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हिमाचल में शुरू हुआ 'काला महीना', एक माह तक सास-बहु नहीं रहेंगी एक साथ

भादो मास की शुरुआत में देवता गौहरी ने बांधा रक्षा सूत्र, गुरों ने बिच्छू बूटी के साथ की देव खेल.

Bhadrapada Month 2026
देवता गौहरी ने आसुरी शक्तियों से बचाव के लिए बांधा रक्षा सूत्र (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 18, 2026 at 9:24 PM IST

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कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में भादो मास की शुरुआत हो चुकी है. भादो मास को हिमाचल प्रदेश में काला महीना के नाम से भी जाना जाता है. कुल्लू के पुरोहित विजय शर्मा के अनुसार मान्यता है कि इस पूरे महीने असुरी शक्तियां काफी हावी रहती हैं. जिसके चलते घाटी के सभी देवी देवता अपने-अपने इलाके की रक्षा के लिए देव कार्यों को पूरा करते हैं. इसी कड़ी में जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर में भी देवता गौहरी द्वारा आसुरी शक्तियों से बचाव के लिए रक्षा सूत्र बांधा गया.

गुरों ने बिच्छू बूटी के साथ खेली देव खेल

वहीं, इस अवसर पर महंत बेहड़ में देव खेल का भी आयोजन किया गया. इस दौरान देवता के गुर द्वारा बिच्छू बूटी के साथ देव खेल की गई और उसके बाद सभी श्रद्धालुओं को बिच्छू बूटी का प्रसाद भी बांटा गया. देवता गौहरी के कारदार राजकुमार महंत ने बताया कि मान्यता है कि इस बिच्छू बूटी के प्रसाद को घर ले जाने पर आसुरी शक्तियां घर में प्रवेश नहीं करती है और परिवार के लोगों की बुरी शक्तियों से भी रक्षा होती है. ऐसे में देवता गौहरी द्वारा पूरे इलाके में रक्षा सूत्र भी बांधा गया और अपने भक्तों को बुरी शक्तियों से बचाव का भी आशीर्वाद दिया गया.

हिमाचल में शुरू हुआ 'काला महीना' (Bhadrapada Month 2026)

"पिछले दिन से ही देवता पूरे इलाके का भ्रमण कर रहे हैं और घर-घर जाकर लोगों को आशीर्वाद भी दे रहे हैं. मंगलवार को भी देवता द्वारा महंत बेहड़ में देव कार्य को पूरा किया गया और सभी लोगों को आसुरी शक्तियों से बचाव का आशीर्वाद भी दिया गया. देवता की पूरे इलाके में काफी मान्यता है और देवता बुरी शक्तियों से अपने भक्तों का बचाव करते हैं." - राजकुमार महंत, कारदार, देवता गौहरी

देवताओं और डायनों के बीच होता है युद्ध

पुरोहित विजय शर्मा ने बताया कि भादो महीने के अवसर पर देवताओं और आसुरी शक्तियों के बीच युद्ध भी होता है और देवी-देवता अपने-अपने जागरण पर इस पूरे युद्ध का बखान भी करते हैं. कहा जाता है कि देवताओं और डायनों का युद्ध मंडी जिले की गोगराधार की पहाड़ी पर होता है. ऐसे में देवताओं द्वारा भादो महीने के अंतिम दिनों में युद्ध का वर्णन किया जाता है और यह भी बताया जाता है कि इस बार यह युद्ध डायनों द्वारा जीत गया है या फिर इस युद्ध में देवताओं की जीत हुई है. ऐसे में भादो मास में शुभ कार्यों पर भी रोक लग जाती है.

सास-बहू नहीं रहती हैं एक साथ

पुरोहित विजय शर्मा ने बताया कि भादो मास में हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में नव विवाहित महिला भी अपने मायके चली जाती है और काला महीना खत्म होने के बाद ही अपने ससुराल वापस लौटती है. उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि अगर इस काले महीने में नव विवाहित महिला और सास एक साथ रहे तो उनके बीच पूरा जीवन अनबन रहती है और दोनों के संबंध कभी भी ठीक नहीं होते हैं.

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