इंदौर में भागीरथपुरा में हुई मौतों से पसरा मातम, महापौर नहीं मनाएंगे होली और रंग पंचमी
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 35 लोगों की मृत्यु से दु:खी महापौर पुष्यमित्र भार्गव नहीं मनाएंगे होली. रंग-पंचमी के आयोजन से रखेंगे दूरी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 8:23 PM IST
रिपोर्ट: सिद्धार्थ माछीवाल
इंदौर: देशभर में स्वच्छ शहर के नाम से चर्चित इंदौर में दूषित पानी से 35 से ज्यादा लोगों की मृत्यु के चलते इस बार भागीरथपुरा में मातम की पहली होली है. जहां इस बार होली पर मातम पसरा हुआ है. लोगों की मृत्यु से दुखी महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने होली और रंग पंचमी का त्यौहार नहीं मानने की घोषणा की है.
रंग पंचमी और होली के आयोजन से दूरी
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, "दूषित पानी की समस्या के कारण भागीरथपुरा में लोगों को भीषण त्रासदी का सामना करना पड़ा और कई घरों में लोगों ने अपनों को खो दिया. इसलिए इस बार मैंने शोक स्वरूप होली एवं रंग पंचमी के त्यौहार में शामिल नहीं होने का फैसला किया है. नगर निगम की तमाम व्यवस्थाएं जो रंग पंचमी की गैर में लगती थीं. वह सुचारू रूप से लगेगी, लेकिन मैं खुद आयोजन में शामिल नहीं रहूंगा."
मौत 35 से ज्यादा, सरकार ने स्वीकारी 22
इंदौर के भागीरथपुरा में 21 से 29 दिसंबर के बीच डायरिया और दूषित पानी के भीषण संक्रमण के कारण 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. बीते दिनों विधानसभा में यह मामला गरमाया तो सरकार ने दूषित पानी और डायरिया से 22 लोगों के मौत की बात स्वीकार की. सभी पीड़ित परिवारों को कुल 44 लाख रुपए की मुआवजा राशि दी गई है. इस मामले में राज्य सरकार का रुख निराशाजनक रहा. लिहाजा न तो समय पर लोगों का पोस्टमार्टम हुआ और न ही राज्य सरकार कोर्ट में मृत्यु के वास्तविक आंकड़े प्रस्तुत कर पाई.

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सरकार ने मौतों का स्पष्ट कारण भी नहीं बताया. इसके कारण लोग नाराज हैं. इसके अलावा दूषित पानी से संक्रमण के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान जिन-जिन लोगों की मौत हुई, उनकी मौत का कारण स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें पूर्व से अन्य बीमारियों का होना दर्शाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया. यही वजह है कि भागीरथपुरा में सिस्टम की खामी के बावजूद सरकार की असंवेदनशीलता हावी रही. जिसके कारण आज यहां होली पर पूरे इलाके में मातम जैसी स्थिति बनी हुई है.

