भी किसानों को जरूरत से अधिक यूरिया के इस्तेमाल से बचने की सलाह दे चुका है.
यह भी पढ़ें: धौलपुर में बारिश ने बिगाड़ा फसल का गणित
अधिक यूरिया से पौधे की वेजिटेटिव ग्रोथ: कृषि विभाग पहले भी किसानों को जरूरत से अधिक यूरिया के इस्तेमाल से बचने की सलाह दे चुका है. अधिक यूरिया से पौधे की वेजिटेटिव ग्रोथ यानी बढ़वार ज्यादा हो सकती है. सरसों में फास्फोरस, सल्फर और कैल्शियम सहित अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की संतुलित उपलब्धता फसल के बेहतर विकास में मदद कर सकती है. बेहतर पोषण से सरसों की उत्पादकता और तेल की मात्रा में वृद्धि की संभावना रहती है, जिससे मंडी में गुणवत्ता के आधार पर किसानों को बेहतर भाव मिलने की उम्मीद भी बढ़ जाती है. मीणा ने किसानों को सरसों की बेहतर पैदावार के लिए तीन महत्वपूर्ण बातों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है. गुणवत्तायुक्त बीज, फसल की आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्व और समय पर सिंचाई. अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन करने के साथ खेत और फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल किया जाए तथा फसल को आवश्यकता के अनुरूप समय पर पानी दिया जाए तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार की संभावना रहती है.विभाग ने जैविक पोषण पर भी जोर देते हुए किसानों को ढैंचा जैसी हरी खाद को अपनाने की सलाह दी है. इसके साथ एसएसपी, डीएपी तथा कैल्शियम और सल्फर युक्त उर्वरकों का उपयोग फसल की जरूरत के अनुसार करने को कहा गया है. रबी में गेहूं के बाद सरसों सबसे बड़ा फसल क्षेत्रकृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस रबी सीजन में जिले में कुल 1,98,915 हेक्टेयर में फसलों की बुवाई होगी. इसमें सबसे बड़ा क्षेत्र सरसों का है.
| फसल | संभावित बुवाई क्षेत्र (हेक्टेयर में) |
| सरसों | 1,32,000 |
| गेहूं | 63,000 |
| चना | 1,300 |
| जौ | 600 |
| अन्य दलहन | 100 |
| तारामीरा | 15 |
| अन्य फसलें | 1,900 |
| कुल | 1,98,915 |

