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भरत तिवारी एनकाउंटर: मानवाधिकार आयोग का एक्शन, 17 जुलाई को जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन

भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउटंर मामले में मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रूख अपनाया है. दूसरी ओर 17 जुलाई को दिल्ली जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होगा.

Bharat Tiwari Encounter
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 8, 2026 at 2:46 PM IST

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भोजपुर: शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी का कथित एनकाउंटर हुआ था. इस दर्दनाक घटना को बीते हुए अब 20 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है. इस मामले को लेकर शुरुआत से ही पुलिस की कार्यप्रणाली और कार्रवाई पर लगातार गंभीर सवाल उठते रहे हैं.

मानवाधिकार आयोग का कड़ा रुख: इस संवेदनशील मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. आयोग ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मृतक भरत भूषण तिवारी के माता-पिता को तत्काल अंतरिम मुआवजा उपलब्ध कराया जाए. किसी भी हाल में पीड़ित परिवार को राहत मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए.

मानवीय आधार पर तत्काल सहायता: आयोग ने अपने आदेश में साफ कहा है कि इस अंतरिम मुआवजे से पुलिस कार्रवाई की वैधता या जारी जांच प्रक्रिया बाधित नहीं होगी. पुलिस की लापरवाही या दोष का अंतिम निर्धारण जांच एजेंसियां और सक्षम न्यायालय ही करेंगे. यह सहायता केवल मानवीय आधार पर पीड़ित परिवार को तुरंत सहारा देने के लिए है.

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भरत तिवारी (ETV Bharat)

अधिवक्ता ने बताया महत्वपूर्ण कदम: मानवाधिकार आयोग के इस बड़े निर्देश के बाद राज्य सरकार को पीड़ित परिवार को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे. इस मामले पर पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनीष कुमार का कहना है कि आयोग का यह सख्त रुख भविष्य में ऐसे अन्य मामलों में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने में मददगार साबित होगा.

"मुआवजा देने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी तय हो गई है. यह केवल मानवीय आधार पर पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का कदम है. आयोग का यह रुख भविष्य में ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत देने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाएगा." -मनीष कुमार, अधिवक्ता, पटना हाईकोर्ट

परिजनों ने तेज किया आंदोलन: दूसरी तरफ, घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी उचित न्याय न मिलने पर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है. परिवार का आरोप है कि दोषियों के खिलाफ अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है. शासन-प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से पीड़ित परिवार और उनके समर्थकों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

भरत तिवारी के मां-पिता की अपील (ETV Bharat)

नेताओं के हस्तक्षेप के बाद भी देरी: पीड़ित समर्थकों का कहना है कि इस मामले में हजारों लोगों का समर्थन मिला है. विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों सहित पक्ष-विपक्ष के कई मंत्रियों, सांसदों और विधायकों ने भी हस्तक्षेप किया है. इसके बावजूद न्याय मिलने की पूरी प्रक्रिया बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है, जिससे लोग निराश हैं.

सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल: परिवार ने प्रशासन पर संगीन आरोप लगाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि मामले से जुड़े एक आरोपी अधिकारी को पहले निलंबित किया गया था. लेकिन बाद में चालाकी से उसे दूसरे विभाग में ऊंचे पद पर पदस्थापित कर दिया गया, जो पूरी जांच को संदेहास्पद बनाता है.

जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन: प्रशासनिक रवैये से तंग आकर परिजनों ने आंदोलन को दिल्ली ले जाने का फैसला किया है. आगामी 17 जुलाई को इस घटना को पूरा एक महीना हो जाएगा. इसी कड़ी में 17 जुलाई को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित करके सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी.

देशवासियों से कानून रक्षा की अपील: भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और मां आशा देवी ने देशभर के लोगों और सभी संगठनों से 17 जुलाई को जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल उनके पुत्र के लिए नहीं है. यह देश के प्रत्येक नागरिक के अधिकार और कानून के शासन की रक्षा के लिए लड़ा जा रहा है.

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इसी जगह हुआ था एनकाउंटर (ETV Bharat)

"17 जुलाई को सभी लोग दिल्ली जंतर मंतर पर पहुंचिये. मेरे बेटे की हत्या में जो भी शामिल है, उसे फांसी होनी चाहिए. मोदी जी इस घटना में हस्तक्षेप करें और कार्रवाई करें." -आशा देवी, भरत तिवारी की मां

क्या है मामला?: भोजपुर में 17 जून को भरत तिवारी का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया था. घायल भरत तिवारी की पटना में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. जिसके बाद परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. इस मामले में शाहपुर थानाध्यक्ष समेत कई पुलिस कर्मियों को सस्पेंड किया गया था.

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